पिंकी मीना की नियुक्ति हुई, सवाल उठे, हो-हल्ला मचा और फिर निलंबन की चिट्ठी आ गई। अब असली सवाल नियुक्ति से ज्यादा उस व्यवस्था से है, जिसने पहले तैनाती दी और बाद में उसे गलत मान लिया।
अगर पिंकी मीना की नियुक्ति वाकई इतनी बड़ी भूल थी, तो क्या अब उन तमाम नामों की भी फाइलें खुलेंगी, जिनके अतीत पर सवाल उठते रहे हैं, जो विवादों में रहे हैं और फिर भी किसी न किसी कुर्सी तक पहुंचते रहे हैं?
नियम अगर सबके लिए एक हैं, तो फिर कसौटी भी सबकी एक होनी चाहिए। मामला सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं, सिस्टम की साख और फैसलों की पारदर्शिता का है।
Tonk, Tonk | Aug 14, 2026