इतना रास आया मुरैना कि यहीं रम गए गिर्राजजी...तकरीबन डेढ़ सौ साल पहले गिर्राजजी की प्रतिमा को बैलगाड़ी में रखकर आगरा से ग्वालियर ले जाया जा रहा था। वहां दौलतगंज में प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा होनी थी। प्रतिमा के साथ चल रहे लोग रात्रि विश्राम के लिए मुरैना में रुके। प्रतिमा को बैलगाड़ी से उतारकर एक पेड़ के नीचे रखा गया। लेकिन सुबह आगे बढ़ने के लिए जब उन्होंने प्रतिमा को बैलगाड़ी में रखने का प्रयास किया तो उसे उठा नहीं सके। सभी प्रयास नाकाम हो गए तो गिर्राजजी की इच्छा मानकर प्रतिमा को मुरैना में महादेव नाका पर ही स्थापित कर दिया गया।
तब से यह मंदिर मुरैना में लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। आप भी दर्शन कीजिये, मन को सुकून मिलेगा🙏🚩