
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और कथित ‘एकतरफा फैसलों’ को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय विशेष पीठ आज सुनवाई करेगी। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग के बहु-सदस्यीय स्वरूप की अनदेखी करते हुए अन्य दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के बावजूद नीतिगत और तकनीकी फैसले लिए गए। साथ ही ECINet और ERONet सॉफ्टवेयर में अनाधिकृत बदलावों के चलते करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की गंभीर आशंका जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में SIT जांच की मांग की गई है।
मामले में अंतरिम राहत के रूप में सीईसी को प्रशासनिक कार्यों से दूर रखने और आयोग का कामकाज बाकी दोनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से चलाने की गुहार लगाई गई है। वहीं दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों पर स्पष्ट किया है कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में आंतरिक विचार-विमर्श और अलग राय होना स्वाभाविक है तथा आयोग के सभी दिशा-निर्देश पूरी तरह से कानूनी ढांचे के तहत जारी किए गए हैं। शीर्ष अदालत का यह रुख चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और पारदर्शिता के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
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