
OBC आयोग का कार्यकाल बढ़ाने पर उठे सवाल, सरकार से मांगा स्पष्ट जवाब
#LatestNews जयपुर। राजस्थान सरकार ने राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनीतिक प्रतिनिधित्व) आयोग का कार्यकाल एक बार फिर बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया है। आयोग का गठन स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं में OBC के राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से जुड़े मामलों के अध्ययन के लिए किया गया था। आयोग ने 5 अगस्त 2026 को अपनी अनुशंसाएं सरकार को सौंप दी थीं। कार्यकाल विस्तार के बाद अब इस फैसले को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि जब स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों के लिए OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और आयोग अपनी रिपोर्ट भी सरकार को सौंप चुका है, तो आयोग को छह महीने और जारी रखने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
सरकार की ओर से बताया गया है कि आयोग के आगामी कार्यों के लिए टर्म ऑफ रेफरेंस (कार्य दायरा) अलग से जारी किया जाएगा। यानी अगले चरण में आयोग को कौन-कौन से विषय सौंपे जाएंगे, यह अभी स्पष्ट किया जाना बाकी है। इसी को लेकर OBC समाज के बीच यह सवाल उठाया जा रहा है कि आयोग के कार्यकाल विस्तार का वास्तविक उद्देश्य क्या है? सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आयोग को अब कौन-से नए कार्य सौंपे जाएंगे और उसकी जरूरत किन कारणों से महसूस हुई।
वहीं, इस फैसले को लेकर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि सरकार कहीं OBC समाज की विभिन्न जातियों के बीच मतभेद पैदा करने या उन्हें आपस में बांटने की कोशिश तो नहीं कर रही। हालांकि, ऐसी मंशा की कोई स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे फिलहाल आरोप और राजनीतिक सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि आयोग का गठन 9 मई 2025 को किया गया था और इससे पहले भी उसका कार्यकाल कई बार बढ़ाया जा चुका है। राजस्थान हाईकोर्ट के समक्ष सरकार ने आयोग की रिपोर्ट और OBC आरक्षण से जुड़ी प्रक्रिया को चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया था। अब सवाल यही है कि 31 मार्च 2027 तक आयोग को जारी रखने के पीछे सरकार का विस्तृत रोडमैप क्या है? राजस्थान के OBC समाज की ओर से सरकार से इस विस्तार के कारण, उद्देश्य और आगामी कार्यक्षेत्र को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।