
1971 में हुई भविष्यवाणी हो रही सच | SA News Chhattisgarh
07-09-2026: इस नश्वर संसार में, जो केवल एक झूठे स्वप्न के समान है और किसी भी क्षण समाप्त हो सकता है, लोग सही या गलत तरीके से संपत्ति इकट्ठा करने में व्यस्त हैं। सही कहा गया है कि केवल सच्चे संत ही हमें यह याद दिला सकते हैं कि मानव जीवन प्राप्त करने का मुख्य उद्देश्य क्या है जो कि सतभक्ति करके उस अमर धाम में पहुँचना है जहाँ न कोई दुख है, न बुढ़ापा, और सबसे महत्वपूर्ण, न मृत्यु!
इन्हीं चीजों की वास्तविक जानकारी देने के लिए परमात्मा स्वयं अवतार धारण कर इस कलयुग में आते हैं। उनके बारे में कई भविष्यवक्ताओं ने भविष्यवाणी की है।
जैसे कि जय गुरुदेव की बताई गई भविष्यवाणी 28 अगस्त 1971 में एक ऐसे महापुरुष के विषय में भविष्यवाणी की गई थी। जो भारत के एक छोटे से गाँव में जन्म ले चुका है और आगे चलकर मानव इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उसके बारे में व्यापक जनसमर्थन, नया विधान तथा एक झंडे और एक भाषा स्थापित करेंगे। “जय गुरुदेव की अमर वाणी” भाग-2, पृष्ठ 50 और 59
शाकाहारी पत्रिका में 7 सितंबर 1971, जयगुरुदेव मथुरा द्वारा संत रामपाल जी महाराज के विषय में की गई भविष्यवाणी, "वह अवतार जिसकी लोग प्रतीक्षा कर रहे हैं वह 20 वर्ष का हो चुका है। यदि उसका पता बता दूं तो लोग उसके पीछे पड़ जाएंगे।” अभी ऊपर से आदेश बताने के लिए नहीं हो रहा है। समय आने पर सबको सब कुछ मालूम हो जाएगा।
संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर 1951 को हरियाणा के धनाना गाँव में हुआ था। इसलिए 7 सितंबर 1971 को उनकी आयु 20 वर्ष पूरा हो चुका था, जबकि 8 सितंबर 1971 से 21वाँ वर्ष प्रारंभ हुआ।
विभिन्न देशों के भविष्यवक्ताओं द्वारा भारत से एक ऐसे महान आध्यात्मिक व्यक्तित्व के उदय की भविष्यवाणियों का उल्लेख मिलता है, जो मानवता को नई दिशा देकर विश्व में ज्ञान, शांति, प्रेम और भाईचारे की स्थापना करेगा।
इंग्लैण्ड के ज्योतिषी कीरो की 1925 में लिखी पुस्तक के अनुसार 20वीं सदी के उत्तरार्द्ध में, अर्थात् 1950 के बाद जन्म लेने वाला एक संत विश्व में नई सभ्यता लाएगा और भारत का एक व्यक्ति संसार में ज्ञानक्रांति का संदेश फैलाएगा।
भविष्यवक्ता वेजीलेटिन के अनुसार 20वीं सदी के उत्तरार्द्ध में विश्व में आपसी प्रेम का अभाव, मानवता का पतन, धन-संग्रह की होड़, लूट और अन्याय जैसी परिस्थितियां बढ़ेंगी। इसके बाद भारत से शांति और भाईचारे पर आधारित नई सभ्यता का उदय होगा, जो देश, प्रांत और जाति की सीमाओं से ऊपर उठकर विश्व में अमन-चैन स्थापित करेगी।
अमेरिकी भविष्यवक्ता एण्डरसन के अनुसार 20वीं सदी के अंत या 21वीं सदी के प्रारंभ में भारत के ग्रामीण क्षेत्र से एक धार्मिक व्यक्ति मानवता को सदाचार, उदारता, सेवा और प्रेम का संदेश देगा तथा विश्व में धर्म और शांति की स्थापना करेगा।
नॉर्वे के आनन्दाचार्य के नाम से प्रचलित भविष्यवाणी में 1998 के बाद भारत में एक शक्तिशाली धार्मिक संस्था के उदय और उसके आध्यात्मिक ज्ञान के विश्वभर में प्रभावी होने की बात कही गई है।
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