
मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों अधिकारियों के तबादलों को लेकर जबरदस्त हलचल है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने पिछले 120 दिनों में प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था में बड़े बदलाव किए हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल के कार्यभार संभालने के बाद प्रदेश में तबादलों का सिलसिला तेज हुआ है। 13 अक्टूबर को एक साथ 11 जिलों के कलेक्टर बदले गए। इसके बाद 27 और 28 अक्टूबर को भी IAS और IPS अधिकारियों की नई पदस्थापनाएं की गईं। पन्ना, मऊगंज, जबलपुर, नर्मदापुरम, हरदा, सिंगरौली, बालाघाट, शाजापुर, बुरहानपुर, भिंड और रायसेन सहित कई जिलों में कलेक्टर बदले गए। वहीं पुलिस महकमे में भी बड़े बदलाव हुए। नर्मदापुरम, अलीराजपुर, पन्ना, बैतूल और हरदा सहित कई जिलों में नए पुलिस अधीक्षकों की पदस्थापना की गई।मऊगंज में संजय कुमार जैन के स्थान पर राजेश कुमार ओगरे को नया कलेक्टर बनाया गया है। अब जिले की जनता की निगाहें नए प्रशासनिक नेतृत्व पर टिकी हैं। क्या बार-बार अधिकारियों के तबादले से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा?क्या नए अधिकारी जनता की समस्याओं का तेजी से समाधान कर पाएंगे? क्या भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं में लापरवाही, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और राजस्व संबंधी समस्याओं पर वास्तव में लगाम लगेगी? क्योंकि जनता को अधिकारियों के नाम बदलने से ज्यादा जरूरी है व्यवस्था में बदलाव और जवाबदेही।
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Mauganj, Rewa | Oct 30, 2026