
जागरूकता शिविरों का आयोजन कर न्यायिक अधिकारियो ने गुड टच एवं बेड टच के बारे में बच्चों को किया जागरूक
सवाई माधोपुर, 4 अगस्त। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सवाई माधोपुर के तत्वावधान में Transformative Tuesdays के अवसर पर सवाई माधोपुर न्याय क्षेत्र के न्यायिक अधिकारियों द्वारा “शोषण के खिलाफ आवाज उठाओ, स्वयं अपने रक्षक बनें। अच्छा स्पर्श, बुरा स्पर्शः फर्क समझो, सुरक्षित रहो” विषय पर जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया।
विशेष न्यायाधीश पोक्सो न्यायालय संख्या-01 मीनाक्षी जैन द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मानटाउन में, विशेष न्यायाधीश पोक्सो न्यायालय संख्या-02 प्रेमराज सिंह चंद्रावत द्वारा महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय साहूनगर में, विशिष्ट न्यायाधीश अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) प्रकरण असीम कुलश्रेष्ठ द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आलनपुर में, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समीक्षा गौतम द्वारा राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय मानटाउन में, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गार्गी चौधरी द्वारा राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय शहर सवाई माधोपुर में, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-01 किरण प्रजापत द्वारा पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय 72 सीढ़ी शहर सवाई माधोपुर में, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02 अनिता रजवानिया द्वारा महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय खिलचीपुर में, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या-02 गंगापुर सिटी रेशमा खान द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हिंगोटिया में, सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट गंगापुर सिटी संगीता मोगा द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कुनकटा कलां में, विकास नेहरा अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति बौंली द्वारा जय बजरंग उच्च माध्यमिक विद्यालय बौंली में, रविंद्र कुमार कुंतल अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति खंडार द्वारा स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल खंडार में एवं नेहा मौर्य अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति चौथ का बरवाड़ा द्वारा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रजवाना में जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया।
शिविरों में विद्यार्थियों को बच्चों के विरुद्ध होने वाले यौन शोषण, लैंगिक अपराधों तथा उनके प्रति जागरूक रहने के उपायों की जानकारी दी गई। न्यायिक अधिकारियों ने उपस्थित विद्यार्थियों को बताया कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में रहने का अधिकार है तथा किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार, डराने-धमकाने अथवा शोषण की स्थिति में बिना किसी भय के अपने माता-पिता, शिक्षक, अभिभावक, पुलिस अथवा संबंधित प्राधिकारी को तत्काल सूचना देनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान गुड़ टच एवं बेड टच के बीच का अंतर सरल एवं सहज भाषा में समझाया गया। बच्चों को बताया गया कि यदि कोई व्यक्ति उनकी इच्छा के विरुद्ध अनुचित स्पर्श करता है या उन्हें असहज महसूस कराता है, तो वे तुरंत ष्नाष् कहें, वहां से हट जाएं तथा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। साथ ही बच्चों को यह भी समझाया गया कि किसी भी प्रकार की धमकी या लालच में आकर ऐसी घटनाओं को छिपाना नहीं चाहिए।
न्यायिक अधिकारियों ने पॉक्सो अधिनियम 2012 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि यह कानून बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करता है तथा ऐसे अपराधों के विरुद्ध कठोर दण्ड का प्रावधान करता है। साथ ही, न्यायिक अधिकारियों द्वारा किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
शिविर में उपस्थित विद्यार्थियों को आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने, किसी भी प्रकार के शोषण का विरोध करने तथा आवश्यकता पड़ने पर चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, आपातकालीन सेवा 112 एवं निकटतम पुलिस थाने अथवा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
इसके अतिरिक्त पैनल अधिवक्ताओं, लीगल एड डिफेंस काउंसिल एवं अधिकार मित्रों द्वारा भी जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया।