
#बालाघाट
ग्रामीण परिवेश से राष्ट्रीय पहचान तक
बालाघाट के युवा सिद्धार्थ गेडाम का ‘विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ में राष्ट्रीय स्तर पर चयन
प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के सामने संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बनती। इसका सशक्त उदाहरण बालाघाट जिले के ग्राम मंझारा (भरवेली) निवासी युवा एवं नेशनल वॉलिंटियर सिद्धार्थ गेडाम हैं, जिनका भारत सरकार के महत्वाकांक्षी माय भारत के अंतर्गत संचालित विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीवीपी) में राष्ट्रीय स्तर पर चयन हुआ है। ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच हासिल की गई यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गौरव का विषय है, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई है।
भारत सरकार द्वारा संचालित विकसित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम का उद्देश्य देश के सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास करना है। कार्यक्रम के माध्यम से सीमा क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाना, जनभागीदारी को बढ़ावा देना तथा गांवों को आत्मनिर्भर और विकसित बनाना प्रमुख लक्ष्य है। इसके अंतर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, संचार और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में चयनित युवाओं को देश के सीमावर्ती राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों जैसे लद्दाख, हिमाचलप्रदेश, उत्तराखण्ड तथा जम्मु और कश्मीर के चयनित गांवों में कार्य करने और वहां के जीवन, चुनौतियों तथा विकास गतिविधियों को निकट से समझने का अवसर मिलेगा। प्रतिभागी सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सामुदायिक सहभागिता, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता अभियान, युवा संवाद तथा अनुभवात्मक शिक्षण जैसी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
सिद्धार्थ गेडाम ने अपनी मेहनत, अध्ययनशीलता और सामान्य ज्ञान के दम पर इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय कार्यक्रम में स्थान बनाया है। उनकी यह उपलब्धि अचानक नहीं आई, बल्कि वर्षों के निरंतर प्रयास और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता का परिणाम है।
उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ इससे पूर्व भी कई राष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। वे माय भारत बजट क्वेस्ट कार्यक्रम के अंतर्गत भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के साथ बजट विषय पर आयोजित वर्चुअल संवाद में सहभागिता कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय युवा संसद कार्यक्रम में मध्यप्रदेश लेजिस्लेटिव असेंबली में बालाघाट जिले का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रभावशाली वक्तव्य प्रस्तुत किया था, जिसकी व्यापक सराहना हुई थी।
सामाजिक जागरूकता, युवा नेतृत्व, राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न मंचों पर सिद्धार्थ लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर सफलता प्राप्त करने की उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हों, तो किसी भी पृष्ठभूमि का युवा देश के बड़े मंचों तक पहुंच सकता है।
सिद्धार्थ गेडाम की यह उपलब्धि बालाघाट जिले के युवाओं के लिए प्रेरणादायी है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि ग्रामीण भारत की प्रतिभाएं आज राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं और आने वाले समय में देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए तैयार हैं।
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