एक पिता को अपने ही बेटे की पहचान साबित करने के लिए महीनों संघर्ष करना पड़ा!
उत्तर प्रदेश के बलिया के अखिलेश मिश्रा का 12 वर्षीय बेटा रजत 13 मई 2025 को लापता हो गया था। दो दिन बाद घाघरा नदी किनारे मिले एक अज्ञात शव को पिता ने अपने बेटे का बताया, लेकिन पुलिस ने उसे रजत का मानने से इनकार कर दिया और लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कर दिया।
पिता ने हार नहीं मानी। महीनों तक अधिकारियों के चक्कर काटे और DNA जांच की मांग करते रहे। आखिरकार DNA रिपोर्ट में शव की पहचान रजत के रूप में होने की बात सामने आई।
अब एक बेबस पिता ने बेटे के कपड़ों से पुतला बनाकर उसका अंतिम संस्कार किया और अंतिम विदाई दी। सोचिए,जिस पिता ने अपने बेटे को खोया,उसे उसकी पहचान साबित करने के लिए भी महीनों संघर्ष करना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल—जब परिवार शुरुआत से पहचान का दावा कर रहा था, तो आखिर जांच में इतनी देर क्यों हुई? इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी है?
एक पिता को अब सिर्फ बेटे का दुख नहीं, बल्कि जवाब का भी इंतजार है।
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