
शहर की हॉट सीटों पर बाहरी प्रत्याशियों की साख दांव पर
मतदान के बाद थमा शोर-शराबा, 201 प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद, 14 को होगी मतगणना
चूरूः नगर परिषद क्षेत्र के 60 वार्डों में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान बुधवार को शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हो गया। मतदान समाप्त होते ही अब शहर के चुनावी गलियारों में हार-जीत के आंकड़े जुटाने और विश्लेषणात्मक चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। इस बार चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा बाहरी प्रत्याशियों की रही। शहर के प्रमुख वार्डों में राजनीतिक दलों द्वारा बाहरी चेहरों पर दांव खेलने से चुनावी समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं और मुकाबला बेहद पेचीदा हो गया है। मतदान के बाद सामने आए रुझानों के अनुसार कई दिग्गज और वरिष्ठ नेता बाहरी प्रत्याशी होने के ठप्पे के कारण अपने ही वार्डों में फंसते नजर आ रहे हैं। स्थानीय मतदाताओं के बीच अपने ही वार्ड का पार्षद चुनने की मांग हावी रही, जिसका सीधा असर मतदान के दिन देखने को मिला। वार्ड 20, 44, 53 और 59 ऐसे प्रमुख वार्ड रहे, जहां बाहरी प्रत्याशियों की साख दांव पर लगी हुई है और इनमें से कई सीटों पर हार-जीत का अंतर मामूली रहने की उम्मीद है। इसमें मुकाबला बेहद ही कांटे का है। सभी प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद हो चुका है।
वार्ड 20 में पूर्व सभापति विजय शर्मा बाहरी होने से फंसे, भाजपा को नुकसान के आसार
वार्ड 21 के मूल निवासी व पूर्व सभापति विजय शर्मा ने इस बार वार्ड 20 से ताल ठोकी है। वे यहां पूरी तरह बाहरी प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे, जबकि उनके सामने कांग्रेस के कमल सिंह और आरएलपी के विद्याधर दो स्थानीय प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे रहे। वार्डवासियों के अनुसार विजय शर्मा का बाहरी प्रत्याशी होना भाजपा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। स्थानीय मतदाताओं का झुकाव अपने ही वार्ड के उम्मीदवार की तरफ ज्यादा देखा गया, जिससे पूर्व सभापति यहां कड़े मुकाबले में फंसते नजर आ रहे हैं।
वार्ड 44 शहर की सबसे चर्चित हॉट सीट, दोनों दलों ने ही उतारे बाहरी चेहरे
वार्ड 44 इस बार पूरे चूरू शहर की सबसे हॉट सीट बनी रही। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने यहां स्थानीय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर बाहरी प्रत्याशियों पर दांव खेला। दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी बाहरी होने के कारण मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। मतदान के बाद के रुझानों को देखकर यह कह पाना बेहद मुश्किल है कि जीत का सेहरा किसके सिर बंधेगा। मतगणना के अंतिम दौर तक यहां जीत-हार का सस्पेंस रहेगा।
वार्ड 53 में सैनी बाहुल्य क्षेत्र में भी फंसे निवर्तमान सभापति के पति नारायण बालाण
वार्ड 53 से निवर्तमान सभापति के पति नारायण बालाण ने चुनाव लड़ा। सैनी समाज से आने वाले बालाण के लिए राहत की बात यह मानी जा रही थी कि यह वार्ड सैनी समाज बाहुल्य क्षेत्र है। हालांकि, समाज के मतों का बाहुल्य होने के बावजूद नारायण बालाण स्थानीय प्रत्याशी न होने के कारण फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं। वार्ड के लोगों का कहना है कि स्थानीय उम्मीदवार का न होना उनके लिए एक बड़ा नकारात्मक फैक्टर बन गया, जिसने उनके चुनावी समीकरणों को बिगाड़ दिया है।
वार्ड 59 में दो बार के स्थानीय पार्षद के सामने फंसे भाजपा के डॉ. महेश शर्मा
वार्ड 59 में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला। कांग्रेस ने यहां से लगातार दो बार पार्षद रह चुके स्थानीय चेहरे चन्द्रप्रकाश सैनी को मैदान में उतारा, वहीं भाजपा ने चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर आए वरिष्ठ नेता डॉ. महेश कुमार शर्मा पर दांव खेला। डॉ. महेश शर्मा वरिष्ठ नेता जरूर हैं, लेकिन इस वार्ड के लिए बाहरी प्रत्याशी होने के कारण वे स्थानीय चक्रव्यूह में फंस गए हैं। एक तरफ स्थानीय स्तर पर चन्द्रप्रकाश सैनी की मजबूत पकड़ और दूसरी तरफ डॉ. शर्मा के बाहरी होने का मुद्दा हावी रहा, जिससे नतीजे काफी चौंकाने वाले आ सकते हैं। #elactionnews
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Churu, Churu | Sep 10, 2026