
टेलीग्राम पर शिकंजा: क्या NEET की सुरक्षा के लिए 15 करोड़ यूजर्स की आवाज दबाई जा सकती है?
NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा से ठीक पहले टेलीग्राम पर केंद्र सरकार की अस्थायी रोक ने देश में डिजिटल अधिकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है। एक तरफ सरकार का दावा है कि टेलीग्राम अपराधियों, साइबर गिरोहों और पेपर लीक नेटवर्क का प्रमुख माध्यम बन चुका है, वहीं दूसरी तरफ सवाल यह उठ रहा है कि क्या कुछ लोगों की कथित गलतियों की कीमत करोड़ों आम यूजर्स को चुकानी चाहिए। इसी टकराव के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
न्यायालय में उठे बड़े सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस तेजस करिया ने केंद्र सरकार से महत्वपूर्ण सवाल पूछा कि क्या केवल इसलिए 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है क्योंकि कुछ नागरिक एक परीक्षा देने जा रहे हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि क्या किसी परीक्षा की सुरक्षा के नाम पर इतने बड़े स्तर पर संचार के अधिकार को प्रभावित करना उचित है। कोर्ट ने टेलीग्राम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता से भी सवाल किया। अदालत ने कहा कि बहस केवल इस मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकार की शक्तियों की प्रकृति और उनके इस्तेमाल के दायरे से भी जुड़ी हुई है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि किसी विशेष जानकारी को ब्लॉक किया जा सकता है तो पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करने की आवश्यकता क्यों पड़ती है। दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत जारी ब्लॉकिंग आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
सरकार ने क्यों बताया फैसला सही
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ब्लॉकिंग आदेश पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि बाद में कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समीक्षा समिति ने भी इस फैसले की जांच की और उसे सही पाया। सरकार का कहना था कि उसके पास पर्याप्त सामग्री और इनपुट मौजूद हैं, जो यह संकेत देते हैं कि परीक्षा में गड़बड़ी और संगठित धोखाधड़ी के लिए टेलीग्राम का दुरुपयोग किया जा रहा था। तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि इस मामले में व्यापक जनहित को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Sadar, Lucknow | Jun 20, 2026