सिवनी जिले के ग्राम कोनियापार में कृषि विभाग ने मल्चर यंत्र के जरिए फसल अवशेष प्रबंधन का प्रदर्शन किया। मक्का की कटाई के बाद खेत में बचे डंठल और पत्तियों को जलाने के बजाय मल्चर से छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में ही फैलाया गया। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने, जैविक पदार्थ की उपलब्धता बढ़ाने और आगामी फसल की तैयारी में मदद मिल सकती है।
🚜 किसानों से अपील: नरवाई न जलाएं, उपलब्ध कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें और मिट्टी के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखें।
आपकी राय क्या है? क्या किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए? कमेंट में बताएं।
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