
बलरामपुर।तहसील सदर व ब्लॉक सदर के सरयू नहर के महादेव मिश्र लुचईया गांव के पास नहर के बांध की सुरक्षा के लिए लाखों रुपये की लागत से बोल्डर पिचिंग का कार्य कराया गया था। निर्माण कार्य का उद्देश्य बरसात एवं नहर में पानी आने के दौरान बांध को कटान से सुरक्षित रखना था। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के बावजूद बांध पर कटान की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कटान रोकने के लिए मानक के अनुरूप एवं गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कार्य कराने के बजाय ठेकेदार द्वारा हरे-भरे पेड़ों की कटाई कराकर उनके सहारे बांध को रोकने का प्रयास किया जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी धन के सदुपयोग, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण के तहत करोड़ों पौधे लगाने और हरित आवरण बढ़ाने के लिए अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर यदि सरकारी निर्माण कार्य के दौरान हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कराना आवश्यक है। इससे सरकार की पर्यावरण संरक्षण संबंधी मंशा भी प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग पूरे बोल्डर पिचिंग कार्य की तकनीकी गुणवत्ता, निर्माण मानकों, बांध पर हो रहे कटान तथा पेड़ों की कटाई के आरोपों की उच्चस्तरीय जांच कराएं। यदि जांच में कार्य में लापरवाही, मानकों की अनदेखी अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके और भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।
नोट: खबर लिखे जाने तक इस मामले में संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों एवं ठेकेदार का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होते ही उसे भी निष्पक्ष रूप से समाचार में प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।