
लोकतंत्र बचाने की पदयात्रा में ही उठे सवाल! पोस्टर देखकर भड़के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंच से बोले- 'इतने जूते खाने के बाद भी आ गया!'
📍 इंदौर, मध्य प्रदेश।
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। इंदौर में भाजपा की ओर से निकाली गई 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के दौरान ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दरअसल, भाजपा की इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। लेकिन कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडे एक पोस्टर लेकर पहुंच गए। पोस्टर पर लिखा था- '30 हजार का बल्ब और 33 हजार लीटर फिनाइल।' पोस्टर के जरिए सार्वजनिक खरीद और खर्च को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।जैसे ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की नजर पोस्टर पर पड़ी, वे नाराज हो गए। उन्होंने मंच से ही पुलिस अधिकारियों को बुलाते हुए संबंधित व्यक्ति को वहां से हटाने और कुछ देर के लिए गाड़ी में बैठाने के निर्देश दिए। इसी दौरान मंत्री ने सामाजिक कार्यकर्ता के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा- 'इतने जूते खाने के बाद भी आ गया।' इसके बाद पुलिसकर्मी सामाजिक कार्यकर्ता को कार्यक्रम स्थल से ले गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रहलाद पांडे इससे पहले भी स्थानीय मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं। एक तरफ भाजपा लोकतंत्र बचाने और अराजकता हटाने का संदेश दे रही थी, तो दूसरी तरफ उसी कार्यक्रम में एक व्यक्ति के पोस्टर के जरिए सवाल उठाने पर इतना विवाद क्यों हुआ? क्या सार्वजनिक कार्यक्रमों में सवाल पूछना और विरोध दर्ज कराना लोकतांत्रिक अधिकार नहीं है? क्या किसी जनप्रतिनिधि को ऐसे सवालों का जवाब देना चाहिए या सवाल उठाने वाले को कार्यक्रम से हटाना चाहिए?
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Mauganj, Rewa | Oct 30, 2026