
स्वच्छ भारत के सपने के बीच गंदगी का साम्राज्य!
मुगलवाला करतारपुर पंचायत में सफाई व्यवस्था पर बड़े सवाल, ग्रामीण बोले—कब जागेगा प्रशासन?
पांवटा साहिब।
देश में स्वच्छ भारत का सपना साकार करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार स्वच्छता को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान कर रहे हैं। लेकिन हिमाचल की मुगलवाला करतारपुर पंचायत से सामने आई तस्वीरें सवाल पूछ रही हैं—क्या स्वच्छ भारत का सपना पंचायतों की चौखट तक पहुंच पाया है?
हमारी टीम जब पंचायत क्षेत्र में पहुंची तो कई जगहों पर गंदगी, कचरे और गंदे पानी से भरी नालियां तथा मच्छरों का अंबार नजर आया। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से हालात परेशान करने वाले हैं। उनका आरोप है कि शिकायतें करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
यह सिर्फ गंदगी का मामला नहीं है। जहां गंदा पानी जमा हो, वहां मच्छरों और संक्रमण का खतरा बढ़ता है और लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता पैदा होना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सफाई अभियान चलाने और स्वास्थ्य विभाग से क्षेत्र का निरीक्षण करवाने की मांग की है।
सवाल पंचायत से लेकर राजनीति तक
ग्रामीणों की नाराजगी का सीधा सवाल पंचायत प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर है। लोगों का कहना है कि उन्हें बार-बार आश्वासन मिलते हैं, लेकिन धरातल पर बदलाव नजर नहीं आता। खराब स्ट्रीट लाइटें और बंदरों का आतंक भी उनकी परेशानी बढ़ा रहे हैं।
मामला राजनीतिक रूप से भी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पंचायत प्रधान को भाजपा समर्थित बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी जनप्रतिनिधि की कार्यप्रणाली से जनता नाराज होती है, तो उसका असर सिर्फ पंचायत तक सीमित रहता है या फिर पार्टी की छवि तक भी पहुंचता है?
यही चिंता पूर्व विधायक सुखराम चौधरी और भाजपा संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है। जनता के बीच किसी भाजपा समर्थित पंचायत प्रतिनिधि को लेकर लगातार नाराजगी की चर्चा होती है तो उसका राजनीतिक नुकसान स्थानीय नेतृत्व को भी उठाना पड़ सकता है।
प्रधान की कार्यशैली पर उठते सवाल
प्रधान किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों, लेकिन पंचायत की जिम्मेदारी पूरी जनता के प्रति होती है। इसलिए सवाल किसी पार्टी से ज्यादा व्यवस्था का है—क्या ग्रामीणों को साफ-सफाई, रोशनी और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध करवाना पंचायत की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?
प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान की असली परीक्षा बड़े शहरों में नहीं, बल्कि गांव की गलियों, नालियों और घरों के आसपास होती है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पंचायत की जमीनी स्थिति का संज्ञान लेता है या नहीं, और भाजपा संगठन भी अपने समर्थित जनप्रतिनिधि की कार्यप्रणाली की समीक्षा करता है या नहीं।
क्योंकि सवाल सिर्फ एक पंचायत की गंदगी का नहीं है—सवाल उस भारत का है जिसे स्वच्छ बनाने का सपना देश ने देखा है।