
*जखरौनकलां पंचायत मे एक ही तालाब को दो जगह दिखाकर भुगतान का आरोप, मशीनों से कराया जा रहा मनरेगा कार्य।।*
ग्राम पंचायत जखरौनकलां मे पहले वाटरशेड से अब हरितका एनजीओ से हो रहा कार्य, ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की।
छतरपुर की जनपद पंचायत बिजावर अंतर्गत ग्राम पंचायत जखरौनकलां में तालाब निर्माण और मरम्मत कार्य को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने पंचायत, वाटरशेड समिति और एक निजी एनजीओ पर एक ही तालाब को अलग-अलग स्थानों पर दर्शाकर सरकारी राशि निकालने तथा निर्माण कार्य में मजदूरों की जगह भारी मशीनों का उपयोग करने की शिकायत की है।
जखरौनकलां गांव में जिस तालाब का निर्माण पहले वाटरशेड योजना के तहत कराया गया था, वह बरसात में क्षतिग्रस्त होकर बह गया। इसके बाद तालाब के पुनर्निर्माण और मरम्मत की जिम्मेदारी पंचायत की थी, लेकिन वर्तमान में कार्य हरितका एनजीओ के माध्यम से कराया जा रहा है।
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत मे शिकायत की है कि एक ही तालाब के नाम पर अलग-अलग योजनाओं से भुगतान कराया गया है, जिसकी जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। निर्माण स्थल पर पिछले कई दिनों से जेसीबी और एलएनटी मशीनें लगातार काम कर रही हैं, जबकि सरकारी योजनाओं और मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना है।
उनका कहना है कि रिकॉर्ड में मजदूरों से कार्य कराए जाने का उल्लेख किया गया है, लेकिन मौके पर मशीनों का उपयोग हो रहा है। ऐसे में मजदूरी भुगतान पर भी सवाल उठ रहे हैं। मशीनों से कार्य होने के कारण स्थानीय श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है और कई लोग पलायन करने को मजबूर हैं।
महेश पटेल ने बताया कि सरपंच प्रतिनिधि पुष्पेंद्र सिंह परमार वाटरशेड के अध्यक्ष है। साथ ही बिजावर विधायक राजेश शुक्ला के करीबी व सटई मण्डल अध्यक्ष है। जिससे उनकी जांच करना अधिकारियो के बसकी बात नही है। इसलिए पहले वाटरशेड से तालाब का निर्माण कराया था जो वारिश मे बह जाने से अब हरितका एनजीओ को दे दिया जबकि उसकी मरम्मत कार्य पंचायत को थी।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है। ग्रामीणो ने जनपद पंचायत से लेकर जनसुनवाई तक शिकायत की है लेकिन अब तक विभागीय अधिकारियो ने जांच तक नही की है।