
केरल उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को सर्वोपरि रखते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भारतीय नागरिक से विवाह कर लेने मात्र से किसी विदेशी को भारत में प्रवेश या वीजा पाने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने दुबई में रह रहे एक भारतीय पति और उनकी पाकिस्तानी पत्नी की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि विदेशियों का देश में प्रवेश, ठहराव और प्रस्थान पूरी तरह से केंद्र सरकार के संप्रभु अधिकारों के अधीन है, जिसे मौलिक अधिकारों की आड़ में अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने केंद्र सरकार के रुख को सही ठहराते हुए रेखांकित किया कि वीजा जारी करना सरकार का विशेषाधिकार है, कोई कानूनी अधिकार नहीं। सुरक्षा चिंताओं के तहत पाकिस्तानी नागरिकों के लिए निलंबित वीजा सेवाओं का हवाला देते हुए कोर्ट ने साफ किया कि संविधान का अनुच्छेद 14 केवल भारतीय सीमा के भीतर मौजूद लोगों को संरक्षण देता है, विदेश में बैठकर इसके आधार पर देश में जबरन प्रवेश का दावा नहीं किया जा सकता।
#KeralaHighCourt #NationalSecurity #VisaRules #LegalNews #HighCourtVerdict #IndianVisa #NationalSecurityFirst #FatafatNews