
लखनऊ में विदेशी महिलाओं से जुड़े हाई-प्रोफाइल देह व्यापार और मानव तस्करी के कथित नेटवर्क की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस की कार्रवाई में उज्बेकिस्तान की नागरिक लोला कायूमोवा को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, लोला पर उज्बेकिस्तान और नेपाल के रास्ते महिलाओं को भारत लाने और उन्हें इस नेटवर्क में शामिल करने का आरोप है।
जांच के मुताबिक, विदेशी महिलाओं को लखनऊ के पॉश इलाकों में किराये के फ्लैटों में रखा जाता था। इससे पहले गोल्फ सिटी इलाके के एक फ्लैट से उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं के मिलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई थी। पूछताछ में महिलाओं ने लोला कायूमोवा और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी दी थी।
पुलिस जांच में फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेजों का एंगल भी सामने आया है। आरोप है कि विदेशी महिलाओं की पहचान छिपाने और भारत में रहने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। लोला के नाम से भी आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे भारतीय पहचान दस्तावेज सामने आने की बात जांच में कही गई थी।
इस पूरे मामले में प्लास्टिक सर्जरी का एंगल सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। जांच एजेंसियों के मुताबिक, डॉक्टर विवेक गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने विदेशी महिलाओं की पहचान और चेहरे की बनावट बदलने के लिए कॉस्मेटिक सर्जरी की। पुलिस के अनुसार, लोला ने खुद भी अपनी उम्र और पहचान छिपाने के लिए कई प्लास्टिक सर्जरी कराई थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि लोला कथित तौर पर महिलाओं को नौकरी दिलाने का झांसा देकर भारत लाती थी। आरोप है कि भारत आने के बाद उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों पर नियंत्रण कर उन्हें हाई-प्रोफाइल देह व्यापार नेटवर्क में धकेला जाता था।
लोला पर लंबे समय से भारत में अवैध रूप से रहने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल के भी आरोप लगे हैं। जांच एजेंसियां अब उसके संपर्कों, भारत में विदेशी महिलाओं को लाने वाले नेटवर्क और इस पूरे मामले में डॉक्टर समेत अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
इस मामले का एक अहम पहलू यह भी है कि विदेशी महिलाओं की पहचान बदलने के लिए कथित तौर पर सर्जरी और फर्जी भारतीय दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इससे जांच सिर्फ देह व्यापार तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि मानव तस्करी, विदेशी नागरिकों के अवैध प्रवास और पहचान संबंधी दस्तावेजों की कथित धोखाधड़ी तक पहुंचती है।
पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे, कितनी विदेशी महिलाएं भारत लाई गईं और फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में किन लोगों की भूमिका रही।
मामले में सामने आए सभी आरोप जांच का विषय हैं। पुलिस की जांच और अदालत में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति तय होगी।
Gormi, Bhind | Aug 13, 2026