लखनऊ पुलिस कमिश्नर के दफ़्तर में फ़ोटो खींचने के बाबत लगा ‘सावधान नोटिस बोर्ड’ देखिए इसमें लिखा हर शब्द अटल सत्य है।
दरअसल, ये पंक्तियाँ सामान्य क़िस्म के आमजनों के लिए हैं, नेता-सांसद-विधायक ‘उच्चकोटि के ख़ास’ privileged क़िस्म के होते हैं कई नियमों की परिधि से बाहर होते हैं। लोकतंत्र में ये नियम भी सीखना-समझना होगा कि आम नागरिक फ़ोटो खिंचवाने का आग्रह(चिरौरी) करता है जबकि वीआईपी से आग्रह (विनम्र निवेदन) किया जाता है॥
-निम्नवत वायरल तस्वीर के मामले में ‘बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख’ की कहावत भी सटीक बैठती है, सांसद महोदय ने आग्रह नहीं किया होगा इसलिए बिना मांगे-बिना कहे तस्वीर खिंचवाने का परम सौभाग्य प्राप्त हो गया।
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