
औरंगाबाद में जिला स्तरीय शारदी (खरीफ) महाभियान-2026 के अंतर्गत जिला स्तरीय कार्यशाला-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला पदाधिकारी, औरंगाबाद श्रीमती अभिलाषा शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
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कार्यक्रम में जिला कृषि पदाधिकारी संदीप राज, जिला उद्यान पदाधिकारी डॉ. श्रीकांत, सहायक निदेशक (रसायन) दीपक कुमार, सहायक निदेशक (पौधा संरक्षण) रॉकी रावत, उप परियोजना निदेशक (आत्मा) राजेंद्र कुमार, सहायक निदेशक (शस्य), भूमि संरक्षण राजीव रंजन, अनुमंडल कृषि पदाधिकारी राकेश रंजन, दाउदनगर, कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस के वैज्ञानिकगण तथा अनुप कुमार चौबे सहित कृषि विभाग के पदाधिकारी, कर्मी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि खरीफ महाभियान का मुख्य उद्देश्य खरीफ मौसम में उगाई जाने वाली फसलों की वैज्ञानिक खेती संबंधी जानकारी एवं प्रशिक्षण किसानों तक पहुंचाना है, ताकि उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हो सके। साथ ही पारंपरिक कृषि के साथ नई तकनीक आधारित एवं अधिक लाभकारी फसलों को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026 के खरीफ मौसम में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं राज्य योजना के अंतर्गत जिले में विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाना है। इसके तहत स्वीट कॉर्न की खेती हेतु 50 एकड़, बेबी कॉर्न 85 एकड़, संकर धान 225 एकड़, संकर धान बीज वितरण 387 क्विंटल तथा संकर मक्का की खेती हेतु 25 एकड़ एवं 14 क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके अतिरिक्त खाद्य एवं पोषण सुरक्षा (कृषोन्नति योजना) के अंतर्गत न्यूट्री सीरियल (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए रागी (मड़ुआ) 1000 एकड़, सावां 100 एकड़ तथा रामदाना 250 एकड़ क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही अनुदानित दर पर ज्वार, बाजरा एवं मड़ुआ के संकर बीज वितरण कार्यक्रम का भी जिले को लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
जिला कृषि पदाधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत औरंगाबाद जिले में 03 क्लस्टरों के माध्यम से 150 एकड़ क्षेत्र में 375 किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती आधारित सुगंधित धान की खेती कराई जाएगी, जिससे प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की उत्पादन लागत में कमी आएगी।
अपने संबोधन में जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने सभी कृषि कर्मियों एवं पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रशिक्षण प्राप्त कर किसानों को योजनाओं एवं वैज्ञानिक खेती की जानकारी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराएं तथा सभी योजनाओं का संचालन पारदर्शिता एवं निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित करें।
उन्होंने किसान भाइयों से अपील की कि शारदीय खरीफ मौसम में केवल धान पर निर्भर न रहकर मोटे अनाज एवं वैकल्पिक फसलों जैसे स्वीट कॉर्न, बेबी कॉर्न, मड़ुआ, ज्वार, सावां आदि की खेती करें, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो तथा कृषि अधिक टिकाऊ और लाभकारी बन सके।
जिला पदाधिकारी ने यह भी निर्देश दिया कि किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निष्पादन किया जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी द्वारा “मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन” विषयक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, औरंगाबाद जिले की प्रखंडवार मृदा स्थिति, मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित उर्वरक उपयोग की विधि तथा संतुलित उर्वरक प्रयोग संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
जिला पदाधिकारी ने सभी किसान भाइयों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनवाने तथा उसी के आधार पर उर्वरकों के उपयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फसल उत्पादन में उर्वरकों का उपयोग एक महत्त्वपूर्ण एवं महंगी लागत है। बिना मिट्टी जांच के उर्वरक प्रयोग करने से समय, श्रम एवं संसाधनों की हानि होती है। किसी एक उर्वरक का आवश्यकता से अधिक प्रयोग अन्य पोषक तत्वों की उपलब्धता को प्रभावित कर सकता है, जिससे उत्पादन में कमी आती है। इसलिए किसानों को उर्वरकों की खपत कम करने तथा कम-से-कम 25 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक अथवा जैविक खेती अपनाने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम में जिला उद्यान पदाधिकारी द्वारा उद्यान विभाग की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। सहायक निदेशक (रसायन) दीपक कुमार द्वारा मिट्टी की उर्वरता एवं संतुलित उर्वरक प्रयोग पर जानकारी साझा की गई।
वहीं कृषि विज्ञान केंद्र, सिरिस के वरीय वैज्ञानिक द्वारा जैविक खेती एवं जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों पर प्रकाश डाला गया। कृषि वैज्ञानिक आशुतोष कुमार द्वारा धान की सीधी बुआई, मिलेट्स उत्पादन एवं अरहर उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों के संबंध में उपस्थित किसानों एवं कृषि कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, विविधीकरण, प्राकृतिक खेती तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक कर कृषि क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देना रहा।
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