
चमगादड़ अंधेरे में दीवारों से टकराते क्यों नहीं?
इस सवाल का जवाब खोजने वाले वैज्ञानिक ने दुनिया की सोच ही बदल दी।
3 अगस्त 1915 को जन्मे अमेरिकी वैज्ञानिक डोनाल्ड रेडफील्ड ग्रिफिन ने एक ऐसी खोज की, जिसने जीव विज्ञान की दुनिया में नया अध्याय खोल दिया। उस समय तक वैज्ञानिकों को समझ नहीं आ रहा था कि चमगादड़ घुप अंधेरे में भी इतनी तेज़ रफ्तार से उड़ते हुए किसी चीज़ से टकराते क्यों नहीं हैं।
कई लोगों को लगता था कि चमगादड़ों की आँखें बहुत तेज़ होती हैं। लेकिन ग्रिफिन ने अपने रिसर्च से दिखाया कि असली राज उनकी आँखों में नहीं, बल्कि उनकी आवाज़ में छिपा है।
उन्होंने साबित किया कि चमगादड़ उड़ते समय बहुत तेज़ अल्ट्रासोनिक साउंड निकालते हैं। यह आवाज़ सामने मौजूद चीज़ों से टकराकर वापस आती है। लौटने वाली गूँज को सुनकर चमगादड़ तुरंत समझ जाते हैं कि सामने क्या है, कितनी दूर है और किस दिशा में है। इसी तकनीक को इकोलोकेशन कहा जाता है।
इस खोज ने सिर्फ जानवरों को समझने में ही मदद नहीं की, बल्कि आगे चलकर सोनार टेक्नोलॉजी, समुद्री खोज, पनडुब्बियों और कई आधुनिक नेविगेशन सिस्टम को बेहतर बनाने की दिशा भी दिखाई। यानी एक छोटे से चमगादड़ को समझने की कोशिश ने इंसानों की टेक्नोलॉजी को भी नई रफ्तार दे दी।
आज भी वैज्ञानिक इकोलोकेशन पर रिसर्च कर रहे हैं, ताकि रोबोटिक्स, मेडिकल डिवाइस और स्मार्ट नेविगेशन सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके। यही विज्ञान की सबसे खूबसूरत बात है—कई बार सबसे बड़ी खोज किसी बहुत छोटे जीव से शुरू होती है।
यानी अगली बार जब रात में कोई चमगादड़ उड़ता दिखे, तो याद रखिए... वह अंधेरे में नहीं भटक रहा, बल्कि आवाज़ से रास्ता "देख" रहा है।
आपको क्या लगता है, प्रकृति की सबसे अद्भुत क्षमता किस जीव के पास है?
जानकारी का ओरिजन सोर्स: ग्रिफिन शोध, वैज्ञानिक अध्ययन अभिलेख
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Bihar, India | Aug 3, 2026