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लोकसभा में गूंजी बालाघाट-सिवनी के किसानों की आवाज, सांसद भारती पारधी ने उठाई जल संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं की मांग
लोकसभा के मानसून सत्र में नियम 377 के अंतर्गत बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र की सांसद भारती पारधी ने क्षेत्र के किसानों से जुड़े जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और वाटरशेड विकास परियोजनाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से बालाघाट-सिवनी में नई वाटरशेड परियोजनाओं को स्वीकृति देने तथा वर्ष 2013-14 में परसवाड़ा में बंद हुई वाटरशेड परियोजना को पुनः शुरू करने की मांग की।
लोकसभा में प्रस्तुत अपने वक्तव्य में सांसद ने कहा कि बालाघाट और सिवनी कृषि प्रधान जिले हैं, जहां अधिकांश किसान वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। अनियमित वर्षा, गिरते भू-जल स्तर और सीमित सिंचाई संसाधनों के कारण किसानों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र का बड़ा हिस्सा एक फसलीय होने से किसानों की आय भी प्रभावित होती है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 (PMKSY-WDC) जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और सिंचाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, लेकिन बालाघाट-सिवनी जैसे जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र को अब तक नई वाटरशेड परियोजनाओं का लाभ नहीं मिल पाया है।
सांसद भारती पारधी ने मांग की कि क्षेत्र में नई वाटरशेड परियोजनाओं को शीघ्र मंजूरी दी जाए तथा परसवाड़ा की बंद परियोजना को दोबारा प्रारंभ किया जाए। उनका कहना था कि इससे वर्षा जल संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार, सिंचाई का विस्तार, कृषि उत्पादन में वृद्धि और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वह लगातार संसद में बालाघाट-सिवनी क्षेत्र के किसानों, रेलवे, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही हैं। नियम 377 के अंतर्गत इस विषय का चयन होना क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
नियम 377 के तहत मिला स्थान
लोकसभा के नियम 377 के तहत सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र या राष्ट्रीय महत्व के जनहित के विषय सदन के समक्ष रखने का अवसर मिलता है। प्रत्येक बैठक के लिए प्राप्त प्रस्तावों में से सीमित विषयों का ही चयन किया जाता है। इस बैठक के लिए चयनित 30 विषयों में सांसद भारती पारधी का प्रस्ताव चौथे क्रम पर शामिल किया गया, जिसे उनकी सक्रिय संसदीय भूमिका और जनहित के मुद्दों के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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