
जजपा-इनसो में बड़ी बगावत : छात्र नेता नितिन सैन का इस्तीफा, शीर्ष नेतृत्व पर लगाए जातिवाद के आरोप
जजपा और इनसो में अब होती है जातिवादी समीकरणों के आधार पर कार्यकर्ताओं की पहचान : नितिन सैन
भिवानी, 02 जून : हरियाणा की छात्र राजनीति और जननायक जनता पार्टी के भीतर असंतोष का ज्वालामुखी उस समय फट गया, जब जजपा की छात्र इकाई इनसो और जेजेपी के कई वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से पार्टी छोडऩे का ऐलान किया। मंगलवार को भिवानी में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान छात्र नेता नितिन सैन ने जेजेपी और इनसो के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इस्तीफे की घोषणा की। नितिन सैन के तेवरों से साफ था कि पार्टी के भीतर जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी किस कदर हावी हो चुकी है।
पत्रकार वार्ता में नितिन सैन में सबसे बड़ा और गंभीर आरोप पार्टी के भीतर पनप रहे जातिवाद को लेकर लगाया। उन्होंने बेहद रोष प्रकट करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर अब केवल जातिवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। योग्यता और मेहनत को दरकिनार करके एक खास सोच के तहत फैसले लिए जा रहे हैं। जेजेपी और इनसो अब वह संगठन नहीं रहे जो सबको साथ लेकर चलते थे, बल्कि यहां अब जातिवादी समीकरणों के आधार पर कार्यकर्ताओं की पहचान तय की जा रही है। नितिन सैन ने सीधे तौर पर पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन दोनों नेताओं के ढुलमुल और पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण आज पूरे हरियाणा में युवा कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए छात्र नेता नितिन सैन ने कहा कि जो युवा रात-दिन एक करके, धूप और पसीने में पार्टी के झंडे उठाते हैं, आज उनकी सुनवाई करने वाला संगठन में कोई नहीं है। शीर्ष नेतृत्व केवल अपने चाटुकारों और चुनिंदा लोगों से घिरा हुआ है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यह तो सिर्फ शुरुआत है, आने वाले दिनों में जेजेपी को और भी बड़े झटके लगने वाले हैं। हरियाणा के कई अन्य जिलों के बड़े इनसो नेता लगातार उनके संपर्क में हैं, जो पार्टी की इसी कार्यप्रणाली और जातिवादी सोच से तंग आकर जल्द ही सामूहिक इस्तीफे दे सकते हैं।
पार्टी छोडऩे के बाद अपनी भविष्य की रणनीति पर बात करते हुए नितिन सैन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम किसी व्यक्तिगत पद या लालच में आकर नहीं उठाया है। वे पहले भी छात्रों की आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उनके हकों के लिए लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के हितों की लड़ाई अब सडक़ पर उतरकर और मजबूती से लड़ी जाएगी। वही नितिन सैन ने खुलासा किया कि इस्तीफा देने के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों के बड़े नेताओं के फोन और संदेश उनके पास आ रहे हैं।
उन्होंने साफ किया कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे। अपने सभी साथियों के साथ एक बड़ी बैठक की जाएगी। साथियों से मिलने वाले सुझावों और जमीनी फीडबैक के आधार पर ही वे अपनी आगामी राजनीतिक दिशा और नई पार्टी में शामिल होने का फैसला तय करेंगे। अंत में सैन ने अपने साथ खड़े सभी युवाओं और समर्थकों का आभार जताते हुए कहा कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है, बल्कि युवाओं के मान-सम्मान के लिए इसे और तेज किया जाएगा।