
छत्तीसगढ़ के धमतरी में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही स्कूली किताबों की भारी किल्लत को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। राज्य पाठ्यपुस्तक निगम की लचर कार्यप्रणाली के खिलाफ 'निजी विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ' के बैनर तले करीब 125 निजी स्कूलों के 1000 से अधिक शिक्षक, शिक्षिकाएं और स्कूल संचालक सड़कों पर उतर आए। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर का घेराव कर जमकर नारेबाजी की। प्रबंधकों का सीधा आरोप है कि वितरण नीति में मनमाने बदलावों और बारकोड स्कैनिंग की कछुआ चाल के कारण पिछले दो सत्रों से बच्चों को समय पर किताबें नहीं मिल पा रही हैं, जिससे नौनिहालों का भविष्य अधर में लटक गया है।
नया शिक्षण सत्र 16 जून से शुरू हो चुका है, लेकिन निजी स्कूलों को किताबें देने की तारीख 21 जुलाई तय की गई है, जिसका मतलब है कि बच्चे डेढ़ महीने बिना किताबों के ही स्कूल जाने को मजबूर हैं। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संघ ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर समय रहते इस अव्यवस्था को दुरुस्त कर समयबद्ध वितरण शुरू नहीं किया गया, तो धमतरी से उठी यह चिंगारी जल्द ही पूरे छत्तीसगढ़ में एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेगी।
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