
जन्म प्रमाण पत्र के नियम बदले, अब दो साल से ज्यादा पुराने मामलों में कोर्ट जाना होगा अनिवार्य
केंद्र सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम में बड़ा बदलाव किया है। सरकार द्वारा 06 अगस्त 2026 को जारी नए गजट के अनुसार अब जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के नियम पहले से कहीं ज्यादा कड़े कर दिए गए हैं।
संसद में पारित *जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक 2026* को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू हो गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम लोगों को समय पर जन्म-मृत्यु की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है।
*क्या है नया नियम?*
पहले एक साल से ज्यादा पुराने किसी भी जन्म के पंजीकरण के लिए केवल एसडीएम या डीएम के आदेश से प्रमाण पत्र बन जाता था, चाहे वह 10 या 20 साल पुराना ही क्यों न हो।
लेकिन अब व्यवस्था को दो हिस्सों में बांट दिया गया है -
*1. एक से दो साल तक की देरी:* यदि जन्म की सूचना एक साल के बाद लेकिन दो साल के अंदर दी जाती है, तो इसके लिए जिला दंडाधिकारी (DM), अनुमंडल दंडाधिकारी (SDM) या कार्यपालक दंडाधिकारी के आदेश की जरूरत होगी।
*2. दो साल से अधिक की देरी:* यदि दो साल से अधिक समय बीत गया है, तो अब प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि *प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (Judicial Magistrate First Class)* के आदेश से ही प्रमाण पत्र बनेगा। इसके लिए अभिभावक को कोर्ट में आवेदन करना होगा।
वहीं 21 दिन के अंदर सामान्य पंजीकरण और 21 दिन से एक साल तक विलंब शुल्क के साथ पंजीकरण की पुरानी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
*आम लोगों पर पड़ेगा असर*
इस नए नियम के लागू होने से उन हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जिन्होंने अभी तक अपने बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवाया है। पहले जो काम ब्लॉक या अनुमंडल स्तर पर हो जाता था, उसके लिए अब कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि जिन बच्चों का प्रमाण पत्र लंबित है, वे जल्द से जल्द संबंधित नगरपालिका / पंचायत कार्यालय में संपर्क कर इसे बनवा लें।
Namkum, Ranchi | Sep 3, 2026