
शादी के वादे पर बने यौन संबंध और बाद में शादी से इनकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने BNS की धारा 69 के दायरे को स्पष्ट किया है।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि धारा 69 के तहत अपराध तभी बनता है, जब शादी का वादा शुरू से ही उसे पूरा करने की नीयत के बिना, धोखे से किया गया हो और उसी धोखे के आधार पर महिला को यौन संबंध के लिए सहमत कराया गया हो।
मामला गुजरात के सयाजीगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा था। आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 69 के तहत आरोप लगाया गया था कि उसने शादी का वादा करके शिकायतकर्ता के साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया।
आरोपी का कहना था कि उसकी मां इस शादी के लिए तैयार नहीं थी। और मां की अनुमति न मिलने की वजह से उसने शादी से मजबूरन इंकार किया। मामले में BNS की धारा 69 के तहत दर्ज FIR को खारिज कराने की याचिका जब गुजरात हाईकोर्ट में पहुंची तो, हाई कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर...दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार कर दिया। फिर जिसके बाद आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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