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मनुष्य के भीतर का तप उसे भगवान से जोड़ता है- गोविन्द किशोर पांडे कुआं खेजड़ी वाले बालाजी मंदिर में चल रही है श्रीमद् भागवत गीता डीडवाना। स्थानीय गणपति नगर स्थित श्रीकुआं खेजड़ी वाले बालाजी मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत गीता का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य यजमान महेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि कथावाचन वृंदावन वाले गोविंद किशोरजी पांडे द्वारा किया जा रहा है। कथा का समय दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक रखा गया है। कथा का वाचन करते हुए गोविंद किशोरजी पांडे ने कथा का महात्म्य बताते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से अलौकिक शांति मिलती है और जीवन मे बदलाव आता है। कलयुग ने सत्य, तप, दया, दान, सदाचार सबको नष्ट कर दिया है। कलयुग से पार करने का मात्र साधन श्रीमद्भागवत गीता हैं। जिसने भगवान की शरणागति लेली उसका कोई कुछ नही बिगाड़ सकता। गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि गुरु उसको बनायें जिसने कृपानाथ भगवान को पा लिया हो। जिस प्रकार बरसात से पूर्व उमस होती है,वैसे ही मनुष्य के भीतर का तप उसे भगवान से जोडता है। व्यक्ति की वृत्ति उसे राक्षस या भगवान बनाती है। इसलिए वृति ऐसी होनी चाहिये समाज उसका अनुकरण करे। व्यक्ति को अपने स्वभाव को, चरित्र को आचरण को सुंदर बनाने का प्रयास करना चाहिए। आज की कथा में श्रीमद् भागवत कथा का महात्म्य बताते हुए अनेक दृष्टांत, उद्धरण एवम प्रसंग बताकर पूरा वातावरण कृष्णमय कर दिया। भागवत् गीता में सांख्य दर्शन के त्रिगुणात्मक सिद्धान्त को बड़ी सुंदर रीति से अपनाया गया। इस दौरान अनेक श्रद्धालुगण उपस्थित रहे।

Didwana, Nagaur | Jul 11, 2026

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सरकारी दावों की खुली पोल: मारवाड़ बालिया के स्कूल में पीने के पानी को तरस रहे मासूम, बाहर से कैंपर लाने को मजबूर

डीडवाना।एक तरफ राज्य सरकार और शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने, उन्हें 'स्मार्ट' बनाने और ड्रॉपआउट दर कम करने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय के बिल्कुल नजदीक स्थित ग्राम मारवाड़ बालिया से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के राजकीय विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि मासूम बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए स्कूल की पढ़ाई छोड़कर बाहर से भारी-भरकम पानी के कैंपर भरकर लाने पड़ रहे हैं।जब स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने इन नन्हें-मुन्हें मासूम बच्चों को झुलसाती धूप में बाहर से पानी के कैंपर लाते देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की इस बदहाली पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। बच्चों की इस दयनीय स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने फिलहाल तात्कालिक राहत के रूप में अपने निजी खर्चे से स्कूल में पानी का एक टैंकर डलवाया है, ताकि बच्चों को पानी के लिए बाहर न जाना पड़े।

*बड़ा सवाल: 4 दिन बाद टैंकर खाली होगा, तब क्या करेगी सरकार?*
ग्रामीणों ने बताया कि जनसहयोग से डलवाया गया यह टैंकर महज 3 से 4 दिन ही चलेगा। इसके बाद जब पानी खत्म हो जाएगा, तो स्कूल के हालात फिर जस के तस हो जाएंगे। इस प्रशासनिक अनदेखी से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का स्तर किस तरह गर्त में जा रहा है। सवाल यह उठता है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गरीब परिवारों के ये मासूम बच्चे आखिर कैसे शिक्षित होंगे और कैसे अपने परिवारों का नाम रोशन करेंगे।

*सरकारी सिस्टम की लापरवाही से बढ़ रहा प्राइवेट स्कूलों का ग्राफ*
इस जमीनी हकीकत ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरकारी तंत्र की इसी लापरवाही और उदासीनता के कारण गरीब अभिभावक भी अब सरकारी स्कूलों से मोहभंग करने को मजबूर हैं। इसी का फायदा उठाकर निजी (प्राइवेट) स्कूल लगातार पैर पसार रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला मुख्यालय के इतने नजदीक यह हाल है और जल्द ही स्कूल में स्थाई जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे जिला प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

*अधेरे में बच्चों का भविष्य*
एक तरफ जहां बच्चों के हाथों में कॉपियां और किताबें होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ उन्हें पानी ढोने के काम में लगा दिया गया है। सरकारी स्कूलों की ऐसी दुर्दशा बच्चों की शिक्षा को सीधे तौर पर अंधेरे में धकेल रही है। मुख्यालय के नजदीक यह हाल है, तो दूर-दराज के गांवों की स्थिति भगवान भरोसे ही है।

सरकारी दावों की खुली पोल: मारवाड़ बालिया के स्कूल में पीने के पानी को तरस रहे मासूम, बाहर से कैंपर लाने को मजबूर डीडवाना।एक तरफ राज्य सरकार और शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करने, उन्हें 'स्मार्ट' बनाने और ड्रॉपआउट दर कम करने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला मुख्यालय के बिल्कुल नजदीक स्थित ग्राम मारवाड़ बालिया से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां के राजकीय विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि मासूम बच्चों को अपनी प्यास बुझाने के लिए स्कूल की पढ़ाई छोड़कर बाहर से भारी-भरकम पानी के कैंपर भरकर लाने पड़ रहे हैं।जब स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने इन नन्हें-मुन्हें मासूम बच्चों को झुलसाती धूप में बाहर से पानी के कैंपर लाते देखा, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की इस बदहाली पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। बच्चों की इस दयनीय स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने फिलहाल तात्कालिक राहत के रूप में अपने निजी खर्चे से स्कूल में पानी का एक टैंकर डलवाया है, ताकि बच्चों को पानी के लिए बाहर न जाना पड़े। *बड़ा सवाल: 4 दिन बाद टैंकर खाली होगा, तब क्या करेगी सरकार?* ग्रामीणों ने बताया कि जनसहयोग से डलवाया गया यह टैंकर महज 3 से 4 दिन ही चलेगा। इसके बाद जब पानी खत्म हो जाएगा, तो स्कूल के हालात फिर जस के तस हो जाएंगे। इस प्रशासनिक अनदेखी से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि ग्रामीण इलाकों में शिक्षा का स्तर किस तरह गर्त में जा रहा है। सवाल यह उठता है कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में गरीब परिवारों के ये मासूम बच्चे आखिर कैसे शिक्षित होंगे और कैसे अपने परिवारों का नाम रोशन करेंगे। *सरकारी सिस्टम की लापरवाही से बढ़ रहा प्राइवेट स्कूलों का ग्राफ* इस जमीनी हकीकत ने शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरकारी तंत्र की इसी लापरवाही और उदासीनता के कारण गरीब अभिभावक भी अब सरकारी स्कूलों से मोहभंग करने को मजबूर हैं। इसी का फायदा उठाकर निजी (प्राइवेट) स्कूल लगातार पैर पसार रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला मुख्यालय के इतने नजदीक यह हाल है और जल्द ही स्कूल में स्थाई जलापूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई, तो वे जिला प्रशासन के खिलाफ उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। *अधेरे में बच्चों का भविष्य* एक तरफ जहां बच्चों के हाथों में कॉपियां और किताबें होनी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ उन्हें पानी ढोने के काम में लगा दिया गया है। सरकारी स्कूलों की ऐसी दुर्दशा बच्चों की शिक्षा को सीधे तौर पर अंधेरे में धकेल रही है। मुख्यालय के नजदीक यह हाल है, तो दूर-दराज के गांवों की स्थिति भगवान भरोसे ही है।

Didwana, Nagaur | Jul 11, 2026

NSUI उपाध्यक्ष प्रेम चोयल राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के सानिध्य में सफल छात्रों की गूज कार्यक्रम

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Didwana, Nagaur | Jul 10, 2026