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किशनगंज,रात में भी जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध होना हर गर्भवती महिला का अधिकार किशनगंज जिला अन्तर्गत प्रसव केवल एक सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि ऐसा समय होता है जब कुछ मिनटों का निर्णय मां और नवजात दोनों के जीवन को सुरक्षित या संकटग्रस्त बना सकता है। जब प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, प्रसव में रुकावट, गर्भस्थ शिशु की असामान्य स्थिति या उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताएं सामने आती हैं, तब तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी विकल्प होता है। यदि ऐसे समय में अस्पताल में चौबीसों घंटे सिजेरियन सुविधा उपलब्ध न हो और गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़े, तो उपचार में होने वाली देरी मातृ एवं नवजात मृत्यु का कारण बन सकती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) और जिला अस्पतालों में 24×7 जीवनरक्षक सिजेरियन सेवाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दे रहा है। इसका उद्देश्य केवल ऑपरेशन की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी महिला की जान न जाए।किशनगंज सदर अस्पताल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है, जहां चौबीसों घंटे उपलब्ध आपातकालीन प्रसूति सेवाओं ने न केवल जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया है, बल्कि अनावश्यक रेफरल में भी उल्लेखनीय कमी लाई है। इससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। जब रात में ही करनी पड़ी सिजेरियन, समय पर उपचार ने बचाई दो जिंदगियां कोचाधामन प्रखंड की रहने वाली नाजिया खातून को देर रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार उन्हें तत्काल सदर अस्पताल लेकर पहुंचा। जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि सामान्य प्रसव संभव नहीं है और मां तथा बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन करना आवश्यक है। नाजिया याद करते हुए कहती हैं की हमें सबसे ज्यादा डर इस बात का था कि कहीं रात होने के कारण हमें दूसरे अस्पताल न भेज दिया जाए। हमारे पास निजी अस्पताल जाने के पैसे भी नहीं थे। लेकिन डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी। कुछ ही समय में मेरा सफल सिजेरियन हुआ और मेरा बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ। अगर उस रात हमें रेफर कर दिया जाता, तो रास्ते में क्या होता, इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज मैं हर गर्भवती महिला से कहती हूं कि समय पर अस्पताल पहुंचना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करना सबसे बड़ा निर्णय है। उनके पति ने भी बताया कि निःशुल्क ऑपरेशन, दवा, जांच और भर्ती की सुविधा ने आर्थिक संकट के बीच उनके परिवार को बड़ी राहत दी। समय पर सिजेरियन कई मामलों में जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर होता है स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शबनम यास्मीन ने कहा कि प्रसव संबंधी कई जटिलताओं में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि सिजेरियन में अनावश्यक विलंब होता है, तो मां और नवजात दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।उन्होंने कहा की हमारा प्रयास है कि कोई भी गर्भवती महिला केवल इसलिए जोखिम में न पड़े कि रात के समय जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं थी। जिला अस्पताल और एफआरयू स्तर पर चौबीसों घंटे सिजेरियन सेवाएं उपलब्ध होने से अनावश्यक रेफरल कम होते हैं, उपचार समय पर शुरू होता है और मातृ एवं नवजात मृत्यु की संभावना में कमी आती है। सुरक्षित मातृत्व हर महिला का अधिकार है, सुविधा नहीं।उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रशिक्षित प्रसूति विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, ब्लड बैंक, नवजात शिशु देखभाल इकाई, ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता जटिल मामलों के त्वरित प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मजबूत एफआरयू प्रणाली से बदलेगी मातृ स्वास्थ्य की तस्वीर सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल संस्थागत प्रसव बढ़ाना ही नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर जटिल गर्भावस्था में समय पर आपातकालीन प्रसूति सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने आगे कहा की एफआरयू और जिला अस्पतालों में 24×7 सिजेरियन सेवाओं को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में भेजने की आवश्यकता कम होती है। इससे उपचार में होने वाली देरी रुकती है और कई मामलों में मां तथा नवजात दोनों की जान बचाई जा सकती है। हमारा स्पष्ट संदेश है कि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी महिला की जान नहीं जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निःशुल्क सिजेरियन, दवा, जांच और विशेषज्ञ देखभाल यह सुनिश्चित करती है कि गरीबी किसी महिला के सुरक्षित मातृत्व में बाधा न बने। सुरक्षित मातृत्व की दिशा में मजबूत कदम सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया कि मातृ मृत्यु के अधिकांश कारणों को समय पर पहचान और त्वरित आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के माध्यम से रोका जा सकता है। जिला अस्पतालों और एफआरयू में चौबीसों घंटे जीवनरक्षक सिजेरियन सेवाओं की उपलब्धता इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। किशनगंज में मजबूत होती यह व्यवस्था स्पष्ट संदेश देती है कि सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य सेवा का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक महिला का अधिकार है। जब उपचार समय पर मिलता है, रेफरल कम होते हैं और सेवाएं दिन-रात उपलब्ध रहती हैं, तभी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कोई भी महिला केवल इसलिए अपनी जान न गंवाए क्योंकि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं थी।यह संस्करण नीति, जनस्वास्थ्य और मानवीय कहानी—तीनों का संतुलन रखता है और राष्ट्रीय स्तर के समाचार-पत्रों की शैली के अधिक निकट है। District Kishanganj Bihar Health Department Dilip Jaiswal Kishanganj Police Bihar Education Department JEEVIKA Bihar Nitish Kumar BJP Bihar

Terhagachh, Kishanganj | Jul 15, 2026

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किशनगंज जिला अन्तर्गत आज दिनांक 17 जुलाई 2026 को अपर समाहर्ता- सह- वरीय पदाधिकारी जिला जनगणना कोषांग,द्वारा भारत की जनगणना-2027 के सफल आयोजन के उद्देश्य से जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (District Census Handbook) से संबंधित डेटा संग्रहण कार्य हेतु पोठिया प्रखंड के 37 नामित क्षेत्र पदाधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अपर समाहर्ता महोदय ने कहा कि जनगणना-2027 देश की एक महत्वपूर्ण एवं व्यापक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसके लिए सटीक एवं गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों का संकलन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी नामित क्षेत्र पदाधिकारियों को प्रशिक्षण में प्राप्त दिशा-निर्देशों का गंभीरतापूर्वक पालन करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर त्रुटिरहित एवं प्रमाणिक जानकारी संकलित करने का निर्देश दिया।

प्रशिक्षण में जिला जनगणना हस्तपुस्तिका के लिए आवश्यक विभिन्न प्रकार के आंकड़ों के संग्रहण, सत्यापन, अभिलेखीकरण तथा प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही संबंधित प्रपत्रों को सही ढंग से भरने, विभागीय समन्वय स्थापित करने तथा डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में भी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

मास्टर प्रशिक्षक‌ द्वारा बताया कि जिला जनगणना हस्तपुस्तिका‌ के दो भाग‌ हैं- ग्राम निर्देशिका/नगर निर्देशिका एवं प्राथमिक जनगणना सार।ग्राम निर्देशिका/नगर निर्देशिका  के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, पेयजल एवं स्वच्छता, बैंकिंग, संचार, विद्युत, भूमि उपयोग,सिंचाई प्रमुख कृषि उत्पाद, विनिर्माण/हस्तशिल्प , नागरिक सुविधाएं तथा मलिनबस्ती  आदि संबंधित डाटा का संग्रहण संदर्भ तिथि 31/12/2025 के आधार पर किया जायेगा।

अपर समाहर्ता ने सभी संबंधित पदाधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ करेंगे, ताकि भारत की जनगणना-2027 के सफल आयोजन में जिला किशनगंज की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, जनगणना कार्य निदेशालय मास्टर ट्रेनर , पोठिया प्रखंड के नामित क्षेत्र पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे।
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किशनगंज जिला अन्तर्गत आज दिनांक 17 जुलाई 2026 को अपर समाहर्ता- सह- वरीय पदाधिकारी जिला जनगणना कोषांग,द्वारा भारत की जनगणना-2027 के सफल आयोजन के उद्देश्य से जिला जनगणना हस्तपुस्तिका (District Census Handbook) से संबंधित डेटा संग्रहण कार्य हेतु पोठिया प्रखंड के 37 नामित क्षेत्र पदाधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया । प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अपर समाहर्ता महोदय ने कहा कि जनगणना-2027 देश की एक महत्वपूर्ण एवं व्यापक सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसके लिए सटीक एवं गुणवत्तापूर्ण आंकड़ों का संकलन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी नामित क्षेत्र पदाधिकारियों को प्रशिक्षण में प्राप्त दिशा-निर्देशों का गंभीरतापूर्वक पालन करते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर त्रुटिरहित एवं प्रमाणिक जानकारी संकलित करने का निर्देश दिया। प्रशिक्षण में जिला जनगणना हस्तपुस्तिका के लिए आवश्यक विभिन्न प्रकार के आंकड़ों के संग्रहण, सत्यापन, अभिलेखीकरण तथा प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही संबंधित प्रपत्रों को सही ढंग से भरने, विभागीय समन्वय स्थापित करने तथा डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के संबंध में भी आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया। मास्टर प्रशिक्षक‌ द्वारा बताया कि जिला जनगणना हस्तपुस्तिका‌ के दो भाग‌ हैं- ग्राम निर्देशिका/नगर निर्देशिका एवं प्राथमिक जनगणना सार।ग्राम निर्देशिका/नगर निर्देशिका के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, पेयजल एवं स्वच्छता, बैंकिंग, संचार, विद्युत, भूमि उपयोग,सिंचाई प्रमुख कृषि उत्पाद, विनिर्माण/हस्तशिल्प , नागरिक सुविधाएं तथा मलिनबस्ती आदि संबंधित डाटा का संग्रहण संदर्भ तिथि 31/12/2025 के आधार पर किया जायेगा। अपर समाहर्ता ने सभी संबंधित पदाधिकारियों से अपेक्षा की कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा एवं जिम्मेदारी के साथ करेंगे, ताकि भारत की जनगणना-2027 के सफल आयोजन में जिला किशनगंज की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित हो सके। इस अवसर पर जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, जनगणना कार्य निदेशालय मास्टर ट्रेनर , पोठिया प्रखंड के नामित क्षेत्र पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित रहे। #viralpost #viralreelschallenge #viralreels #Viajes #newyork #BreakingNews #2026Goals

Terhagachh, Kishanganj | Jul 17, 2026

टेढ़ागाछ प्रखंड में बीमार वृद्धा महिला को कुर्सी पर बैठाकर कीचड़ भरे सड़क से अस्पताल पहुंचाया, तस्वीर विकास की पोल खोल दी,

किशनगंज जिला के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या-5 स्थित कास्त खर्रा गांव में बदहाल सड़क व्यवस्था ने एक बार फिर सरकार की विकास दावों की पोल खोल दी। प्रखंड क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद कच्ची सड़क जलमग्न और कीचड़ में तब्दील हो गई, जिसके कारण आज दिनांक 17-07-2026 को बीमार वृद्धा महिला अलेतून निशा को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया। गांव तक कोई वाहन नहीं पहुंच सका, जिसके कारण कुछ ग्रामीणों ने मानवता का परिचय देते हुए वृद्धा को कुर्सी पर बैठाकर बांस के बल्लों के सहारे कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से टेंपो के माध्यम से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क और नाला निर्माण की मांग के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। न शासन न प्रशासन 
District Kishanganj Kishanganj Police Bihar Health Department Bihar Education Department Dilip Jaiswal BJP Bihar Nitish Kumar Parwez Aalm

टेढ़ागाछ प्रखंड में बीमार वृद्धा महिला को कुर्सी पर बैठाकर कीचड़ भरे सड़क से अस्पताल पहुंचाया, तस्वीर विकास की पोल खोल दी, किशनगंज जिला के टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत के वार्ड संख्या-5 स्थित कास्त खर्रा गांव में बदहाल सड़क व्यवस्था ने एक बार फिर सरकार की विकास दावों की पोल खोल दी। प्रखंड क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद कच्ची सड़क जलमग्न और कीचड़ में तब्दील हो गई, जिसके कारण आज दिनांक 17-07-2026 को बीमार वृद्धा महिला अलेतून निशा को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो गया। गांव तक कोई वाहन नहीं पहुंच सका, जिसके कारण कुछ ग्रामीणों ने मानवता का परिचय देते हुए वृद्धा को कुर्सी पर बैठाकर बांस के बल्लों के सहारे कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से टेंपो के माध्यम से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, टेढ़ागाछ ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क और नाला निर्माण की मांग के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। न शासन न प्रशासन District Kishanganj Kishanganj Police Bihar Health Department Bihar Education Department Dilip Jaiswal BJP Bihar Nitish Kumar Parwez Aalm

Terhagachh, Kishanganj | Jul 17, 2026

किशनगंज,मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी परिवार नियोजन सेवाएं बनीं सुरक्षित भविष्य की आधारशिला

किशनगंज,सीमावर्ती जिला किशनगंज में बढ़ती जनसंख्या, उच्च प्रजनन दर और सीमित संसाधनों के बीच परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। सिविल सर्जन ने कहा कि जब परिवार नियोजन सेवाओं को सुरक्षित मातृत्व सेवाओं के साथ जोड़ा जाता है, तब माताओं और बच्चों दोनों के स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं। इसी सोच को व्यवहार में उतारने के उद्देश्य से विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के अंतर्गत ठाकुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में परिवार नियोजन मेले का आयोजन किया गया। मेले में योग्य दंपतियों को विभिन्न गर्भनिरोधक साधनों की जानकारी, चिकित्सकीय परामर्श तथा निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 11 जुलाई से 31 जुलाई तक जिले के सभी प्रखंडों में इसी प्रकार के परिवार नियोजन मेलों एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
सुरक्षित मातृत्व और परिवार नियोजन का समन्वय देगा बेहतर स्वास्थ्य परिणाम
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि परिवार नियोजन को केवल जनसंख्या नियंत्रण के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। इसे सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ बचपन और परिवार के समग्र विकास से जोड़कर समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गर्भधारण के बीच उचित अंतर रखने से मातृ मृत्यु, नवजात मृत्यु, कुपोषण और जटिल प्रसव जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। जब परिवार नियोजन सेवाओं का मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के साथ प्रभावी समन्वय होता है, तब मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों, धार्मिक नेताओं और मीडिया से इस अभियान को सामाजिक जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की।
सीमावर्ती जिले में पुरुष सहभागिता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिले में स्वास्थ्य संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए परिवार नियोजन की स्वीकार्यता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पुरुषों को भी समान भागीदारी निभानी होगी। पुरुष नसबंदी सुरक्षित, सरल और प्रभावी प्रक्रिया है, लेकिन सामाजिक भ्रांतियों के कारण इसकी स्वीकार्यता अभी भी अपेक्षाकृत कम है। यदि पुरुष आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाएं तो महिलाओं पर अनावश्यक स्वास्थ्य जोखिम कम होंगे तथा पूरे परिवार का स्वास्थ्य स्तर बेहतर होगा।
प्रसवोत्तर परामर्श से बढ़ रही परिवार नियोजन सेवाओं की स्वीकार्यता
ठाकुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. टी. एन. रजक ने कहा कि परिवार नियोजन सेवाओं को प्रसवपूर्व जांच, संस्थागत प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल के साथ जोड़ने से बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। अस्पताल आने वाली प्रत्येक योग्य महिला और दंपति को चिकित्सकीय परामर्श देकर उनकी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त परिवार नियोजन साधनों की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि दो बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रखने से महिलाओं को शारीरिक रूप से स्वस्थ होने का समय मिलता है तथा नवजात शिशु का पोषण और विकास भी बेहतर होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भ्रांतियों से दूर रहकर वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लें।
जिले के सभी प्रखंडों में चल रहा विशेष परिवार नियोजन अभियान
जिला योजना समन्वयक विस्वजित कुमार ने बताया की 11 जुलाई से 31 जुलाई तक विशेष परिवार नियोजन पखवाड़ा के दौरान जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में परिवार नियोजन मेले, परामर्श शिविर और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। योग्य दंपतियों को पुरुष नसबंदी, महिला बंध्याकरण, अंतरा इंजेक्शन, कॉपर-टी, गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम सहित विभिन्न अस्थायी एवं स्थायी साधनों की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही पात्र लाभार्थियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि परिवार नियोजन किसी प्रकार का दबाव नहीं, बल्कि प्रत्येक दंपति का स्वैच्छिक, अधिकार-आधारित और वैज्ञानिक निर्णय है। छोटा एवं संतुलित परिवार न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाता है, बल्कि शिक्षा, पोषण, रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक परिवर्तन लाता है। विभाग ने सभी योग्य दंपतियों से अपील की है कि वे अपने निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान अथवा आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पहुंचकर निःशुल्क परामर्श एवं परिवार नियोजन सेवाओं का लाभ उठाएं और एक स्वस्थ, सशक्त तथा समृद्ध समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। District Kishanganj Bihar Health Department Kishanganj Police Bihar Education Department Dilip Jaiswal BJP Bihar Nitish Kumar

किशनगंज,मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी परिवार नियोजन सेवाएं बनीं सुरक्षित भविष्य की आधारशिला किशनगंज,सीमावर्ती जिला किशनगंज में बढ़ती जनसंख्या, उच्च प्रजनन दर और सीमित संसाधनों के बीच परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक स्थिरता और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। सिविल सर्जन ने कहा कि जब परिवार नियोजन सेवाओं को सुरक्षित मातृत्व सेवाओं के साथ जोड़ा जाता है, तब माताओं और बच्चों दोनों के स्वास्थ्य परिणाम बेहतर होते हैं। इसी सोच को व्यवहार में उतारने के उद्देश्य से विश्व जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा के अंतर्गत ठाकुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में परिवार नियोजन मेले का आयोजन किया गया। मेले में योग्य दंपतियों को विभिन्न गर्भनिरोधक साधनों की जानकारी, चिकित्सकीय परामर्श तथा निःशुल्क सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 11 जुलाई से 31 जुलाई तक जिले के सभी प्रखंडों में इसी प्रकार के परिवार नियोजन मेलों एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। सुरक्षित मातृत्व और परिवार नियोजन का समन्वय देगा बेहतर स्वास्थ्य परिणाम जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि परिवार नियोजन को केवल जनसंख्या नियंत्रण के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। इसे सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ बचपन और परिवार के समग्र विकास से जोड़कर समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गर्भधारण के बीच उचित अंतर रखने से मातृ मृत्यु, नवजात मृत्यु, कुपोषण और जटिल प्रसव जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। जब परिवार नियोजन सेवाओं का मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के साथ प्रभावी समन्वय होता है, तब मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, स्वयं सहायता समूहों, जनप्रतिनिधियों, धार्मिक नेताओं और मीडिया से इस अभियान को सामाजिक जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की। सीमावर्ती जिले में पुरुष सहभागिता बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिले में स्वास्थ्य संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए परिवार नियोजन की स्वीकार्यता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन की जिम्मेदारी केवल महिलाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पुरुषों को भी समान भागीदारी निभानी होगी। पुरुष नसबंदी सुरक्षित, सरल और प्रभावी प्रक्रिया है, लेकिन सामाजिक भ्रांतियों के कारण इसकी स्वीकार्यता अभी भी अपेक्षाकृत कम है। यदि पुरुष आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाएं तो महिलाओं पर अनावश्यक स्वास्थ्य जोखिम कम होंगे तथा पूरे परिवार का स्वास्थ्य स्तर बेहतर होगा। प्रसवोत्तर परामर्श से बढ़ रही परिवार नियोजन सेवाओं की स्वीकार्यता ठाकुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. टी. एन. रजक ने कहा कि परिवार नियोजन सेवाओं को प्रसवपूर्व जांच, संस्थागत प्रसव तथा प्रसवोत्तर देखभाल के साथ जोड़ने से बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। अस्पताल आने वाली प्रत्येक योग्य महिला और दंपति को चिकित्सकीय परामर्श देकर उनकी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त परिवार नियोजन साधनों की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि दो बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रखने से महिलाओं को शारीरिक रूप से स्वस्थ होने का समय मिलता है तथा नवजात शिशु का पोषण और विकास भी बेहतर होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे भ्रांतियों से दूर रहकर वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर निर्णय लें। जिले के सभी प्रखंडों में चल रहा विशेष परिवार नियोजन अभियान जिला योजना समन्वयक विस्वजित कुमार ने बताया की 11 जुलाई से 31 जुलाई तक विशेष परिवार नियोजन पखवाड़ा के दौरान जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में परिवार नियोजन मेले, परामर्श शिविर और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। योग्य दंपतियों को पुरुष नसबंदी, महिला बंध्याकरण, अंतरा इंजेक्शन, कॉपर-टी, गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम सहित विभिन्न अस्थायी एवं स्थायी साधनों की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही पात्र लाभार्थियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने कहा कि परिवार नियोजन किसी प्रकार का दबाव नहीं, बल्कि प्रत्येक दंपति का स्वैच्छिक, अधिकार-आधारित और वैज्ञानिक निर्णय है। छोटा एवं संतुलित परिवार न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाता है, बल्कि शिक्षा, पोषण, रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक परिवर्तन लाता है। विभाग ने सभी योग्य दंपतियों से अपील की है कि वे अपने निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान अथवा आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पहुंचकर निःशुल्क परामर्श एवं परिवार नियोजन सेवाओं का लाभ उठाएं और एक स्वस्थ, सशक्त तथा समृद्ध समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। District Kishanganj Bihar Health Department Kishanganj Police Bihar Education Department Dilip Jaiswal BJP Bihar Nitish Kumar

Terhagachh, Kishanganj | Jul 16, 2026

प्रशांत किशोर ने बंटी यादव हत्याकांड में पीड़ित परिवार से की मुलाकात, दोषियों और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग

पटना। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर उपचुनाव में प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने गुरुवार को पटना के न्यू करबिगहिया निवासी बंटी कुमार यादव की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की।

मीडिया से बातचीत करते हुए पीके ने कहा कि चार-पांच दिन पहले मैं यहां आया था, तब परिवार के लोग धरने पर बैठे थे। वहां पुलिस प्रशासन भी था। जब पुलिस ने और हमने परिवार से यह कहा कि पुलिस को कार्रवाई करने दीजिए। पुलिस ने आश्वस्त किया कि 2 दिन के अंदर लड़के को ढूंढकर ला दिया जाएगा। इसके बाद परिवार ने बिना किसी परेशानी के अपना धरना-प्रदर्शन बंद कर दिया। उन्होंने पुलिस की बात मानकर जो रोड जाम किया हुआ था, वह लोग वहां से हट गए। उसके बाद वे लोग कोतवाली गए। फिर शाम में मुझसे मुलाकात हुई, तो परिवार ने बताया कि कोतवाली थाना की पुलिस हमारे साथ सहयोग नहीं कर रही है। पूरे दिन पीड़ित की मां, उनके भाई और उनके परिजन थाने में बैठे रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की। उसी दिन रात में 10 बजे इनकी मुझसे मुलाकात हुई। मैंने फिर इनसे बात की और पुलिस ने यह आश्वस्त किया कि 2 दिन के अंदर हर हाल में बंटी यादव को ढूंढ लिया जाएगा।

पीके ने कहा कि चार दिन के बाद अब हम लोग सुन रहे हैं कि उस बच्चे की लाश मिली है। पीड़ित के परिजन तीन बातें कह रहे हैं। उनकी पहली मांग है कि इसमें जो भी शामिल लोग हैं, उनके खिलाफ नामजद एफआईआर किया गया है, उनकी अभिलंब गिरफ्तारी की जाए और कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दी जाए।

दूसरी मांग यह है कि जो पुलिस इसमें इन्वॉल्व रही है, पुलिस वालों की जो भूमिका है, चाहे वह कोतवाली थाना के हों या जक्कनपुर थाना के, इन्वॉल्व पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि पुलिस को ऐसा लगता है कि घटना हो गई, अपराधी पकड़ा जाए या न पकड़ा जाए, परिवार वालों को जो दिक्कत हो, हो; पुलिस का अपना जीवन चल रहा है। हर हालत में दोनों ही थानों से संबंधित पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

तीसरी मांग यह है कि यह बहुत साधारण परिवार के लोग हैं। उनकी पत्नी को या उनके घर में जो भी योग्य हों, सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाना चाहिए और नौकरी दी जानी चाहिए।

*सरकार के आपराधिक चरित्र के कारण हो रही घटनाएं- पीके*

पीके ने कहा कि यह घटना जो हुई है, इसमें कहीं न कहीं सरकार का जो आपराधिक चरित्र है कि जाति देखकर गोली मारो, गमछा देखकर गोली मारो और धर्म देखकर गोली मारो। जब सरकार का मुखिया ही इस तरीके के शब्दों का प्रयोग करेगा, तो आप इस तरह के अपराध को बढ़ते हुए ही देखेंगे। पुलिस का जो रवैया है, किसी की मौत के बाद यह बताना कि वह शराब का काम करता था, यह सरासर गलत और नाइंसाफी है। अगर वह व्यक्ति गलत था, तो उसको गिरफ्तार करना था। 

अगर पुलिस की बात मान भी लें कि बंटी शराब के धंधे में इन्वॉल्व था, तो उसके ऊपर कोई केस क्यों नहीं था? उस हालत में भी यहां के पुलिस पदाधिकारी सब सस्पेंड होने चाहिए। कैसे उनके थाना क्षेत्र के अंतर्गत कोई व्यक्ति शराब का धंधा कर रहा था? पीके ने कहा कि स्थानीय लोग बता रहे हैं कि इस पूरे इलाके में जो भी गलत काम हो रहे हैं, वे बिना पुलिस की मिलीभगत के संभव नहीं हैं। पुलिस अपनी जान बचाने के लिए मरे हुए व्यक्ति के चरित्र पर सवाल उठा रही है, जो सरासर गलत है।

अगर उस आदमी के खिलाफ पहले से कोई केस दर्ज नहीं है, तो पुलिस को कोई अधिकार नहीं है यह कहने का कि वह आदमी गलत था। अगर वह आदमी गलत था, तो पहले पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? पहले उस पर एफआईआर क्यों नहीं की? इसका मतलब है कि उस लड़के पर कम से कम कानून के तहत कोई ऐसा अपराध नहीं था। पुलिस की गलती से उसकी हत्या हुई है। पुलिस को जवाबदेही लेनी चाहिए। सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। हर हालत में अपराधियों को सजा होनी चाहिए और पुलिस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
#viralpost #viralreelschallenge #viralreels #venezuela #newyork #2026Goals #PK

प्रशांत किशोर ने बंटी यादव हत्याकांड में पीड़ित परिवार से की मुलाकात, दोषियों और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग पटना। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार और बांकीपुर उपचुनाव में प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने गुरुवार को पटना के न्यू करबिगहिया निवासी बंटी कुमार यादव की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को सांत्वना दी। उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। मीडिया से बातचीत करते हुए पीके ने कहा कि चार-पांच दिन पहले मैं यहां आया था, तब परिवार के लोग धरने पर बैठे थे। वहां पुलिस प्रशासन भी था। जब पुलिस ने और हमने परिवार से यह कहा कि पुलिस को कार्रवाई करने दीजिए। पुलिस ने आश्वस्त किया कि 2 दिन के अंदर लड़के को ढूंढकर ला दिया जाएगा। इसके बाद परिवार ने बिना किसी परेशानी के अपना धरना-प्रदर्शन बंद कर दिया। उन्होंने पुलिस की बात मानकर जो रोड जाम किया हुआ था, वह लोग वहां से हट गए। उसके बाद वे लोग कोतवाली गए। फिर शाम में मुझसे मुलाकात हुई, तो परिवार ने बताया कि कोतवाली थाना की पुलिस हमारे साथ सहयोग नहीं कर रही है। पूरे दिन पीड़ित की मां, उनके भाई और उनके परिजन थाने में बैठे रहे, लेकिन पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की। उसी दिन रात में 10 बजे इनकी मुझसे मुलाकात हुई। मैंने फिर इनसे बात की और पुलिस ने यह आश्वस्त किया कि 2 दिन के अंदर हर हाल में बंटी यादव को ढूंढ लिया जाएगा। पीके ने कहा कि चार दिन के बाद अब हम लोग सुन रहे हैं कि उस बच्चे की लाश मिली है। पीड़ित के परिजन तीन बातें कह रहे हैं। उनकी पहली मांग है कि इसमें जो भी शामिल लोग हैं, उनके खिलाफ नामजद एफआईआर किया गया है, उनकी अभिलंब गिरफ्तारी की जाए और कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दी जाए। दूसरी मांग यह है कि जो पुलिस इसमें इन्वॉल्व रही है, पुलिस वालों की जो भूमिका है, चाहे वह कोतवाली थाना के हों या जक्कनपुर थाना के, इन्वॉल्व पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि पुलिस को ऐसा लगता है कि घटना हो गई, अपराधी पकड़ा जाए या न पकड़ा जाए, परिवार वालों को जो दिक्कत हो, हो; पुलिस का अपना जीवन चल रहा है। हर हालत में दोनों ही थानों से संबंधित पुलिस पदाधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। तीसरी मांग यह है कि यह बहुत साधारण परिवार के लोग हैं। उनकी पत्नी को या उनके घर में जो भी योग्य हों, सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाना चाहिए और नौकरी दी जानी चाहिए। *सरकार के आपराधिक चरित्र के कारण हो रही घटनाएं- पीके* पीके ने कहा कि यह घटना जो हुई है, इसमें कहीं न कहीं सरकार का जो आपराधिक चरित्र है कि जाति देखकर गोली मारो, गमछा देखकर गोली मारो और धर्म देखकर गोली मारो। जब सरकार का मुखिया ही इस तरीके के शब्दों का प्रयोग करेगा, तो आप इस तरह के अपराध को बढ़ते हुए ही देखेंगे। पुलिस का जो रवैया है, किसी की मौत के बाद यह बताना कि वह शराब का काम करता था, यह सरासर गलत और नाइंसाफी है। अगर वह व्यक्ति गलत था, तो उसको गिरफ्तार करना था। अगर पुलिस की बात मान भी लें कि बंटी शराब के धंधे में इन्वॉल्व था, तो उसके ऊपर कोई केस क्यों नहीं था? उस हालत में भी यहां के पुलिस पदाधिकारी सब सस्पेंड होने चाहिए। कैसे उनके थाना क्षेत्र के अंतर्गत कोई व्यक्ति शराब का धंधा कर रहा था? पीके ने कहा कि स्थानीय लोग बता रहे हैं कि इस पूरे इलाके में जो भी गलत काम हो रहे हैं, वे बिना पुलिस की मिलीभगत के संभव नहीं हैं। पुलिस अपनी जान बचाने के लिए मरे हुए व्यक्ति के चरित्र पर सवाल उठा रही है, जो सरासर गलत है। अगर उस आदमी के खिलाफ पहले से कोई केस दर्ज नहीं है, तो पुलिस को कोई अधिकार नहीं है यह कहने का कि वह आदमी गलत था। अगर वह आदमी गलत था, तो पहले पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की? पहले उस पर एफआईआर क्यों नहीं की? इसका मतलब है कि उस लड़के पर कम से कम कानून के तहत कोई ऐसा अपराध नहीं था। पुलिस की गलती से उसकी हत्या हुई है। पुलिस को जवाबदेही लेनी चाहिए। सरकार को अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। हर हालत में अपराधियों को सजा होनी चाहिए और पुलिस पर कार्रवाई होनी चाहिए। #viralpost #viralreelschallenge #viralreels #venezuela #newyork #2026Goals #PK

Terhagachh, Kishanganj | Jul 16, 2026

अररिया जिला अन्तर्गत आज 16 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी ने भू-अर्जन मुआवजा भुगतान कैंप,धान रोपनी एवं तटबंध क्षेत्र का किया निरीक्षण

अररिया जिलाधिकारी विनोद दूहन ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर विकास कार्यों, कृषि गतिविधियों एवं बाढ़ सुरक्षा से संबंधित तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।

सर्वप्रथम जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय इटहरी में आयोजित भू-अर्जन मुआवजा भुगतान कैंप का निरीक्षण किया। उन्होंने कैंप में उपस्थित अधिकारियों से मुआवजा वितरण की प्रगति की जानकारी प्राप्त की तथा लाभुकों को पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पात्र रैयतों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए तथा सभी मामलों का त्वरित निष्पादन किया जाए।

इसके उपरांत जिलाधिकारी ने फारबिसगंज प्रखंड के सिरसिया पहुंचकर किसानों द्वारा की जा रही धान रोपनी का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों से बातचीत कर कृषि कार्यों एवं सिंचाई की उपलब्धता की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को किसानों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने कोसी–मेची परियोजना अंतर्गत बथनाहा के भदेसर क्षेत्र का भी भ्रमण किया। यहां सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने परियोजना से संबंधित कार्यों एवं प्रस्तावित योजनाओं की विस्तृत जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी ने परियोजना से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए।

इसके बाद जिलाधिकारी ने मीरगंज क्षेत्र में परमान नदी के कटाव स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने नदी की वर्तमान स्थिति, कटाव की संभावना तथा बाढ़ सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील स्थलों पर सतत निगरानी रखने तथा आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय समय रहते सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि संभावित बाढ़ एवं कटाव से जन-धन की सुरक्षा की जा सके।

जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन मानसून एवं बाढ़ के मद्देनजर पूरी तरह सतर्क है। विकास कार्यों, किसानों के हितों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। #viralpost #viralreelschallenge #viralchallenge #viralreels #venezuela

अररिया जिला अन्तर्गत आज 16 जुलाई 2026 को जिलाधिकारी ने भू-अर्जन मुआवजा भुगतान कैंप,धान रोपनी एवं तटबंध क्षेत्र का किया निरीक्षण अररिया जिलाधिकारी विनोद दूहन ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर विकास कार्यों, कृषि गतिविधियों एवं बाढ़ सुरक्षा से संबंधित तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। सर्वप्रथम जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय इटहरी में आयोजित भू-अर्जन मुआवजा भुगतान कैंप का निरीक्षण किया। उन्होंने कैंप में उपस्थित अधिकारियों से मुआवजा वितरण की प्रगति की जानकारी प्राप्त की तथा लाभुकों को पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पात्र रैयतों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए तथा सभी मामलों का त्वरित निष्पादन किया जाए। इसके उपरांत जिलाधिकारी ने फारबिसगंज प्रखंड के सिरसिया पहुंचकर किसानों द्वारा की जा रही धान रोपनी का अवलोकन किया। उन्होंने किसानों से बातचीत कर कृषि कार्यों एवं सिंचाई की उपलब्धता की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को किसानों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी ने कोसी–मेची परियोजना अंतर्गत बथनाहा के भदेसर क्षेत्र का भी भ्रमण किया। यहां सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने परियोजना से संबंधित कार्यों एवं प्रस्तावित योजनाओं की विस्तृत जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी ने परियोजना से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद जिलाधिकारी ने मीरगंज क्षेत्र में परमान नदी के कटाव स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने नदी की वर्तमान स्थिति, कटाव की संभावना तथा बाढ़ सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को संवेदनशील स्थलों पर सतत निगरानी रखने तथा आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय समय रहते सुनिश्चित करने का निर्देश दिया, ताकि संभावित बाढ़ एवं कटाव से जन-धन की सुरक्षा की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन मानसून एवं बाढ़ के मद्देनजर पूरी तरह सतर्क है। विकास कार्यों, किसानों के हितों तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी कार्यों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि आमजन को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। #viralpost #viralreelschallenge #viralchallenge #viralreels #venezuela

Terhagachh, Kishanganj | Jul 16, 2026

किशनगंज,रात में भी जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध होना हर गर्भवती महिला का अधिकार किशनगंज जिला अन्तर्गत प्रसव केवल एक सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि ऐसा समय होता है जब कुछ मिनटों का निर्णय मां और नवजात दोनों के जीवन को सुरक्षित या संकटग्रस्त बना सकता है। जब प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, प्रसव में रुकावट, गर्भस्थ शिशु की असामान्य स्थिति या उच्च रक्तचाप जैसी जटिलताएं सामने आती हैं, तब तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन ही जीवन बचाने का सबसे प्रभावी विकल्प होता है। यदि ऐसे समय में अस्पताल में चौबीसों घंटे सिजेरियन सुविधा उपलब्ध न हो और गर्भवती महिला को दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़े, तो उपचार में होने वाली देरी मातृ एवं नवजात मृत्यु का कारण बन सकती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) और जिला अस्पतालों में 24×7 जीवनरक्षक सिजेरियन सेवाओं को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दे रहा है। इसका उद्देश्य केवल ऑपरेशन की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी महिला की जान न जाए।किशनगंज सदर अस्पताल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभरा है, जहां चौबीसों घंटे उपलब्ध आपातकालीन प्रसूति सेवाओं ने न केवल जटिल गर्भावस्था वाली महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया है, बल्कि अनावश्यक रेफरल में भी उल्लेखनीय कमी लाई है। इससे गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ कम हुआ है और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है। जब रात में ही करनी पड़ी सिजेरियन, समय पर उपचार ने बचाई दो जिंदगियां कोचाधामन प्रखंड की रहने वाली नाजिया खातून को देर रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार उन्हें तत्काल सदर अस्पताल लेकर पहुंचा। जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि सामान्य प्रसव संभव नहीं है और मां तथा बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन करना आवश्यक है। नाजिया याद करते हुए कहती हैं की हमें सबसे ज्यादा डर इस बात का था कि कहीं रात होने के कारण हमें दूसरे अस्पताल न भेज दिया जाए। हमारे पास निजी अस्पताल जाने के पैसे भी नहीं थे। लेकिन डॉक्टरों ने तुरंत ऑपरेशन की तैयारी शुरू कर दी। कुछ ही समय में मेरा सफल सिजेरियन हुआ और मेरा बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ। अगर उस रात हमें रेफर कर दिया जाता, तो रास्ते में क्या होता, इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। आज मैं हर गर्भवती महिला से कहती हूं कि समय पर अस्पताल पहुंचना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भरोसा करना सबसे बड़ा निर्णय है। उनके पति ने भी बताया कि निःशुल्क ऑपरेशन, दवा, जांच और भर्ती की सुविधा ने आर्थिक संकट के बीच उनके परिवार को बड़ी राहत दी। समय पर सिजेरियन कई मामलों में जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर होता है स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. शबनम यास्मीन ने कहा कि प्रसव संबंधी कई जटिलताओं में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। यदि सिजेरियन में अनावश्यक विलंब होता है, तो मां और नवजात दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।उन्होंने कहा की हमारा प्रयास है कि कोई भी गर्भवती महिला केवल इसलिए जोखिम में न पड़े कि रात के समय जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं थी। जिला अस्पताल और एफआरयू स्तर पर चौबीसों घंटे सिजेरियन सेवाएं उपलब्ध होने से अनावश्यक रेफरल कम होते हैं, उपचार समय पर शुरू होता है और मातृ एवं नवजात मृत्यु की संभावना में कमी आती है। सुरक्षित मातृत्व हर महिला का अधिकार है, सुविधा नहीं।उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रशिक्षित प्रसूति विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, ब्लड बैंक, नवजात शिशु देखभाल इकाई, ऑपरेशन थिएटर और प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की उपलब्धता जटिल मामलों के त्वरित प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। मजबूत एफआरयू प्रणाली से बदलेगी मातृ स्वास्थ्य की तस्वीर सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य केवल संस्थागत प्रसव बढ़ाना ही नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर जटिल गर्भावस्था में समय पर आपातकालीन प्रसूति सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने आगे कहा की एफआरयू और जिला अस्पतालों में 24×7 सिजेरियन सेवाओं को मजबूत करने से गर्भवती महिलाओं को अनावश्यक रूप से दूसरे अस्पतालों में भेजने की आवश्यकता कम होती है। इससे उपचार में होने वाली देरी रुकती है और कई मामलों में मां तथा नवजात दोनों की जान बचाई जा सकती है। हमारा स्पष्ट संदेश है कि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी भी महिला की जान नहीं जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निःशुल्क सिजेरियन, दवा, जांच और विशेषज्ञ देखभाल यह सुनिश्चित करती है कि गरीबी किसी महिला के सुरक्षित मातृत्व में बाधा न बने। सुरक्षित मातृत्व की दिशा में मजबूत कदम सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ अनवर हुसैन ने बताया कि मातृ मृत्यु के अधिकांश कारणों को समय पर पहचान और त्वरित आपातकालीन प्रसूति सेवाओं के माध्यम से रोका जा सकता है। जिला अस्पतालों और एफआरयू में चौबीसों घंटे जीवनरक्षक सिजेरियन सेवाओं की उपलब्धता इसी दिशा में एक निर्णायक कदम है। किशनगंज में मजबूत होती यह व्यवस्था स्पष्ट संदेश देती है कि सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य सेवा का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक महिला का अधिकार है। जब उपचार समय पर मिलता है, रेफरल कम होते हैं और सेवाएं दिन-रात उपलब्ध रहती हैं, तभी यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कोई भी महिला केवल इसलिए अपनी जान न गंवाए क्योंकि रात में जीवनरक्षक सिजेरियन सेवा उपलब्ध नहीं थी।यह संस्करण नीति, जनस्वास्थ्य और मानवीय कहानी—तीनों का संतुलन रखता है और राष्ट्रीय स्तर के समाचार-पत्रों की शैली के अधिक निकट है। District Kishanganj Bihar Health Department Dilip Jaiswal Kishanganj Police Bihar Education Department JEEVIKA Bihar Nitish Kumar BJP Bihar - Terhagachh News