
13-12 का खेल! भाजपा की जुलैखा बनीं उपाध्यक्ष, लेकिन जश्न में लहराए कांग्रेस के झंडे
अध्यक्ष कांग्रेस का, उपाध्यक्ष भाजपा का… दोनों पद एक ही समाज में जाने से उठे सियासी सवाल
सोमवार को एक वोट से भाजपा की अध्यक्ष पद की हार, मंगलवार को पूरे 13 वोटों से भाजपा की उपाध्यक्ष की जीत
बिसाऊ। अशोक सोनी बिसाऊ नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव के अगले ही दिन उपाध्यक्ष पद के मतदान ने शहर की सियासत में एक नया सवाल खड़ा कर दिया। मंगलवार को हुए उपाध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी जुलेखा बानो ने 13 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सपना को 12 वोट मिले। इस तरह जुलेखा बानो एक वोट के अंतर से उपाध्यक्ष निर्वाचित हुईं। बिसाऊ बोर्ड में भाजपा के 13 और कांग्रेस के 12 पार्षद हैं।
सुबह उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा की ओर से पूर्व चेयरमैन हारून खत्री की पत्नी जुलेखा बानो तथा कांग्रेस की ओर से पूर्व पार्षद नेमीचंद खटीक की पत्नी सपना ने नामांकन दाखिल किया। दोपहर करीब सवा दो बजे कांग्रेस पार्षदों ने मतदान किया। इसके करीब आधे घंटे बाद भाजपा पार्षदों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतगणना के बाद जुलेखा बानो के खाते में 13 और सपना के खाते में 12 मत आए और जुलैखा को विजयी घोषित किया गया। जुलेखा बानो की जीत के बाद भाजपा खेमे में खुशी दिखाई दी। पूर्व चेयरमैन हारून खत्री, उनके पुत्र हासिम खत्री, परिवार के सदस्यों सहित भाजपा मंडल अध्यक्ष एडवोकेट पवन कुमार धोलपुरिया, विलास सैनी आदि ने जीत पर प्रसन्नता जताई। लेकिन जीत के जश्न के दौरान कांग्रेस के झंडे दिखाई देने और कांग्रेस जिंदाबाद के नारे लगने की चर्चा ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया। खासतौर पर इसलिए कि एक दिन पहले ही अध्यक्ष पद के चुनाव में भाजपा के 13 पार्षदों के मुकाबले कांग्रेस की सलमा बानो ने 13 वोट हासिल कर अध्यक्ष पद जीता था। उपलब्ध चुनाव परिणामों के अनुसार सलमा बानो ने अध्यक्ष पद पर एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की।
एक दिन में बदला गणित, उठे कई सवाल
सोमवार को भाजपा के पास 13 पार्षदों का संख्या बल होने के बावजूद अध्यक्ष पद हाथ से निकल गया। मंगलवार को उसी भाजपा के सभी 13 पार्षदों का वोट जुलेखा बानो के पक्ष में पड़ना राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि अध्यक्ष कांग्रेस का और उपाध्यक्ष भाजपा का—और दोनों पद एक ही समाज के प्रतिनिधियों के पास पहुंच गए। इससे कस्बे की राजनीति में तरह-तरह की चर्चाओं को जन्म मिला है। हालांकि, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन किसी भी कथित राजनीतिक समझौते या आपसी ‘गेम’ को बिना ठोस प्रमाण के सच मानना उचित नहीं होगा। सोमवार की क्रॉस वोटिंग किस पार्षद ने की, इसका आधिकारिक रूप से सार्वजनिक प्रमाण सामने आए बिना किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना भी उचित नहीं है। इसी वजह से अब बड़ा सवाल यही है—क्या सोमवार की क्रॉस वोटिंग और मंगलवार की 13-0 वाली पार्टी एक जुटता के पीछे कोई राजनीतिक समीकरण था, या यह महज अलग-अलग चुनावों में पार्षदों के अलग-अलग फैसलों का परिणाम था? इस सवाल का जवाब अटकलों से नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजी तथ्यों और प्रमाणों से ही सामने आना चाहिए।
कांग्रेस खेमे के नेता भी रहे मौजूद
उपाध्यक्ष चुनाव के दौरान कांग्रेस नगर कमेटी अध्यक्ष एडवोकेट अयूब खान, नवनिर्वाचित चेयरमैन सलमा बानो, उनके पति एवं पार्षद सलीम सैयद, सुरेश कुमार महला, पूर्व पंचायत समिति सदस्य महेंद्र कपुरिया, पूर्व पार्षद युसूफ खान, नेमीचंद खटीक तथा गांगियासर के अयुब खान दौलतखानी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
बिसाऊ की राजनीति में लगातार दो दिनों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के परिणामों ने 25 पार्षदों वाले बोर्ड की सियासी तस्वीर को बेहद दिलचस्प बना दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष मिलकर नगरपालिका के कामकाज को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल किस रूप में दिखाई देता है।
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