
हिस्ट्रीशीटर से दूरी की हिदायत… फिर SHO की गाड़ी में कैसे पहुंचा? वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी
वरिष्ठ तेज-तर्रार IPS रमन कुमार मीणा की हिदायत के बावजूद कथित नजदीकी पर उठे सवाल, पहले भी हिस्ट्रीशीटर के चक्कर में एक SHO को होना पड़ा था लाइन हाजिर!
पांवटा साहिब।
सिरमौर पुलिस में एक वायरल वीडियो ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसका जवाब अब पुलिस महकमे से मांगा जा रहा है। वीडियो में कथित हिस्ट्रीशीटर पुलिस की गाड़ी में बैठे हुए नजर आ रहा है । दावा है कि जिस समय यह वीडियो बनाया गया, पुलिस वाहन सरकारी ड्यूटी पर था।
मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि सिरमौर पुलिस को वरिष्ठ तेज-तर्रार IPS अधिकारी रमन कुमार मीणा की ओर से हिस्ट्रीशीटरों से अनावश्यक नजदीकी से बचने की हिदायत दिए जाने की बात सामने आती रही है। ऐसे में पुलिस वाहन में कथित हिस्ट्रीशीटर की मौजूदगी का वीडियो कई सवाल खड़े कर रहा है।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
सूत्रों के मुताबिक, हिस्ट्रीशीटर से जुड़े एक पुराने मामले में तत्कालीन SHO को लाइन हाजिर तक होना पड़ा था। यानी पुलिस विभाग के स्तर पर पहले भी यह संदेश स्पष्ट रहा है कि हिस्ट्रीशीटरों से पुलिस की नजदीकी को किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इसके बावजूद अब यदि वायरल वीडियो में पुलिस की ड्यूटी वाली गाड़ी में ऐसे शख्स की मौजूदगी की पुष्टि होती है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उन्हें पुलिस वाहन में किस आधार पर बैठाया गया था?
क्या रौब जमाने के लिए पुलिस वाहन का इस्तेमाल?
वीडियो को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आ रहा है। चर्चा है कि पुलिस वाहन में बैठकर कथित तौर पर लोगों के बीच प्रभाव और रौब दिखाने की कोशिश की जा रही होगी। यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला सिर्फ किसी व्यक्ति के पुलिस वाहन में बैठने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सरकारी वाहन के इस्तेमाल और पुलिस की छवि से भी जुड़ जाएगा।
वीडियो पहुंचा वरिष्ठ अधिकारियों तक!
बताया जा रहा है कि किसी व्यक्ति ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और उसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचाया। यही वीडियो अब पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच पांवटा साहिब के SHO के तबादले ने घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। हालांकि, तबादला इसी वीडियो या कथित संरक्षण के कारण हुआ—इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे फिलहाल एक गंभीर सवाल और जांच का विषय ही माना जाना चाहिए।
अब पुलिस से जवाब की उम्मीद
पुलिस विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि वीडियो कब का है, वाहन किस ड्यूटी पर था, उसमें हिस्ट्रीशीटर किस आधार पर मौजूद था और क्या संबंधित अधिकारी को इसकी जानकारी या अनुमति थी।
सबसे बड़ा सवाल यही है—
जब वरिष्ठ स्तर पर हिस्ट्रीशीटरों से दूरी बनाए रखने की हिदायत की बात सामने आती रही है, तो फिर पुलिस की ड्यूटी वाली गाड़ी में उसकी मौजूदगी आखिर कैसे हुई?
अब देखना होगा कि पुलिस विभाग इस वायरल वीडियो को महज एक तस्वीर/वीडियो मानकर छोड़ता है या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष विभागीय जांच कर जिम्मेदारी तय करता है।