
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेज जालौन के प्रिंसिपल के तबादले पर लगाई रोक, राज्य सरकार को नोटिस जारी...
उरई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कॉलेज, जालौन के प्रिंसिपल डॉ. अरविंद त्रिवेदी के स्थानांतरण और संबद्धता (अटैचमेंट) के मामले में हस्तक्षेप करते हुए विवादित आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार के 26 मई 2026 के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया है, जिसके तहत डॉ. त्रिवेदी को उनके पद से हटाकर चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशालय, लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिज़वी की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता की दलीलों को रिकॉर्ड पर लिया। डॉ. त्रिवेदी की ओर से अदालत को बताया गया कि यह आदेश 'यूपी राज्य मेडिकल कॉलेज शिक्षक सेवा नियमावली, 1990' और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के 2022 के विनियमों का सीधा उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह है कि सेवा नियमावली में किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को निदेशालय से संबद्ध करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने इस आदेश को इसलिए भी चुनौती दी क्योंकि उनकी जगह जिस विपक्षी संख्या 4 को प्रिंसिपल नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, वह नियमित रूप से चयनित प्रिंसिपल नहीं हैं।
इस मामले में याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष डॉ. अशोक पाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में आए हालिया फैसले का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि सरकारी कार्यालयों में संकाय सदस्यों को संबद्ध करने का कोई विधिक आधार नहीं है। वहीं, राज्य सरकार के वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि निदेशालय में कार्यभार की अधिकता और कर्मचारियों की कमी के कारण यह केवल एक अस्थायी अंतरिम व्यवस्था थी।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने विपक्षी संख्या 4 को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना प्रति-शपथ पत्र और याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई 2026 को नियत की गई है। तब तक के लिए न्यायालय ने 26 मई 2026 के विवादास्पद आदेश के क्रियान्वयन पर रोक बरकरार रखी है।
Orai, Jalaun | Jun 6, 2026