
डाडोला में 53 लाख रुपए से बनेगा भव्य अंबेडकर भवन, गांव के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
बाबा साहेब और संत रविदास के विचारों से प्रेरणा लेकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा समाज।
गांव डाडोला में संविधान निर्माता एवं भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की स्मृति को समर्पित भव्य अंबेडकर भवन का निर्माण 53 लाख रुपये की लागत से किया जाएगा। भवन के निर्माण के लिए 21 लाख रूपए निजी कोष से, 21 लाख रूपए जिला परिषद तथा 11 लाख रूपए ब्लॉक समिति से प्रस्तावित किए गए हैं। इससे गांव में सामाजिक, शैक्षणिक एवं सामुदायिक गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत दिवस गांव डाडोला में डेरा सचखंड बल्लां, जालंधर के गद्दीनशीन पूज्य संत पद्मश्री निरंजन दास महाराज के सानिध्य में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज तथा संविधान निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण किया गया था। उस समय उपस्थित संत समाज एवं ग्रामीणों के साथ अंबेडकर भवन के निर्माण को लेकर चर्चा की गई थी। गांव का विकास केवल सड़कों और गलियों तक सीमित नहीं होता, बल्कि ऐसे भवन और संस्थान भी गांव की प्रगति का आधार बनते हैं, जहां समाज के सभी वर्ग एक साथ बैठकर विचार कर सकें और नई पीढ़ी को महापुरुषों के जीवन एवं उनके आदर्शों से प्रेरणा मिल सके।
कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि डाडोला में बनने वाला अंबेडकर भवन बाबा साहेब के सामाजिक समरसता, समानता और शिक्षा के संदेश को आगे बढ़ाने का माध्यम बनेगा।
मंत्री ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि गांवों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने के साथ-साथ सामुदायिक विकास को भी गति दी जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। डाडोला में अंबेडकर भवन का निर्माण भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि गांव मजबूत होंगे तो प्रदेश मजबूत होगा और ग्रामीणों की भागीदारी से विकास की रफ्तार और तेज होगी।
मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर संत रविदास जी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कलश यात्रा शुरू की गई है।प्रदेश सरकार द्वारा पहली बार सभी गुरुओं और संतों की जयंतियां सरकारी स्तर पर मनाने की पहल की गई है। इससे लोगों में अपने महापुरुषों और संतों के प्रति आस्था एवं विश्वास और मजबूत हुआ है।
उन्होंने बताया कि संत रविदास जी ने समाज को समानता, भाईचारे और मानवता का संदेश दिया, जबकि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। दोनों महापुरुषों के विचार आज भी समाज को एकजुट होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। संत रविदास जी की कलश यात्रा इसी विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने और समाज में आपसी भाईचारा एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।