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मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश का असर: ग्वालियर में पोटाश गन की खुलेआम बिक्री पर पुलिस की कार्रवाई, एसपी ने लिया संज्ञान
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए दावा किया कि घुसपैठियों की पहचान के नाम पर शुरू की गई इस प्रक्रिया में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटने की बात सामने आई, लेकिन कितने घुसपैठियों की पहचान हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुरैशी ने एक अखबार में प्रकाशित जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि करीब 500 विदेशी नागरिक पाए गए थे, जिनमें 150 बांग्लादेशी बताए गए।

कुरैशी ने कहा कि SIR नाम की किसी प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख न तो संविधान में है, न जनप्रतिनिधित्व कानून में और न ही मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 में किसी निर्वाचन क्षेत्र या उसके हिस्से में गहन पुनरीक्षण की व्यवस्था है, लेकिन इसके लिए लिखित कारण बताने होते हैं। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए।

पूर्व CEC ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने पर ज्यादा जोर दिया गया, जबकि नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम पलायन के कारण हटाए गए, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वे कहां गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब घुसपैठियों की पहचान को इस प्रक्रिया की प्रमुख वजह बताया गया था, तो अब तक कितने घुसपैठिए पकड़े गए, इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।

कुरैशी ने अपने इंटरव्यू में कहा कि इस मुद्दे पर लगातार नाम हटाए जाने की चर्चा हुई, लेकिन नाम जोड़ने और लोगों के कथित पलायन को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई दी। उन्होंने दावा किया कि वह लंबे समय से SIR की वैधता पर आपत्ति जता रहे हैं, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कुरैशी के मुताबिक, अदालत में भी यह सवाल नहीं पूछा गया कि इस प्रक्रिया के तहत कितने घुसपैठियों की पहचान हुई। उन्होंने एक अखबार में प्रकाशित आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 500 विदेशी नागरिक पाए जाने की जानकारी थी, जिनमें 150 बांग्लादेशी और बाकी में नेपाल के नागरिक शामिल बताए गए थे।

कुरैशी के इस इंटरव्यू पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकार परवेज आलम की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा कि भारत के एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का लंदन में रह चुके एक पत्रकार के सामने भारत की बुराई करना अफसोसजनक है। सिब्बल ने टिप्पणी की कि इससे सबकुछ खुद ही साफ हो जाता है।
अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिकों के बीच कई स्थानों पर फेस-ऑफ अब भी जारी है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने इसकी सार्वजनिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि हाल में अरुणाचल में कई जगह आमने-सामने की स्थिति बनी और इस दौरान ITBP की शौर्य कमांडो टीमों ने प्रभावी भूमिका निभाई। सीमा पर तनाव के बीच ITBP ड्रोन, विशेष कमांडो, आधुनिक ट्रेनिंग और भूमिगत बंकरों के जरिए अपनी तैयारियां मजबूत कर रही है।

ITBP महानिदेशक ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में जवानों को संबोधित करते हुए अरुणाचल प्रदेश में जारी फेस-ऑफ का जिक्र किया। यह बयान ऐसे समय आया है, जब जुलाई से राज्य के कुछ सीमावर्ती इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने आने की खबरें सामने आ रही थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, असफिला और तकसिंग के आसपास चीनी सैनिकों के तंबू लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर जोर

ITBP अब सीमा सुरक्षा में आधुनिक तकनीक की भूमिका बढ़ा रही है। महानिदेशक के मुताबिक, हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून तैयार की गई है। ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है और बल अपने स्तर पर ड्रोन बनाने पर भी काम कर रहा है, ताकि बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो सके।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, आधुनिकीकरण के लिए मिले 400 करोड़ रुपये में से 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन क्षमताओं को बढ़ाने पर खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना में 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए निर्धारित किए गए हैं।

ITBP प्रमुख ने रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान-अमेरिका संघर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन की भूमिका तेजी से बढ़ी है। उनके मुताबिक, ड्रोन ऐसी तकनीक है, जो कम संसाधनों वाले पक्ष को भी शक्तिशाली विरोधी के सामने चुनौती देने की क्षमता देती है।

गलवान जैसी स्थिति से निपटने के लिए विशेष ट्रेनिंग

ITBP ने जवानों को आमने-सामने की तनावपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का विशेष ट्रेनिंग कोर्स तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 10 हजार जवानों को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है और 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। पूरी फोर्स को 2027 के अंत तक इस ट्रेनिंग से गुजारने का लक्ष्य है।

इसके साथ ही शौर्य कमांडो टीमों की भूमिका बढ़ाई जा रही है। ITBP प्रमुख ने अरुणाचल में हालिया फेस-ऑफ के दौरान इन कमांडो के काम की सराहना की। बल की योजना विशेष हाई-एल्टीट्यूड माउंटेन फाइटिंग क्षमता विकसित करने की है, ताकि दुर्गम और ऊंचाई वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सके।

सीमा पर भूमिगत बंकर और आधुनिक उपकरण

आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए ITBP सीमा चौकियों पर भूमिगत शेल्टर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। बल का मानना है कि युद्ध की स्थिति में जमीन के ऊपर मौजूद इमारतें आसानी से निशाना बन सकती हैं, इसलिए भूमिगत संरचनाएं जवानों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

इसके अलावा पुराने हथियारों को बदलने, ऑल-टेरेन वाहनों और क्विक रिएक्शन वाहनों की खरीद तथा अत्यधिक ठंड में वाहनों को आसानी से चालू करने वाली ‘कोल्ड स्टार्ट किट’ उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।

जवानों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों की 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेट किया गया है। दूरदराज की चौकियों पर बिजली की व्यवस्था मजबूत करने के लिए 141 जनरेटर सेट लगाए गए हैं और सोलर वॉटर हीटर भी उपलब्ध कराए गए हैं।

जयराम रमेश ने सरकार पर उठाए सवाल

ITBP प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सीमा की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में फेस-ऑफ की पुष्टि हुई है, लेकिन प्रधानमंत्री और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रमेश ने वाचा-दमाई में हुई सैन्य वार्ता, कुछ गश्त बिंदुओं को लेकर स्थानीय स्तर पर सामने आई चिंताओं, अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिशों और ब्रह्मपुत्र पर बड़े बांध की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत-चीन व्यापार घाटे को लेकर भी चिंता जताई। ये बातें कांग्रेस नेता की ओर से उठाए गए आरोप और सवाल हैं।

अरुणाचल प्रदेश में फेस-ऑफ जारी रहने की पुष्टि के साथ ITBP की आधुनिक युद्ध संबंधी तैयारियां भी सामने आई हैं। ड्रोन, शौर्य कमांडो, विशेष ट्रेनिंग और भूमिगत शेल्टर पर बढ़ता जोर दिखाता है कि बल कठिन सीमावर्ती परिस्थितियों में निगरानी, सुरक्षा और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता मजबूत करने पर काम कर रहा है।
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मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाने वाली मुस्कान रस्तोगी से कवि दंपती सौरभ सुमन और अनामिका अंबर ने जेल में मुलाकात की। मुलाकात के बाद दंपती ने मुस्कान की दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च आजीवन उठाने की घोषणा की। साथ ही, अनामिका अंबर ने अदालत से अपील की कि बच्चियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनकी मां की सजा पर विचार किया जाए।

कवि दंपती के मुताबिक, जेल में मुस्कान का चेहरा डरा और सहमा हुआ नजर आया। उसकी आंखों में आंसू और मृत्युदंड को लेकर भय दिखाई दे रहा था। अनामिका अंबर ने कहा कि मुस्कान अपनी बच्चियों के भविष्य को लेकर भी चिंतित लग रही थी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुस्कान के मन में वास्तव में क्या चल रहा था, यह वह निश्चित रूप से नहीं कह सकतीं।

बच्चियों की पढ़ाई का खर्च आजीवन उठाने का फैसला

सौरभ सुमन ने कहा कि वह मुस्कान की दोनों बेटियों की शिक्षा पर होने वाला पूरा खर्च आजीवन उठाने के लिए तैयार हैं। अनामिका अंबर ने बताया कि दो दिन पहले मुस्कान को मृत्युदंड सुनाए जाने की खबर सामने आने के बाद उनके मन में बच्चियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर विचार आया था। उन्होंने तय किया था कि मुस्कान से मुलाकात होने पर उसकी बेटियों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने की बात करेंगी।

दंपती ने कहा कि इस अपराध में बच्चियों की कोई भूमिका नहीं है, इसलिए उनके भविष्य पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए। दोनों बच्चियों में से एक का जन्म जेल में हुआ है। उनका कहना है कि बच्चियों को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे आगे चलकर अपना जीवन बेहतर तरीके से जी सकें।

अपराध की माफी नहीं, लेकिन बच्चियों के भविष्य पर विचार की अपील

अनामिका अंबर ने साफ कहा कि मुस्कान का अपराध गंभीर है और इसके लिए माफी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मुस्कान के कृत्य का समर्थन नहीं कर रही हैं, बल्कि उन दो बच्चियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं, जिनका इस अपराध में कोई दोष नहीं है।

उन्होंने अदालत से अपील की कि बच्चियों के भविष्य को देखते हुए तब तक उनकी मां को फांसी न दी जाए, जब तक वे इतनी बड़ी न हो जाएं कि अपना जीवन खुद संभाल सकें। अनामिका के मुताबिक, बच्चियों के लिए उनकी मां सिर्फ एक अपराधी नहीं, बल्कि मां भी है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह स्पष्ट हो जाए कि बच्चियां मां के बिना अपना जीवन संभाल सकती हैं, तो सजा देने में देरी नहीं होनी चाहिए।

सौरभ राजपूत के परिवार से नहीं मिलीं अनामिका

जब अनामिका अंबर से पूछा गया कि क्या उन्होंने सौरभ राजपूत के परिवार से मुलाकात की है, तो उन्होंने बताया कि वह उनसे नहीं मिली हैं। उनके जेल जाने का उद्देश्य मुस्कान की बच्चियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर बात करना था। उन्होंने दोहराया कि सौरभ के साथ जो हुआ, वह गंभीर अपराध था और उसमें किसी तरह की माफी नहीं होनी चाहिए। उनकी अपील अपराध को सही ठहराने के लिए नहीं, बल्कि बच्चियों के भविष्य को ध्यान में रखकर की गई है।

अनामिका अंबर ने महिलाओं से भी अपील की कि वे अपने रिश्तों में अपनी बात स्पष्ट रूप से रखें। अगर किसी रिश्ते में परेशानी है या वे किसी दूसरे व्यक्ति के साथ जीवन बिताना चाहती हैं, तो अपनी इच्छा साफ तौर पर बताएं। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए, जिससे किसी की जान चली जाए और पूरा परिवार बर्बाद हो जाए।

कवि दंपती ने स्पष्ट किया कि मुस्कान के अपराध की गंभीरता अपनी जगह है, लेकिन उसकी दोनों बेटियों को उस अपराध का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए। फिलहाल, उनकी पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चियों की शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित बनाने में मदद करना है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने विभिन्न प्रतिष्ठानों पर की छापामार कार्रवाई

रतवा रोड पर संचालित डेयरी से 35 किग्रा. मावा एवं 28 लीटर रिफाइंड ऑयल जप्त

कलेक्टर भिण्ड श्री पवन कुमार जैन के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने मावा निर्माण यूनिटों एवं अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की। खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीमती किरण सेंगर ने नायब तहसीलदार श्री बलबीर सिंह भदौरिया एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुश्री रेखा सोनी के साथ मौ क्षेत्र की डेयरी का निरीक्षण किया। 

ग्राम गुमारा में मेहताब सिंह गुर्जर की डेयररी से मावा एवं घी के नमूने लेकर टीम रतवा रोड पर स्थित हरिराम राठौर की डेयरी पर पहुंची जहां दूध में रिफाइंड तेल और वनस्पति को मिलाकर मावा निर्माण किया जा रहा था मौके पर टीम ने मावा एवं रिफाइंड तेल व वनस्पति के मिश्रण का नमूना लेकर 35 किलोग्राम मावा एवं 28 लीटर रिफाइंड ऑयल व वनस्पति जप्त किया। 

खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीमती रीना बंसल ने शिकायत के आधार पर ग्राम रावतपुरा में पुलिस बल के साथ निरीक्षण किया। ग्राम रावतपुरा में संजीव त्रिपाठी उर्फ पंकज त्रिपाठी के त्रिपाठी किराना स्टोर से प्रगति टेस्ट नमक का नमूना, मुनेश कुशवाह निवासी ग्राम बिजोरा से बर्फी का नमूना, अतर सिंह परिहार से बेसन के लड्डू का नमूना लेकर प्रेम नारायण गुप्ता उर्फ पिंटू की दुकान का भी निरीक्षण किया।
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Directorate of Health Services, Madhya Pradesh
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दंदरौआ धाम मंदिर में भरभराकर गिरा बिल्डिंग का हिस्सा, बड़ा हादसा टला; जनहानि नह
दंदरौआ धाम मंदिर पर बिल्डिंग का एक हिस्सा भरभराकर गिरा , किसी तरह की कोई जन हानि नहीं
फ़र्ज़ी एप्प को लेकर फिर दी जानकारी
अटेर विधायक से विधानसभा क्षेत्र के लोगों नें किए सवाल तो विधायक ने छीना मोबाइल
भिंड में नो एंट्री में घुसे ट्रक-डंपर चालकों को पुलिस की समझाइश, दोबारा उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी

भिंड: शहर में यातायात व्यवस्था को दुरुस्त रखने और सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कोतवाली पुलिस ने नो एंट्री में प्रवेश करने वाले ट्रक और डंपर चालकों के खिलाफ सख्ती दिखाई। थाना प्रभारी अनीता गुर्जर ने शहर के अंदर से निकल रहे भारी वाहनों को रुकवाकर चालकों को यातायात नियमों का पालन करने की समझाइश दी।पुलिस ने सभी ट्रक-डंपर चालकों को एक लाइन में खड़ा कर चेतावनी दी कि भारी वाहन शहर के अंदर से निकालने के बजाय बाईपास मार्ग का उपयोग करें। इस दौरान पुलिस ने वाहनों की फोटो भी ली और स्पष्ट किया कि दोबारा नो एंट्री में प्रवेश करने पर चालानी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन जब्त करने सहित सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
कोतवाली पुलिस ने चालकों को समझाइश देकर फिलहाल छोड़ दिया। पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर बनाना और भारी वाहनों के कारण होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है।
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ग्वालियर-भिंड हाईवे को लेकर 26 अक्टूबर को संत समाज की बैठक, आंदोलन का होगा शंखनाद

दंदरौआ धाम के महंत रामदास जी महाराज सहित जिले के प्रमुख संत होंगे शामिल, डॉ. शिवप्रताप जी महाराज को बनाया बैठक का संयोजक

भिंड। ग्वालियर-भिंड हाईवे (एनएच-719) को लेकर सरकार की कथित वादाखिलाफी और गौ अभ्यारण्य के संबंध में फैलाई जा रही कथित भ्रामक जानकारी को लेकर संत समाज में नाराजगी है। इसी मुद्दे को लेकर जिले के संत समाज ने आंदोलन की रणनीति तैयार करने का निर्णय लिया है। इसके तहत 26 अक्टूबर को उमरी क्षेत्र स्थित त्रिमूर्ति धाम देवगढ़ में जिलेभर के संतों की बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में आगामी आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा।

अखिल भारतीय संत समिति के जिला अध्यक्ष संत कालिदास महाराज ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में बताया कि पहले यह बैठक 27 अक्टूबर को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे एक दिन पहले 26 अक्टूबर, सोमवार को आयोजित किया जाएगा। त्रिमूर्ति धाम के पीठाधीश्वर डॉ. शिवप्रताप जी महाराज को बैठक का संयोजक बनाया गया है।

बैठक में दंदरौआ धाम के महंत रामदास जी महाराज, संत हरिनिवास अवधूत जी महाराज चिलोंगा, संत नरसिंह दास जी महाराज डूंगरपुरा, शनिधाम के महंत त्यागी बाबा, संत प्रेमानंद सरस्वती चामुंडा महाराज, संत राघवपुरी महाराज, संत प्रद्युम्न महाराज मसूरी, संत पायलट बाबा दुधी महाराज, संत मोहनानंद जी महाराज, संत कमलदास जी महाराज टीकरी, संत रामेश्वर दास जी महाराज सहित अनेक संत शामिल होंगे।

इसके अलावा संत खर खट बाबा, संत मूर्तिदास जी, संत पांडरी सरकार, संत रंजीतानंद जी भिंडी बाबा, संत विश्वात्मबल, संत जगराम दास, संत ऋषि महाराज, संत सत्यनारायण दास जी, संत बजरंगदास, संत उमेश महाराज और संत हरिओमानंद महाराज सहित जिले के सैकड़ों संतों के साथ समाजसेवी, आमजन और भूतपूर्व सैनिकों के भी बैठक में शामिल होने की संभावना है।

बैठक में ग्वालियर-भिंड हाईवे से जुड़े मुद्दों और गौ अभ्यारण्य के विषय पर चर्चा कर आगामी आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी। संत समाज की इस बैठक को क्षेत्र में हाईवे से जुड़े मुद्दों को लेकर आगे की रणनीति तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भिंड कार्यक्रम में हुआ सम्मान
सऊदी अरब में दो बांग्लादेशी नागरिकों को मौत की सजा दिए जाने के मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नजरुल इस्लाम और स्वीटी अख्तर को 14 अक्टूबर को फांसी दिए जाने की खबर सामने आने के बाद उनके परिवारों ने मामले की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। बांग्लादेश सरकार ने भी सऊदी अरब से विस्तृत जानकारी मांगी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि दोनों लंबे समय से हिरासत में थे, फिर भी बांग्लादेशी राजनयिक मिशन को सजा लागू किए जाने से पहले इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।

द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों को 2023 में हिरासत में लिया गया था। शुरुआती खबरों में उन्हें पति-पत्नी बताया गया, लेकिन उनके विवाहित होने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। दोनों के खिलाफ आरोपों और उनके संबंधों को लेकर भी अलग-अलग विवरण सामने आए हैं।

सऊदी अरब के गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों को मक्का क्षेत्र में कथित अनैतिक गतिविधियों के मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत की प्रक्रिया पूरी होने और सजा की पुष्टि के बाद 14 अक्टूबर को मौत की सजा लागू की गई। हालांकि, सार्वजनिक बयान में कथित गतिविधियों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया।

बांग्लादेश के जेद्दा स्थित वाणिज्य दूतावास के एक ज्ञापन के अनुसार, नजरुल को 1 अगस्त 2023 को साइबर अपराध कानून के तहत हिरासत में लिया गया था, जबकि स्वीटी को अगले दिन व्यभिचार के आरोप में गिरफ्तार किए जाने का उल्लेख है। यह विवरण दोनों के खिलाफ आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से सामने आई जानकारी में अंतर भी दिखाता है। बांग्लादेशी मिशन ने अब संबंधित अदालतों के फैसलों और मुकदमे की विस्तृत जानकारी मांगी है।

नजरुल के पिता अब्दुल बशीर ने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की उम्मीद में बेटे को सऊदी अरब भेजने के लिए सात लाख टका उधार लिए थे। नजरुल 10 नवंबर 2022 को बांग्लादेश से सऊदी अरब गया था और वहां क्लीनर के तौर पर काम करता था। परिवार के मुताबिक, वह जेल में रहने के दौरान फोन पर उनसे बात करता था, लेकिन मौत की सजा दिए जाने से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं मिली।

पिता ने बताया कि कर्ज देने वाले लोग अब उनसे पैसे लौटाने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने अपने बेटे का शव बांग्लादेश वापस लाने और मामले की परिस्थितियों की जांच कराने की मांग की है। परिवार यह भी जानना चाहता है कि नजरुल के खिलाफ मुकदमा किस तरह चला और उसे अपना पक्ष रखने तथा कानूनी सहायता पाने का कितना अवसर मिला।

स्वीटी अख्तर के पिता फजल मिया ने भी बेटी को सऊदी अरब भेजने के लिए करीब डेढ़ लाख टका उधार लिए थे। परिवार के मुताबिक, स्वीटी ने फोन पर बताया था कि दूसरी महिला कर्मचारियों के साथ विवाद के बाद उसे फंसाकर जेल भेज दिया गया। इसके बाद करीब एक साल तक परिवार का उससे संपर्क टूट गया। बाद में वह महीने में लगभग एक बार फोन करने लगी।

स्वीटी के पिता के अनुसार, बेटी ने अपनी आखिरी बातचीत में कहा था कि शायद वह दो महीने में जेल से रिहा हो जाएगी। उसने मौत की सजा के बारे में परिवार को कुछ नहीं बताया था। द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, मौत की खबर सामने आने के बाद भी परिवार को उसकी स्थिति के बारे में आधिकारिक सूचना नहीं मिली थी। इस वजह से परिजन असमंजस में हैं और सरकार से स्पष्ट जानकारी मांग रहे हैं।

इस मामले पर बांग्लादेश सरकार ने सऊदी अधिकारियों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। सरकार यह जानना चाहती है कि उसके राजनयिक मिशन को मुकदमे और सजा की पूर्व सूचना क्यों नहीं दी गई। बांग्लादेशी अधिकारियों ने अदालत के फैसलों की प्रतियां और संबंधित दस्तावेज भी मांगे हैं, ताकि आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिल सके।

कांसुलर संबंधों पर 1963 के वियना कन्वेंशन का अनुच्छेद 36 विदेशी नागरिकों की गिरफ्तारी या हिरासत की स्थिति में अपने देश के कांसुलर अधिकारियों से संपर्क और सहायता से जुड़े अधिकारों का प्रावधान करता है। बांग्लादेश की चिंता इसी बात को लेकर है कि क्या उसके नागरिकों को आवश्यक कांसुलर सहायता उपलब्ध कराने का पर्याप्त अवसर मिला था।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन हुआ है। इसके लिए मुकदमे के दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के बीच हुए संवाद का पूरा विवरण सामने आना जरूरी है।

फिलहाल नजरुल का परिवार उसके शव को वापस लाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग कर रहा है, जबकि स्वीटी के परिवार को भी आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। बांग्लादेश सरकार सऊदी अरब के जवाब की प्रतीक्षा कर रही है। अब मामले में सबसे अहम सवाल यही हैं कि दोनों को किन आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई, मुकदमे के दौरान उन्हें कैसी कानूनी सहायता मिली और बांग्लादेशी मिशन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई।
भिंड पुलिस लाइन में मनाया गया पुलिस स्मृति दिवस, शहीदों को दी श्रद्धांजल
भिंड में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ कार्यक्रम में क्या बोले विधायक हेमंत कटारे
भिंड में मध्यप्रदेश श्रम जीवी पत्रकार संघ का संभागीय सम्मेलन हुआ आयोजित
दशहरा के पावन अवसर पर राजनांदगांव में रक्षित आरक्षित केंद्र में शस्त्रों की पूजा अर्चना के बाद पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा ने किए हर्ष फायर <nis:link nis:type=tag nis:id=view nis:value=view nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=trendingreels nis:value=trendingreels nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rajnandgaon nis:value=Rajnandgaon nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=chhattisgarh nis:value=Chhattisgarh nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=rajasthandiaries nis:value=rajasthandiaries nis:enabled=true nis:link/>
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई गोलीबारी के बाद भजन गायक अनूप जलोटा ने सलमान खान को बिश्नोई समाज से माफी मांगने की सलाह दी है। उनका कहना है कि लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए सलमान को इस दिशा में पहल करनी चाहिए। अनूप जलोटा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब टाइगर श्रॉफ से जुड़ी गोलीबारी की घटना के बाद फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

IANS से बातचीत में अनूप जलोटा ने कहा कि वह टाइगर श्रॉफ से जुड़ी घटना से बेहद दुखी हैं। उन्होंने कहा, “इस सबको रोकने का बस एक ही तरीका है। सलमान खान को बिश्नोई समाज से माफी मांग लेनी चाहिए।” अनूप के मुताबिक, 1998 के काले हिरण शिकार मामले को लेकर बिश्नोई समाज की भावनाएं आहत हुई हैं और इस नाराजगी को दूर करने की जरूरत है।

गायक ने कहा कि वह पहले भी सलमान खान से माफी मांगने की अपील कर चुके हैं। उनका मानना है कि यदि यह विवाद नहीं सुलझा, तो सलमान के साथ काम करने वाले लोगों और उनके परिवारों पर भी इसका असर पड़ सकता है। उन्होंने सलमान से अपील की कि वह मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश करें।

गौरतलब है कि 18 अक्टूबर को मुंबई के जुहू इलाके में टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी की घटना सामने आई थी। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, टाइगर सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति घायल हुए। घटना के बाद एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बिश्नोई गैंग से जुड़े लोगों ने जिम्मेदारी लेने का दावा किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

इस घटना के बाद सलमान खान और बिश्नोई समाज के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद की भी चर्चा तेज हुई है। अनूप जलोटा ने अपने बयान में माफी को तनाव कम करने का एक रास्ता बताया है। हालांकि, उनका यह बयान एक व्यक्तिगत राय और अपील है; इससे यह साबित नहीं होता कि टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की वजह यही विवाद था।
कलेक्टर एवं एसपी ने वैदिक मंत्रोच्चारों के साथ पुलिस लाइन भिण्ड में किया शस्त्र-पूजन

सीईओ जिपं., एडीएम, एएसपी, एसडीएम भी हुए शस्त्र-पूजन में शामिल

जिले वासियों को दी दशहरा पर्व की शुभकामनाएं

दशहरा पर्व का सनातन धर्म में धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है, दशहरा के पावन पर्व पर शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाने वाला शस्त्र पूजन पर पुलिस लाईन भिण्ड में उत्साह, उमंग व धूमधाम के साथ शस्त्रों की पूजा की गई। 

कलेक्टर भिण्ड श्री पवन कुमार जैन एवं पुलिस अधीक्षक श्री सूरज कुमार वर्मा की उपस्थिति में जिले का मुख्य शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत भिण्ड श्री वीरसिंह चौहान, अपर कलेक्टर श्री राजन बी नाडिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप पटेल, एसडीएम भिण्ड श्री महेन्द्र सौजन्या भी इस शस्त्र-पूजन में शामिल हुए।

बुराई पर अच्छाई की जीत के महापर्व विजय दशमी पर पुलिस लाइन में आयोजित हुए कार्यक्रम में कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित अन्य प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने सनातन संस्कृति के विधि-विधानों के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चारों के बीच पवित्र यज्ञ में आहुतियाँ देकर शस्त्र पूजन किया। इसके बाद मंगल आरती की गई।
 
कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सहित सभी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने जिले वासियों को दशहरा पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि बुराई पर अच्छाई के प्रतीक इस दशहरा पर्व को उत्साह और उमंग के साथ मनाएं।
भिण्ड पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अवैध पटाखों का भंडार पकड़ा, हजारों रुपये की सामग्री जब्त