
गुजरात में सूरत सिविल अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की निलंबित प्रमुख डॉ. सुमैय्या मुल्ला के खिलाफ नए आरोप सामने आए हैं।
पूर्व छात्रों और कर्मचारियों ने उन पर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग करने, निजी कामों के लिए छात्रों का शोषण करने और एक प्रतिकूल शैक्षणिक वातावरण बनाने का आरोप लगाया है।
ये आरोप गुजरात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा रेजिडेंट डॉक्टर हर्ष पंड्या की मृत्यु के बाद मुल्ला को 90 दिनों के लिए निलंबित किए जाने के कुछ दिनों बाद सामने आए हैं।
हर्ष पंड्या पर रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न का आरोप है। पूर्व छात्रों द्वारा लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गयी है जांच अभी जारी है।
पूर्व छात्रों ने मुल्ला पर स्नातकोत्तर छात्रों से उनकी
शैक्षणिक जिम्मेदारियों से असंबंधित काम
करवाने का भी आरोप लगाया , उनसे लेप्टोस्पाइरोसिस के नमूने एकत्र करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भेजा गया, घंटों तक व्यक्तिगत बैंकिंग कार्य करने रेलवे टिकट प्राप्त करने के लिए कहा जाना शामिल है।
एक पूर्व छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि भारत के बाहर या अन्य जगहों से प्राप्त धन को नकद निकालने से पहले कभी-कभी कर्मचारियों या छात्रों के बैंक खातों के माध्यम से भेजा जाता था। इस आरोप की वित्तीय रिकॉर्ड के माध्यम से जांच करनी होगी।
एक पूर्व छात्रा ने आरोप लगाया कि विभाग का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि उसे गंभीर मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ा। उसने दावा किया कि एक बार उसे एक कमरे में ले जाकर नमाज़ पढ़ने और वज़ू करने के लिए दबाव डाला गया था।
कुछ पूर्व छात्रों ने मुल्ला के खिलाफ मजहबी दबाव के आरोप भी लगाए हैं,जिनमें यह दावा भी शामिल है कि छात्रों को क'लमा पढ़ने या इ'स्लामी प्रार्थनाओं में भाग लेने के लिए कहा गया था।
एक अन्य छात्र ने दावा किया कि मुल्ला ने हिंदू धर्म के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की और कथित तौर पर एक अन्य महिला को इ'स्लाम में परिवर्तित होने के लिए प्रोत्साहित किया।
ये आरोप पूर्व छात्रों द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
पूर्व छात्रों ने सवाल उठाया है कि कई वर्षों से शिकायतें मिलने के बावजूद कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उनके अनुसार, 2008 और 2016 के बीच लिखित शिकायतें दर्ज की गईं और गांधीनगर के अधिकारियों के ध्यान में भी लाई गईं।
बताया जाता है कि 2016 में एक समिति का गठन किया गया था, जिसके बाद मुल्ला को थोड़े समय के लिए जामनगर स्थानांतरित कर दिया गया था पर वह थोड़े समय बाद वापस लौट आई और बाद में शिकायत करने वालों को दबाव का सामना करना पड़ा।
उन्होंने अब पूर्व शिकायतों, सरकारी संसाधनों
के कथित दुरुपयोग और छात्रों के साथ किए
गए व्यवहार की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
जिन छात्रों ने इतने गंभीर आरोप समैया मुल्ला पर लगाया है वो कोई नर्सरी या स्कूल के बच्चे नही है सारे MBBS डॉ हैं।