
भरतनाट्यम की थिरकन से गूंजा हिण्डौन, विद्यार्थियों ने सीखी भारतीय संस्कृति की अनमोल विरासत,
अंतरराष्ट्रीय नृत्यांगना वैष्णवी सुशीला ने दी मनमोहक प्रस्तुति, विद्यार्थियों को सिखाईं नृत्य की बारीकियां।
भारतीय संस्कृति की पहचान... हमारी शास्त्रीय कलाएं और सदियों पुरानी नृत्य परंपराएं। इन्हीं सांस्कृतिक विरासतों से नई पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से हिण्डौन में स्पिक मैके सोसायटी की ओर से विशेष सांस्कृतिक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भरतनाट्यम नृत्यांगना वैष्णवी सुशीला ने अपनी आकर्षक प्रस्तुति से विद्यार्थियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं उन्होंने विद्यार्थियों को भरतनाट्यम की मुद्राओं, ताल, लय और भाव-अभिव्यक्ति का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया।
स्पिक मैके हिण्डौन चैप्टर की ओर से यह विशेष कार्यशाला महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, मंडावरा और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बादलपुर में आयोजित की गई।
अंतरराष्ट्रीय भरतनाट्यम नृत्यांगना वैष्णवी सुशीला ने भरतनाट्यम की मनमोहक प्रस्तुति देकर विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराया। उनकी भावपूर्ण प्रस्तुतियों और नृत्य की बारीकियों ने विद्यार्थियों के साथ-साथ विद्यालय स्टाफ का भी ध्यान आकर्षित किया।
कार्यशाला के दौरान वैष्णवी सुशीला ने विद्यार्थियों को बताया कि भरतनाट्यम केवल नृत्य की एक शैली नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ी एक समृद्ध कला है।
स्पिक मैके हिण्डौन चैप्टर के समन्वयक अनमोल बागरैनियां ने बताया कि संस्था का उद्देश्य छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत, नृत्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है, ताकि नई पीढ़ी अपनी समृद्ध परंपराओं को समझे और इन्हें आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाए।
कार्यक्रम के समापन पर महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय, मंडावरा के प्रधानाचार्य ने कलाकार वैष्णवी सुशीला और स्पिक मैके की टीम का सम्मान कर आभार जताया। विद्यार्थियों ने भी ऐसी सांस्कृतिक कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की मांग रखी।
कार्यशाला में विद्यालय स्टाफ के साथ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
स्पिक मैके की यह पहल विद्यार्थियों के लिए सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य की बारीकियों को करीब से जानने और अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का एक शानदार अवसर भी बनी।