
बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल को खुला समर्थन-सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने का षड्यंत्र रच रही सरकार : अशोक मेहता
पूर्व राज्य सूचना आयुक्त ने कार्यकर्ताओं की बैठक में साधा सरकार पर निशाना
शहजादपुर, (राष्ट्रीय कदम) ब्यूरो:
शहजादपुर में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान मीडिया को जानकारी देते हुए कांग्रेस नेता एवं पूर्व राज्य सूचना आयुक्त अशोक मेहता ने कहा कि हरियाणा सरकार की जनविरोधी नीतियों और सार्वजनिक संपत्तियों को निजी हाथों में सौंपने के षड्यंत्र के खिलाफ संयुक्त बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संघर्ष मोर्चा द्वारा 22, 23 और 24 अक्टूबर को बुलाई गई तीन दिवसीय हड़ताल का वे पुरजोर समर्थन करती है।
अशोक मेहता ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार जनहित को ताक पर रखकर चुनिंदा कॉरपोरेट्स को फायदा पहुँचाने में जुटी है। जब सरकारी बिजली कंपनियाँ पहले से ही वित्तीय दबाव से जूझ रही हैं, ऐसे में उनका 25 प्रतिशत राजस्व निजी कंपनियों की झोली में डालना सीधे तौर पर जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने जैसा है।
सरकारी पैसे से तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर निजी कंपनियों को सौंपना बड़ा खेल
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार गुरुग्राम और नूंह क्षेत्र के बिजली वितरण को निजी कंपनियों को सौंपने की पूरी तैयारी कर चुकी है। हैरानी की बात यह है कि सरकार ने हाल ही में स्मार्ट सिटी और आरडीएसएस (RDSS) योजनाओं के तहत करीब 2,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट इन्हीं क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया है। जनता के टैक्स के पैसों से ढांचा तैयार कर उसे निजी मुनाफे के लिए सौंपना एक सुनियोजित घोटाले की ओर इशारा करता है।
किसानों की 10 पैसे और गरीबों की रियायती बिजली बंद होने का खतरा
अशोक मेहता ने आगाह किया कि यदि सरकारी बिजली वितरण कंपनियों को इसी तरह बदहाल किया गया, तो आने वाले दिनों में:
किसानों को मिलने वाली 10 पैसे प्रति यूनिट की रियायती बिजली बंद हो जाएगी।
गरीब घरेलू उपभोक्ताओं को मिलने वाली 2.50 रुपये प्रति यूनिट की राहत समाप्त हो जाएगी।
प्रदेश के मौजूदा 92 लाख सामान्य मीटरों को जबरन हटाकर जनता पर 8,000 से 10,000 रुपये कीमत वाले महंगे स्मार्ट मीटर थोपे जा रहे हैं, जिसका सीधा आर्थिक बोझ आम उपभोक्ता पर पड़ेगा।
हर मोर्चे पर नाकाम साबित हुई प्रदेश सरकार
अशोक मेहता ने कहा कि वोट चोरी से बनी मौजूदा सरकार केवल बिजली ही नहीं, बल्कि प्रशासन के हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है:
चरमराई सफाई व्यवस्था: प्रदेश के शहर कूड़े के ढेरों में तब्दील हो चुके हैं। नगर निगमों और स्थानीय निकायों की विफलता से गलियों व मुख्य मार्गों पर फैली गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियाँ फैल रही हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
ध्वस्त कानून व्यवस्था: राज्य में दिनदहाड़े लूट, हत्या, फिरौती और व्यापारियों को खुलेआम धमकियाँ मिलने की घटनाएँ आम हो चुकी हैं। प्रदेश की महिलाएँ, व्यापारी और आम नागरिक खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
बेरोजगारी का भीषण संकट: हरियाणा देश में सबसे गंभीर बेरोजगारी दौर का सामना कर रहा है। शिक्षित युवा रोजगार के लिए दर-दर भटकने और विदेशों में पलायन करने को मजबूर हैं। सरकारी विभागों में रिक्त पड़े लाखों पदों को भरने के बजाय विभागों का निजीकरण कर युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेला जा रहा है।
अशोक मेहता ने स्पष्ट किया कि वे बिजली कर्मियों के इस जायज संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खडे है और आम जनता, किसानों व युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इस तानाशाही व जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सड़क से लेकर सदन तक पुरजोर विरोध जारी रखेगे।
इस अवसर पर प्रदेश युवा कांग्रेस महासचिव अंकुर मेहता, अम्न तलवाड़, मा. ऋषिपाल, रमेश जौहर, सतीश अम्बली, अंकुश, सुनील कुमार, रमन, बलकार सिंह आदि मौजूद थे।
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