
पिता को खोया, हौसला नहीं! 19 साल की उम्र में ED अधिकारी बनीं उन्नाव की शिखा पटेल, यूपी बोर्ड में भी किया था कमाल
रग्घूखेड़ा की बेटी ने संघर्ष को बनाया सफलता की सीढ़ी, 95.33% अंक लाकर प्रदेश में हासिल किया था पांचवां स्थान; ED प्रशिक्षण में भी प्रथम रहकर बढ़ाया जिले का मान
उन्नाव। जिंदगी जब सबसे कठिन इम्तिहान ले रही थी, तब शिखा पटेल के सामने दो रास्ते थे—मुश्किलों के आगे हिम्मत हार जाना या अपने सपनों के लिए पहले से ज्यादा मजबूती के साथ खड़े होना। कोरोना काल में 12वीं की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दौरान पिता को खोने वाली उन्नाव की इस बेटी ने दूसरा रास्ता चुना। दुख के बीच पढ़ाई जारी रखी, मेहनत को अपना सहारा बनाया और महज 19 साल की उम्र में प्रवर्तन निदेशालय (ED) में अधिकारी बनकर सफलता की ऐसी कहानी लिखी, जो युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है।
बीघापुर क्षेत्र के रग्घूखेड़ा की रहने वाली शिखा पटेल की इस उपलब्धि ने उनके परिवार के साथ जिले का भी गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता केवल एक प्रतियोगी परीक्षा में हासिल की गई उपलब्धि नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहने की मिसाल है।
यूपी बोर्ड में 95.33 प्रतिशत अंक, प्रदेश में पांचवां स्थान
शिखा की प्रतिभा का परिचय उनकी स्कूली शिक्षा के दौरान ही मिल गया था। यूपी बोर्ड की परीक्षा में उन्होंने 95.33 प्रतिशत यानी 572 अंक हासिल किए थे। इस प्रदर्शन के दम पर उन्होंने प्रदेश में पांचवां स्थान प्राप्त किया और जिले में प्रथम रैंक हासिल की थी।
उनकी इस उपलब्धि की चर्चा उस समय खूब हुई थी। जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन उपमुख्यमंत्री ने भी फोन कर शिखा को बधाई दी थी। पढ़ाई में लगातार बेहतर प्रदर्शन करने वाली शिखा ने उस समय ही अपनी मेहनत और प्रतिभा की पहचान बना ली थी।
लेकिन उनकी जिंदगी का अगला दौर आसान नहीं था। जिस उम्र में बच्चे अपने भविष्य के सपने संजो रहे होते हैं, उसी समय शिखा को एक ऐसी निजी क्षति का सामना करना पड़ा, जिसने परिवार की दुनिया बदल दी।
बोर्ड परीक्षा की तैयारी के बीच पिता का निधन
कोरोना काल में शिखा 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। इसी दौरान उनके पिता धर्मेंद्र कुमार सिंह का हार्ट अटैक से निधन हो गया। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था। पिता का साया उठने के बाद भावनात्मक चुनौतियों के साथ भविष्य को लेकर चिंताएं भी सामने थीं।
ऐसे समय में पढ़ाई पर ध्यान बनाए रखना आसान नहीं होता। लेकिन शिखा ने अपनी परिस्थितियों को सपनों के रास्ते की बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने हिम्मत बनाए रखी और अपनी पढ़ाई तथा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ती रहीं।
इस सफर में उनकी मां ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयं शिक्षिका होने के नाते उन्होंने बेटी को शिक्षा का महत्व समझाया और मुश्किल समय में उसका हौसला बढ़ाया। मां के सहयोग और शिखा की मेहनत ने मिलकर उस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया, जिसे हासिल करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी।
ED प्रशिक्षण में भी रहीं प्रथम, निदेशक ने किया सम्मानित
शिखा की सफलता का सफर प्रवर्तन निदेशालय में अधिकारी बनने के बाद भी जारी रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण के दौरान भी उन्होंने प्रथम स्थान हासिल किया। उनके प्रदर्शन के लिए ED के निदेशक राहुल नवीन ने उन्हें सम्मानित किया।
यह उपलब्धि बताती है कि शिखा ने केवल चयन तक पहुंचने पर संतोष नहीं किया, बल्कि प्रशिक्षण के दौरान भी अपनी मेहनत और क्षमता का परिचय दिया।
हालांकि, उनकी नियुक्ति के पदनाम, चयन प्रक्रिया, बैच और प्रशिक्षण में प्रथम स्थान प्राप्त करने से संबंधित आधिकारिक विवरणों की पुष्टि संबंधित विभाग के रिकॉर्ड से किया जाना उचित होगा।
कभी बनी थीं एक दिन की थाना प्रभारी
शिखा पटेल का नाम इससे पहले भी चर्चा में आया था। 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत उन्हें एक दिन के लिए बीघापुर थाने का प्रभारी निरीक्षक (SHO) बनाया गया था। इस दौरान उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनी थीं और बैंक तथा पुलिस चौकी का निरीक्षण भी किया था।
यह पहल महिलाओं और बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने तथा उन्हें प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के उद्देश्य से की गई थी। उस समय शिखा की भागीदारी ने उनकी पहचान एक मेधावी छात्रा के रूप में और मजबूत की थी।
आज ED में अधिकारी के रूप में उनकी उपलब्धि उनके सफर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।
शिखा की कहानी में छिपा है बड़ा संदेश
शिखा पटेल की उपलब्धि का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनकी उम्र नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ने का उनका संकल्प है, जिनमें अक्सर किसी भी व्यक्ति के लिए खुद को संभालना मुश्किल हो जाता है।
पिता को खोने का दुख, पढ़ाई का दबाव और भविष्य की अनिश्चितता—इन सबके बीच उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। उनकी मां का सहयोग इस यात्रा का महत्वपूर्ण आधार रहा।
रग्घूखेड़ा से निकलकर प्रवर्तन निदेशालय में अधिकारी बनने तक का उनका सफर यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियां जीवन की दिशा को चुनौती दे सकती हैं, लेकिन मजबूत संकल्प, निरंतर मेहनत और परिवार का साथ आगे बढ़ने की राह खोल सकते हैं।
उन्नाव की शिखा पटेल की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों या निजी मुश्किलों के बीच अपने भविष्य को बेहतर बनाने का सपना देख रहे हैं। उनकी उपलब्धि पर परिवार और क्षेत्र के लोगों को गर्व होना स्वाभाविक है।
एक पिता का सपना, एक मां का भरोसा और बेटी की अथक मेहनत—शिखा पटेल की सफलता की कहानी इन्हीं तीन मजबूत आधारों पर खड़ी नजर आती है।
Unnao, Unnao | Oct 9, 2026