
हर साल घाघरा की बाढ़-कटान से तबाही, स्थायी समाधान के लिए संसद में गूंजी सलेमपुर की आवाज
बलिया। घाघरा (सरयू) नदी की बाढ़ और कटान से हर साल तबाही झेल रहे सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के ग्रामीणों की समस्या अब संसद तक पहुंच गई है। समाजवादी पार्टी के सलेमपुर सांसद रमाशंकर “विद्यार्थी” राजभर ने लोकसभा में ध्यानाकर्षण नोटिस देकर सरकार से इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की है।
सांसद ने छह अगस्त को दिए नोटिस के माध्यम से जल शक्ति मंत्री का ध्यान घाघरा की बाढ़ और कटान से प्रभावित गांवों की ओर आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि भागलपुर पुल के आसपास नदी का जलस्तर बढ़ते ही उत्तरी और दक्षिणी तट के दर्जनों गांव बाढ़ और कटान की चपेट में आ जाते हैं।
चुरिया, खेमादेई, नदौली, कौशड़, सरया, पिंडी, हल्दीरामपुर, डुहा बिहारा, कठौड़ा, लिलकर, गोसाईपुर, खरीद, पुरुषोत्तमपट्टी, निपनिया, मनियर, सुलतानपुर, रिगवन, कृतुपुर, सुअरहां, भोजछपरा और महाराजपुर समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से हजारों परिवार प्रभावित होते हैं। बड़ी मात्रा में कृषि भूमि जलमग्न होने से किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं।
बाढ़ का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी जरूरी सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं। सांसद ने प्रभावित परिवारों को समय पर राहत और पुनर्वास तथा किसानों को फसल क्षति का पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया।
सांसद मीडिया प्रभारी जितेश कुमार वर्मा (एडवोकेट) ने कहा कि घाघरा की बाढ़ और कटान से ग्रामीण वर्षों से परेशान हैं। सांसद ने जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस मुद्दे को संसद में उठाया है। उन्होंने कहा कि अब केवल हर साल राहत देने के बजाय ऐसी ठोस व्यवस्था जरूरी है, जिससे गांवों और किसानों की जमीन को स्थायी रूप से सुरक्षित किया जा सके।
सांसद ने सरकार से तटबंधों के सुदृढ़ीकरण, कटानरोधी कार्य, स्थायी बाढ़ सुरक्षा, सर्वकालिक संपर्क मार्ग तथा प्रभावित परिवारों और किसानों को समयबद्ध राहत एवं उचित मुआवजा देने की कार्ययोजना की जानकारी सदन में देने का अनुरोध किया है।
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