
जातिगत भेदभाव के आरोप पर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
सीमांत शिल्पकार समुदाय ने राष्ट्रपति, राज्यपाल और अनुसूचित जाति आयोग को भेजा ज्ञापन
धारचूला। सीमांत शिल्पकार समुदाय धारचूला ने 8 अगस्त 2026 को धारचूला के हिलदानी रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा के बाद कथित जातिगत भेदभाव की घटना को लेकर प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
समुदाय की ओर से राष्ट्रपति, उत्तराखंड के राज्यपाल, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राज्य अनुसूचित जाति आयोग को ज्ञापन भेजा गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि जनसभा के बाद कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर मंच के शुद्धीकरण के लिए हवन-पूजन किए जाने का मामला सामने आया है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि यदि यह कृत्य कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं अनुसूचित जाति समाज के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति के आधार पर उन्हें अछूत मानने की मानसिकता के तहत किया गया है तो यह बेहद गंभीर और निंदनीय है तथा संविधान की समानता, मानव गरिमा और अस्पृश्यता उन्मूलन की भावना के खिलाफ है।
समुदाय ने दावा किया कि घटना से संबंधित व्यक्तियों और पंडितों के फोटो, वीडियो तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री सार्वजनिक रूप से सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद संबंधित लोगों के खिलाफ अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं होने पर समुदाय ने चिंता जताई है।
ज्ञापन में कहा गया कि स्वतंत्र भारत में आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी यदि किसी सार्वजनिक मंच को किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर अशुद्ध मानकर उसका शुद्धीकरण किया जाता है, तो यह अनुसूचित जाति समाज के सम्मान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
सीमांत शिल्पकार समुदाय ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, तथ्य सामने लाने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। समुदाय ने स्पष्ट किया कि जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता जैसी मानसिकता को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।