
विभागीय जांच में दोष सिद्ध होने पर निलंबित शिक्षकों पर वेतनवृद्धि रोकने की कार्रवाई
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कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय ने तीन शिक्षकों पर अलग अलग प्रकरणों में अनुशासनहीनता और लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लेते हुए, विभागीय जांच पूर्ण होने पर कार्रवाई करते हुए वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी किया है।
कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय के आदेशानुसार विभागीय जांच पूर्ण होने के उपरांत माध्यमिक शिक्षक (निलंबित) श्री सुरेश कुमार चौरसिया को वर्ष 2025 में शासकीय कन्या हाईस्कूल चंदेरा में पदस्थापना के दौरान अतिथि शिक्षकों से धनराशि लेने तथा उन्हें प्रताड़ित किए जाने के आरोपों के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। इसके उपरांत आरोप-पत्र जारी कर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत नियमित विभागीय जांच कराई गई।
विभागीय जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन एवं अभिलेखों के परीक्षण में यह पाया गया कि श्री चौरसिया द्वारा की गई अनियमितताओं के कारण अतिथि शिक्षक के पद से संबंधित प्रक्रियाओं में बाधा उत्पन्न हुई। साथ ही, अतिथि शिक्षकों की अनुपस्थिति के बावजूद उनसे धनराशि लेकर वेतन भुगतान किए जाने के आरोप भी प्रमाणित पाए गए।
प्रकरण में दोष सिद्ध होने पर सक्षम प्राधिकारी ने श्री सुरेश कुमार चौरसिया को निलंबन से बहाल करते हुए पुनः शासकीय कन्या हाईस्कूल चंदेरा में पदस्थ किया जाकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत चार वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोके जाने का दंड अधिरोपित किया गया है। साथ ही निलंबन अवधि को कार्य नहीं, वेतन नहीं के सिद्धांत के आधार पर केवल जीवन निर्वाह भत्ते तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया है।
इसीक्रम में शासकीय प्राथमिक शाला, बरेठी संकुल केन्द्र शा.बा.उ.मा.वि. लिधौरा के प्राथमिक शिक्षक श्री सुखलाल सौर को शासन और प्रशासन के प्रति अभद्र भाषा का उपयोग करने के आरोपों पर निलंबित किया गया था। श्री सुखलाल सौर का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह शराब के नशे में गाली गलौच करते हुए एवं अभद्रता का व्यवहार करते हुए पाए गए थे। उक्त आरोपों के आधार पर श्री सुखलाल सौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उन पर विभागीय जांच के निर्देश दिए गए। विभागीय जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन एवं परीक्षण में शासकीय सेवक श्री सुखलाल सौर पर लगे आरोप प्रमाणित पाए गए। प्रकरण में दोष सिद्ध होने पर सक्षम प्राधिकारी ने श्री सुखलाल सौर को निलंबन से बहाल करते हुए पुनः शा.प्रा.शाला बरेठी में पदस्थ किया जाकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोके जाने का दंड अधिरोपित किया गया है। साथ ही निलंबन अवधि को कार्य नहीं, वेतन नहीं के सिद्धांत के आधार पर केवल जीवन निर्वाह भत्ते तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया है।
इसीप्रकार शा.प्रा.शा. पड़वार संकुल केन्द्र शा.उ.मा.वि. मोहनगढ़ के प्राथमिक शिक्षक श्री सुमनलाल वंशकार को कभी कभी शराब के नशे में स्कूल आने और स्कूल के शिक्षण समय में बच्चों के बीच कुर्सी पर सोने के आरोपों पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया था। श्री सुमन लाल वंशकार का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह स्कूल के शिक्षण समय में बच्चों के बीच कुर्सी पर सो रहे थे। उक्त आरोपों के आधार पर श्री सुमनलाल वंशकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनपर विभागीय जांच के निर्देश दिए गए। विभागीय जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन एवं परीक्षण में शासकीय सेवक श्री सुमनलाल वंशकार पर लगे आरोप प्रमाणित पाए गए। प्रकरण में दोष सिद्ध होने पर सक्षम प्राधिकारी ने श्री सुमनलाल वंशकार को निलंबन से बहाल करते हुए पुनः शा.प्रा.शा. पड़वार में पदस्थ किया जाकर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत तीन वार्षिक वेतनवृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोके जाने का दंड अधिरोपित किया गया है। साथ ही निलंबन अवधि को कार्य नहीं, वेतन नहीं के सिद्धांत के आधार पर केवल जीवन निर्वाह भत्ते तक सीमित रखने का निर्णय लिया गया है।
प्रशासन की सख्त चेतावनी
कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा विभाग में किसी भी तरह की लापरवाही या अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिक्षकों को बच्चों के लिए रोल मॉडल होना चाहिए और उनके आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह कार्रवाई अन्य शिक्षकों के लिए भी एक चेतावनी है कि वे अपने आचरण और कर्तव्यों के प्रति सतर्क रहें। शिक्षकों को बच्चों और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए और एक सकारात्मक उदाहरण पेश करना चाहिए।
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