
राज-काज
* दिनेश निगम ‘त्यागी’
घर बैठे ‘असरदार’ नेताओं को ‘सक्रिय’ कर पाएंगे मानक....!
- लंबे समय से संगठन के काम-काज से दूर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नई जवाबदारी सौंपी है। यह है पार्टी के पूर्व सांसदाें और विधायकों में समन्वय बनाना और पटवारी के साथ जोड़ कर उन्हें चुनाव तक सक्रिय रखना। इसके साथ जीतू ने मानक को प्रदेश मुख्यालय में खुद के चैम्बर से जुड़ा एक कक्ष भी बैठने के लिए आवंटित करा दिया। बाहर से देखने में यह दायित्व सामान्य लगता है लेकिन है यह बड़ा और चुनौतीपूर्ण। भूला- बिसरा समझ कर अब तक पूर्व सांसदों और विधायकों की कांग्रेस में ज्यादा पूछ-परख नहीं होती थी। वे कुंठित होकर पार्टी कार्यक्रमों में सक्रिय रहने की बजाय घर बैठे रहते थे, जबकि अपने क्षेत्र में इनकी गिनती असरदार नेताओं में होती है। इनके घर बैठने का नुकसान कांग्रेस को चुनाव में उठाना पड़ता था। पहली बार किसी प्रदेश अध्यक्ष ने इनकी नाराजगी दूर कर पार्टी में सक्रिय करने की ओर ध्यान दिया है। इस काम के लिए मानक अग्रवाल से अच्छा चुनाव नहीं हो सकता था। मानक तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र सेठी के समय से सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका में रहे हैं। हर वरिष्ठ पूर्व सांसद और विधायक उनसे परिचित है। अधिकांश से उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंध हैं। चुनौती बड़ी है पर वे इनके साथ समन्वय बना कर प्रदेश अध्यक्ष के साथ जोड़ने में कारगर भूमिका निभा सकते हैं।
राहुल के कार्यक्रम में पुणे का रिकार्ड तोड़ पाएगा इंदौर....!
- लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का 19 सितंबर को इंदौर में होने वाला ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम देहरादून, प्रयागराज और पुणे से भी ज्यादा चर्चा में है। वजह है कांग्रेस द्वारा कार्यक्रम के लिए मांगे गए नेहरू स्टेडियम को भाजपा शाषित नगर निगम द्वारा देने से इंकार और भाजपा नेताओं द्वारा लगातार की जा रही बयानबाजी। भाजपा ने ऐसा कर राहुल गांधी का प्रचार कांग्रेस से ज्यादा कर दिया। भाजपा के इस रुख से युवाओं में उनके प्रति आकर्षण और बढ़ गया। कांग्रेस ने इसे भुनाने की तैयारी शुरू कर दी है और इंदौर के कार्यक्रम में पुणे से भी ज्यादा युवाओं को इकट्ठा करने का टारगेट हाथ में ले लिया है। पुणे सहित अन्य भाजपा शाषित राज्यों में भी राहुल के कार्यक्रम को काफी अनाकानी के बाद शर्तों के साथ मंजूरी मिली लेकिन इंदौर में मामले को कुछ ज्यादा ही तूल दे दिया गया। कांग्रेस ने कहा कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में 50 हजार युवा आएंगे तो इंदौर के महापौर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि फिर कांग्रेस को कोई बड़ा मैदान देखना चाहिए क्योंकि नेहरू स्टेडियम की क्षमता 50 हजार की है ही नहीं। कांग्रेस यही चाहती थी कि भाजपा की ओर से राहुल गांधी का विरोध हो। इसीलिए पुणे में 47 हजार युवाओं के रजिस्ट्रेशन हुए थे और कांग्रेस ने इंदौर में इस रिकार्ड को तोड़ने की योजना बना डाली। ऐसा हो पाता है या नहीं, इसके लिए 19 तक का इंतजार करना होगा।
दिग्गजों से मुलाकात के बाद फिर चर्चा में आए नरोत्तम....
- दतिया उप चुनाव में भाजपा की हार के एक माह बाद प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा फिर चर्चा में हैं। वजह है भाजपा के दिग्गजों से उनकी मुलाकातें। मुलाकातों में क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल का उनके निवास जाकर मिलना और इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का दिल्ली बुलाकर बात करना महत्वपूर्ण है। नबीन से मिलने नरोत्तम भोपाल के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम छोड़ कर दिल्ली पहुंचे। उनकी भाजपा अध्यक्ष के साथ लगभग आधा घंटे बातचीत हुई। इधर जामवाल ने उनसे लंबी चर्चा की। लिहाजा, नरोत्तम को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया। कुछ का कहना है कि नरोत्तम की पार्टी में नई भूमिका काे लेकर कवायद शुरू हुई है और जल्द ही उन्हें कोई जवाबदारी मिल सकती है। दूसरी खबर यह भी है कि दतिया उप चुनाव के दौरान और उसके बाद नरोत्तम ने नबीन से मुलाकात का समय मांगा था। तब समय नहीं मिला और अब समय दिया गया। मैसेज आने पर वे दिल्ली पहुंच गए। जामवाल से मुलाकात का भी कोई ब्यौरा सार्वजनिक नहीं हुआ। नरोत्तम को कोई नई जवाबदारी मिलने वाली है, दतिया जिलाध्यक्ष काे लेकर उनकी राय ली गई है या दतिया उप चुनाव को लेकर समिति की रिपोर्ट पर कोई चर्चा हुई है, कोई कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। संभव है इस संदर्भ में सच सामने आने में कुछ और समय लगे।
क्या सच में आरएसएस से अकेले लड़ते थे दिग्विजय....?
- राजनीति के कई जानकार मानते हैं कि हिंदू-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद और हिंदुत्व से जुड़े बयानों के कारण कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पार्टी का नुकसान करते रहे हैं। इसलिए उनके कई बयानों को उनकी निजी राय कह कर कांग्रेस पल्ला झाड़ती रही है। एक-दो बार संघ को लेकर दिए उनके बयानों पर भी यह स्थिति बनी, लेकिन दिग्विजय की सोशल मीडिया पर ताजा पोस्ट ने संघ को लेकर समूची कांग्रेस के रुख पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने लिखा कि वे वर्ष 1972 से आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वे इन संगठनों के खिलाफ आवाज उठाते थे, तो एआईसीसी के तत्कालीन मीडिया विभाग के प्रमुख उनके बयानों से किनारा कर लेते थे। उन्होंने खुलासा करते हुए कहा कि जब वे बम ब्लास्ट के मामलों में आरोपी संघ कार्यकर्ताओं की शिकायत लेकर कांग्रेस सरकार के तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री के पास पहुंचे थे, तो उन्होंने आरएसएस को एक ‘राष्ट्रवादी संगठन’ बता दिया था। अंत में उन्होंने लिखा कि मुझे इस बात की अति प्रसन्नता है कि अब कांग्रेस नेतृत्व ने संघ के असली चेहरे को पहचाना है। दिग्विजय की पोस्ट से यह ध्वनि निकलती है कि वे संघ से अकेले लड़ रहे थे और समूची कांग्रेस संघ के साथ खड़ी थी, क्या ऐसा संभव है?
भाजपा के इन दिग्गजों की पीड़ा पर गौर फरमाएगा नेतृत्व....!
- भाजपा के दो दिग्गज नेता और पूर्व वरिष्ठ मंत्रियों के बयानों पर पार्टी नेतृत्व को गौर फरमाना चाहिए। इन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की पीड़ा को आवाज दी है। बयान देने वाले नेता हैं प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी और पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया। कोठारी ने प्रदेश सरकार के गठन के करीब पौने तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद विभिन्न समितियों, निगम-मंडलों, प्राधिकरणों और सहकारी क्षेत्र में कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां लंबित रहने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह देखने में आता है कि सरकार बनने के बाद बड़े पदों पर नियुक्तियां अपेक्षाकृत जल्दी हो जाती हैं, लेकिन जब जमीनी स्तर पर वर्षों से संगठन के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी देने की बात आती है, तो निर्णय में काफी समय लग जाता है। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा का भाव पैदा होता है। कोठारी ने कहा कि वर्तमान में जो नियुक्तियां हुई हैं, उनमें कार्यकर्ताओं को काम करने के लिए लगभग एक वर्ष का ही समय मिल पाएगा। यदि इन पदों पर सरकार गठन के कुछ समय बाद ही नियुक्तियां कर दी जातीं, तो बेहतर होता। मलैया का एक वीडियो वायरल है। इसमें वे कहते दिखाई पड़ रहे हैं कि अधिकारी हों या नेता, सभी रिश्वत खाने में मस्त हैं। किसी का कोई काम बिना पैसा लिए नहीं हो रहा। दोनों नेताओं के बयान नेतृत्व के लिए चिंता की बात होना चाहिए। ज्यादा नुकसान से बचने के लिए इनकी पीड़ा पर गौर फरमाना चाहिए।
Harda, Harda | Sep 7, 2026