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Bhind breaking news

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भिंड के रौन नगर परिषद का घेराव करते समय कांग्रेस नेता राहुल भदौरिया एवं कार्यकर्ता
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काग्रेस पार्टी के द्वारा आज रोन नगर परिषद का किया घेराव
कंगना रनौत ने तापसी पन्नू, आशुतोष राणा, राखी सावंत और सोनू सूद समेत कई बड़े कलाकारों पर बेहद तीखा हमला बोला है।
कंगना ने आरोप लगाया कि ये लोग केवल मीडिया में बने रहने और चर्चा हासिल करने के लिए उन्हें गालियां देते रहते हैं। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि ऐसे लोगों को उन पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है और वे उनकी बराबरी नहीं कर सकते।
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अवैध अंग्रेजी शराब की बिक्री और डिलीवरी करने वाला आरोपी गिरफ्तार, 53.445 लीटर शराब जब्त

भिंड। जिले में अवैध शराब की बिक्री और डिलीवरी करने वालों के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी अभियान के तहत थाना सिटी कोतवाली पुलिस ने अवैध अंग्रेजी शराब की बिक्री और डिलीवरी करने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार 23 मई 2025 को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मेला ग्राउंड के पास एक व्यक्ति बैग में शराब रखकर डिलीवरी करने के लिए खड़ा है। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और एक व्यक्ति को पकड़कर उसके बैग की तलाशी ली। तलाशी के दौरान बैग से 20 पाव देशी प्लेन शराब के प्रत्येक 180 एमएल तथा रॉयल स्टेज कंपनी की 750 एमएल की एक बोतल बरामद हुई।
मेरठ में किसान नेता दिग्विजय भाटी और उनके साथी मोहित जाटव से कथित मारपीट के मामले में इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई डीआईजी सहारनपुर की जांच और मामले से जुड़े लोगों के बयानों के बाद की गई है।

दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया था कि पुलिस हिरासत के दौरान उनके और मोहित जाटव के साथ एसएसपी कार्यालय तथा एसओजी कार्यालय में मारपीट की गई। दोनों ने पुलिसकर्मियों पर थर्ड डिग्री देने के भी गंभीर आरोप लगाए थे। मेरठ पुलिस ने शुरुआती तौर पर इन आरोपों को खारिज किया था और मामले की जांच शुरू की गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सहारनपुर के डीआईजी को जांच सौंपी गई। जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रिकॉर्ड समेत अन्य पहलुओं की पड़ताल की गई। अधिकारियों ने मामले से जुड़े लोगों के बयान भी दर्ज किए।

इससे पहले इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ समेत आठ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया था। इसके बाद जांच में सामने आए तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर अखिलेश गौड़ के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, निलंबन की वजह कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही, उदासीनता और स्वेच्छाचारिता बताई गई है।

दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव ने आरोप लगाया था कि उनके साथ पुलिस कार्यालय और एसओजी कार्यालय में मारपीट की गई। इस मामले को लेकर किसान संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने भी कार्रवाई की मांग की थी। सपा विधायक अतुल प्रधान समेत कई नेताओं ने मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

फिलहाल इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ के निलंबन के बाद मामले में आगे की जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
🚨 गोरमी में मजिस्ट्रेट चेकिंग का बड़ा एक्शन, 100 वाहनों पर चालानी कार्रवाई 1.31 लाख रुपए का जुर्माना 
सीट बेल्ट नहीं लगाने पर पुलिस की गाड़ी भी रोकी, नियम तोड़ने वालों पर सख्ती
गोरमी में मजिस्ट्रेट चैकिंग के दौरान पुलिस की गाड़ी पर कार्यवाही
गोरमी में मैजिस्ट्रेट चेकिंग के दौरान वाहन चालकों में हड़कंप
खाद्य सुरक्षा विभाग अधिकारियों ने तहसील मिहोना और भिण्ड में की सख्त कार्यवाही

50 किलोग्राम मावा, 32 किलो वनस्पति एवं 13.8 किलोग्राम ग्लूकोज पाउडर किया जप्त

होटलों से लिए नमूने, सूर्या ढ़ाबा को दिया नोटिस

कलेक्टर भिण्ड एवं अभिहित अधिकारी खाद्य सुरक्षा प्रशासन के निर्देशन में खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा तहसील मिहोना और भिण्ड में सख्त कार्यवाही की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीमती किरन सेंगर ने ग्वालियर रोड़ स्थित सूर्या ढ़ाबा, जय गुरुदेव भोजनालय, विरासत होटल और खाना कंपनी की किचिन में बन रहे खाने की जांच की एवं सभी होटलों से पनीर के नमूने जांच वास्ते एकत्र किए। 

सूर्या ढ़ाबा की किचिन में स्वच्छता एवं अन्य अनियमितताएं पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 32 के अंतर्गत नोटिस जारी करने की कार्रवाई की गई। खाद्य सुरक्षा अधिकारी कु. रेखा सोनी ने तहसील मिहोना के ग्राम चांदोख स्थित उत्तम डेयरी पर छापामार कार्रवाई कर दूध में वनस्पति और ग्लूकोज पाउडर मिलाकर मावा बनाते हुए पकड़ा।

डेयरी संचालक उत्तम शर्मा से दूध मावा वनस्पति और ग्लूकोज पाउडर के नमूने जांच वास्ते लेकर 50 किलोग्राम मावा, 32 किलो वनस्पति एवं 13.8 किलोग्राम ग्लूकोज पाउडर जप्त किया। रजिस्ट्रीकरण प्राधिकारी रेखा सोनी ने उत्तम डेयरी का खाद्य रजिस्ट्रेशन निलंबित किया।
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Directorate of Health Services, Madhya Pradesh
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भिंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई एक घर से अवैध शराब की 43 पेटी पकड़ी
अटेर-जैतपुर पुल पर बड़ा हादसा टला, पुलिस की तत्परता से युवक सुरक्षित
जालोर के भंवरानी गांव से करीब 64 साल के वैवाहिक साथ की भावुक कहानी सामने आई है। करीब 90 वर्ष की उम्र में दरगाराम प्रजापत और उनकी पत्नी पुनीदेवी ने एक ही दिन दुनिया को अलविदा कह दिया।

परिवार के अनुसार, शुक्रवार सुबह पुनीदेवी को अचानक चक्कर आया और कुछ ही देर बाद उनका निधन हो गया। पत्नी की मौत की खबर मिलने के बाद दरगाराम भी व्यथित हो गए। इसके करीब एक घंटे बाद उनकी भी तबीयत बिगड़ी और उन्होंने घर पर ही अंतिम सांस ली।

अगले दिन दोनों की अंतिम यात्रा एक साथ निकाली गई। परिवार और ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों की अर्थियों को विवाह की तरह गठजोड़े में बांधकर अंतिम विदाई दी गई। इसके बाद दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र कालूराम ने दोनों को मुखाग्नि दी।

दरगाराम अपने सरल और सादगीपूर्ण स्वभाव के लिए गांव में जाने जाते थे। परिवार और ग्रामीणों के अनुसार, दोनों आध्यात्म, गौसेवा और सेवा भाव से जुड़े जीवन के लिए भी पहचाने जाते थे।

दोनों के चार बेटे हैं और परिवार भरा-पूरा है। उनके निधन के बाद भंवरानी गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों के बीच 64 साल तक साथ निभाने वाले इस दंपत्ति की एक साथ हुई अंतिम विदाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
43 पेटी अवैध शराब जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार

थाना देहात भिण्ड पुलिस ने अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कृष्णा नगर बम्बा के पास एक मकान से 43 पेटी अवैध देशी शराब बरामद की है।

पुलिस के मुताबिक बरामद शराब की कुल मात्रा करीब 387 बल्क लीटर है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2 लाख 15 हजार रुपये बताई गई है।

मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर मकान की तलाशी ली, जहां शराब छिपाकर रखी गई थी। पुलिस ने शराब जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपी के खिलाफ थाना देहात भिण्ड में अपराध क्रमांक 569/2026, धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर शराब के सप्लायर और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों के संबंध में जानकारी जुटा रही है।

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आरक्षण हटाओ आंदोलन के नेता स्वामी आनंद स्वरूप ने सरकार के सामने आरक्षण, SC-ST एक्ट और UGC से जुड़े कानून को लेकर तीन बड़ी मांगें रखी हैं।

स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि कई वर्षों से लागू आरक्षण व्यवस्था ने देश को नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने आरक्षण को समाप्त करने की मांग करते हुए कहा कि उनका मानना है कि चयन और अवसर का आधार योग्यता होना चाहिए।

उनकी दूसरी मांग अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम यानी SC-ST एक्ट को समाप्त करने की है। उन्होंने दावा किया कि यह कानून समाज में जातीय तनाव और हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके चलते समाज में लोगों के बीच टकराव बढ़ रहा है और देश में गृह युद्ध जैसी स्थिति बन रही है।

स्वामी आनंद स्वरूप ने तीसरी मांग UGC से जुड़े कानून को लेकर रखी। उन्होंने सरकार से इस कानून को भी समाप्त करने की मांग की और इसे अनावश्यक बताया।

उन्होंने कहा कि कानून और न्याय के सामने सभी को समानता का अधिकार प्राप्त है और समाज में किसी को छोटा या बड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

स्वामी आनंद स्वरूप की ये मांगें उनके आंदोलन और उनके द्वारा दिए गए राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा हैं। सरकार की ओर से इन मांगों को स्वीकार करने की कोई घोषणा सामने नहीं आई है।
बांग्लादेश के रंगपुर शहर में एक रिटायर्ड हिंदू शिक्षक, उनकी पत्नी, बेटी और 12 वर्षीय बेटे के शव बंद घर से बरामद होने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मौतों की वजह का पता लगाया जा रहा है।

घटना रंगपुर के दासपाड़ा यानी मछुआपाड़ा इलाके की है। शनिवार रात करीब 11:30 बजे पुलिस ने बंद घर में प्रवेश कर चारों के शव बरामद किए। मृतकों की पहचान रंगपुर जिला स्कूल के रिटायर्ड शिक्षक गणपति चक्रवर्ती, उनकी पत्नी प्रीतिलता चक्रवर्ती, बेटी आगामी चक्रवर्ती प्रार्थि और 12 वर्षीय बेटे प्रियम चक्रवर्ती के रूप में हुई है।

स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों के मुताबिक परिवार से गुरुवार के बाद संपर्क नहीं हो पा रहा था। परिवार के चारों मोबाइल फोन भी गुरुवार रात से बंद बताए गए। शनिवार रात जब रिश्तेदार घर पहुंचे तो मुख्य दरवाजा बंद मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और घर खोलकर अंदर तलाशी ली गई।

पुलिस के अनुसार, परिवार के सदस्यों के शव घर के अलग-अलग हिस्सों में मिले। मां और बेटी के शव सीढ़ियों के पास, गणपति चक्रवर्ती का शव छत पर और बेटे प्रियम का शव एक बिस्तर के नीचे मिला।

गणपति चक्रवर्ती पिछले साल 31 दिसंबर को रंगपुर जिला स्कूल से रिटायर हुए थे। इसके बाद वह होम्योपैथिक उपचार का काम कर रहे थे। उनकी बेटी आगामी ने अंग्रेजी में मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की थी, जबकि 12 वर्षीय प्रियम पांचवीं कक्षा का छात्र था।

परिजनों ने बताया कि उन्हें परिवार के किसी सदस्य की ओर से कोई स्पष्ट खतरा होने की जानकारी नहीं थी। पुलिस ने अभी मौतों के पीछे की वजह को लेकर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।

घटना की जांच में रंगपुर मेट्रोपॉलिटन पुलिस के साथ CID और डिटेक्टिव ब्रांच भी जुटी हैं। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं और शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।

ताजा जांच में पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू की है। पुलिस के मुताबिक हत्या की वजह और घटनाक्रम की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो रहे जस्टिस संजय करोल ने अपने विदाई भाषण में न्यायपालिका को लेकर बेहद अहम बात कही। उन्होंने कहा कि जज भगवान नहीं होते और उनसे हर फैसला सही होने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक, एक जज के लिए कानून लागू करने से ज्यादा जरूरी यह समझना है कि अदालत के सामने खड़े व्यक्ति ने क्या खोया है और वह न्याय की उम्मीद लेकर क्यों आया है।

जस्टिस संजय करोल ने कहा कि जजों के हाथ में हमेशा एक बात रहती है कि वे सिर्फ याचिकाकर्ता को नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद इंसान को देखें। उनके मुताबिक, किसी याचिका से मामले के तथ्य तो पता चल सकते हैं, लेकिन यह नहीं पता चलता कि उस व्यक्ति ने पहले से क्या खोया है या वह अदालत से क्या उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कहा कि शायद इसी वजह से फैसला सुनाने के लिए एक खास स्तर की विनम्रता जरूरी होती है।

उन्होंने संविधान और न्याय के संबंध पर भी बात की। जस्टिस करोल ने कहा कि संविधान न्यायाधीशों से केवल कानून को सही तरीके से लागू करने की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि उसे न्यायपूर्ण तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी भी देता है। उन्होंने कहा कि उनके लिए फैसला सुनाने की जिम्मेदारी केवल यह तय करने तक सीमित नहीं रही कि कानूनी तौर पर कौन सही है।

विदाई भाषण में जस्टिस करोल ने अपने करीब चार दशक लंबे कानूनी सफर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग 40 साल कोर्टरूम में बिताए, जिसमें शुरुआती दौर में वकील के तौर पर और पिछले 19 साल से जज के तौर पर काम किया। वह 6 फरवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और 22 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

जस्टिस करोल ने कोर्टरूम में मौजूद उन 'खामोशियों' का भी जिक्र किया, जिनमें उनके मुताबिक बहुत कुछ छिपा होता है। उन्होंने कहा कि वकीलों की बातों के साथ-साथ उनकी खामोशी को सुनना भी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उनका कहना था कि लोगों के शब्दों के बीच छिपी बातों को समझना भी एक जज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कोर्टरूम नंबर 1 में 1996 में अपनी पहली यात्रा को याद करते हुए बेंच की ऊंचाई का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, नीचे से देखने पर ऊंची बेंच अधिकार और सत्ता का प्रतीक लग सकती है, लेकिन उस पर बैठने के बाद उसका अर्थ अलग महसूस होता है। उनके लिए यह गरिमा और ईमानदारी के साथ जिम्मेदारी निभाने का प्रतीक था।

जस्टिस करोल ने न्याय व्यवस्था में आम नागरिक के भरोसे को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का वास्तविक महत्व उस भरोसे में है, जिसके साथ आम नागरिक यह उम्मीद लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाता है कि कोई उसकी बात सुनेगा। साथ ही उन्होंने उन लोगों को भी याद रखने की जरूरत बताई जो कभी अदालत तक पहुंच ही नहीं पाते, क्योंकि उनके लिए न्याय बहुत दूर, महंगा या डरावना हो सकता है।

उन्होंने कहा कि जज का कर्तव्य है कि अदालत के सामने खड़े हर व्यक्ति की बात सुनी जाए, चाहे वह कितना भी छोटा या बेबस क्यों न हो। उन्होंने न्याय को केवल कोर्टरूम और जजों के लिबास तक सीमित न मानते हुए व्यक्तिगत आचरण और जिम्मेदारी से भी जोड़ा।

जस्टिस संजय करोल की विदाई के मौके पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और सुप्रीम कोर्ट बार के वरिष्ठ सदस्यों ने भी उनके कार्यकाल को याद किया। उनके रिटायरमेंट के साथ सुप्रीम कोर्ट में उनका साढ़े तीन साल से अधिक का कार्यकाल समाप्त हुआ।
भिंड।। परिजनों का आरोप------ अहरौली घाट के नजदीक क्लीनिक में इलाज लेने के दौरान मौ*त।।
पेट दर्द का इलाज कराने पहुंचे 22 वर्षीय युवक की मौत, परिजनों ने लगाया गलत इलाज का आरोप
क्लीनिक संचालक पर FIR, स्वास्थ्य विभाग
भिंड: रौन थाना क्षेत्र में पेट दर्द का इलाज कराने गए 22 वर्षीय युवक की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। मृतक के परिजनों ने विधि क्लीनिक के संचालक पुष्पेंद्र पर गलत इलाज करने का आरोप लगाया है। मामले में पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है और क्लीनिक संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए क्लीनिक को सील कर दिया है।
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गोरमी:कंधे पर स्कूल बैग, पैरों में कीचड़… कई साल से सड़क का इंतजार!
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Gormi पूर्व मंत्री ओपीएस भदौरिया के जन्मदिन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने किया फल वितरण ।
छत्तीसगढ़ के कोरबा में पुलिस विभाग से जुड़ा ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यात्रा की अनुमति और उसके पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली में जांच के लिए जाने वाली पुलिस टीम को ट्रेन से यात्रा की अनुमति मिली थी, लेकिन टीम के आठ सदस्य कथित तौर पर विमान से दिल्ली पहुंच गए। मामला सामने आने के बाद टीआई और एसआई समेत सभी आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।

मामला कटघोरा थाने में दर्ज एक कारोबारी विवाद से जुड़े केस की जांच का है। पुलिस टीम को अदालत के आदेश के बाद जांच के सिलसिले में दिल्ली जाना था। विभागीय स्तर पर टीम को ट्रेन से यात्रा की अनुमति दी गई थी, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक पुलिसकर्मी ट्रेन से नहीं बल्कि फ्लाइट से दिल्ली पहुंचे।

जब यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आया तो पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू हुई। जांच के बाद कटघोरा थाना प्रभारी निरीक्षक मोती पटेल, उप निरीक्षक राम पांडे समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।

निलंबित पुलिसकर्मियों में कटघोरा थाना प्रभारी मोती पटेल, उप निरीक्षक राम पांडे, प्रधान आरक्षक गुनाराम सिन्हा, प्रधान आरक्षक गोपाल यादव, प्रधान आरक्षक राजेश कंवर, आरक्षक प्रदीप राठौर, साइबर प्रकोष्ठ के आरक्षक सुशील यादव और कोरबा रिजर्व केंद्र के आरक्षक प्रशांत सिंह शामिल हैं।

अब जांच का सबसे अहम सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ट्रेन की अनुमति के बावजूद फ्लाइट से दिल्ली क्यों गए। यह भी पता लगाया जा रहा है कि विमान के टिकट किसने बुक कराए और उनका भुगतान किसने किया।

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी से जब यह सवाल पूछा गया कि क्या शिकायतकर्ता गौरव मोदी ने पुलिस टीम के विमान टिकट का खर्च उठाया था, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में जांच की जा रही है। टिकट की व्यवस्था कैसे हुई और उसका भुगतान किसने किया, यह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगा।

मामला कृष्णा ऑटो राइडर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े विवाद की जांच से संबंधित बताया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनी से जुड़े कारोबारी विवाद में आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम दिल्ली गई थी। इसी मामले में कटघोरा थाने में अदालत के निर्देश पर प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस कारोबारी विवाद की पृष्ठभूमि में डीलरशिप से जुड़े आरोप और आर्थिक नुकसान का विवाद भी रहा है। मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा था, जहां दोनों पक्षों की सहमति से मध्यस्थता की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने विवाद के मूल दावों की सत्यता पर कोई राय व्यक्त नहीं की थी।

फिलहाल पुलिस विभाग की कार्रवाई के बाद आठों पुलिसकर्मी निलंबित हैं। वहीं, फ्लाइट से यात्रा करने की वजह, टिकट की व्यवस्था और भुगतान के स्रोत को लेकर जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और विमान यात्रा का खर्च किसने वहन किया।

मामले में सामने आए आरोप और संदेह जांच का विषय हैं। टिकट का भुगतान शिकायतकर्ता ने किया था या किसी अन्य माध्यम से उसकी व्यवस्था हुई, इसकी अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी।
NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़े विवाद को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। अब कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी इस विरोध का समर्थन करते हुए वकीलों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है और BCI चेयरमैन के इस्तीफे की मांग उठाई है।

विवाद की शुरुआत 13 अगस्त को हुई, जब BCI ने NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के सभी ग्रेजुएट्स के एडवोकेट के तौर पर नामांकन पर अगले आदेश तक रोक लगाने का निर्देश दिया था। यह कार्रवाई उन छात्रों से जुड़े विवाद के बीच हुई थी, जिन्होंने कथित तौर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था।

BCI ने NALSAR से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट भी मांगी थी और कथित अभियान से जुड़े लोगों की पहचान करने को कहा था। इस आदेश के सामने आने के बाद कानूनी समुदाय और छात्रों की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई।

विरोध बढ़ने के बाद BCI ने कुछ ही घंटों में अपना फैसला वापस ले लिया। बाद में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि उपलब्ध जानकारी और मिली प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद 2026 बैच के छात्रों के खिलाफ कार्यवाही पूरी तरह बंद कर दी गई है।

मिश्रा ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लॉ छात्रों को संदेश देते हुए यह भी कहा कि अगर विवाद से जुड़ी उनकी किसी बात या पत्र से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका ईमानदारी से खेद है और वह माफी मांगते हैं।

इसके बावजूद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। इसी मामले को लेकर ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन ने BCI चेयरमैन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। प्रदर्शन में जवाबदेही और उनके इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस विरोध को समर्थन दिया। उन्होंने लिखा, ‘मनन, बस हो गया भाई! सभी लीगल कॉकरोच को इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहिए।’

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने भी विरोध का समर्थन करते हुए कहा कि ‘लीगल कॉकरोच’ एकजुट होकर BCI चेयरमैन के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे और उनके इस्तीफे की मांग करेंगे। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध और जवाबदेही की मांग को लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बताया।

CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और जवाब मांगना केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है।

विवाद अब केवल NALSAR छात्रों के नामांकन तक सीमित नहीं रहा है। BCI के शुरुआती आदेश, उसके कुछ ही घंटों में वापस लिए जाने और बाद में चेयरमैन की ओर से माफी मांगने के बावजूद कानूनी समुदाय के एक हिस्से की नाराजगी कायम है।

NALSAR के छात्र संगठनों ने भी BCI की शुरुआती कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी और चेयरमैन से माफी की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले को लेकर सवाल उठे और चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर जोर दिया था।

अब इस पूरे विवाद का अगला केंद्र BCI चेयरमैन के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन है, जहां अभिजीत दिपके और CJP से जुड़े लोग ‘लीगल कॉकरोच’ के नाम से वकीलों को एकजुट करने और मनन कुमार मिश्रा की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं।