ऑनलाइन प्रवचन की आड़ में युवतियों के यौन शोषण का आरोप, IIT पासआउट ‘बाबा’ गिरफ्तार
मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन क्षेत्र में खुद को आध्यात्मिक गुरु बताने वाले एक युवक को पुलिस ने युवतियों के कथित यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और रंगदारी के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास के रूप में हुई है, जिसने रुड़की IIT से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। पुलिस के अनुसार आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रवचनों के माध्यम से शिक्षित युवाओं को अपने प्रभाव में लेता था।
नर्सिंग छात्रा की शिकायत के बाद खुला मामला
मामला तब सामने आया जब छत्तीसगढ़ की एक 22 वर्षीय बीएससी नर्सिंग छात्रा ने गोवर्धन थाने में शिकायत दर्ज कराई। युवती का आरोप है कि आरोपी ने उसे प्रसाद के रूप में दूध दिया, जिसमें नशीला पदार्थ मिला था। बेहोशी की हालत में उसके साथ दुष्कर्म किया गया तथा अश्लील फोटो और वीडियो बनाए गए। बाद में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर धन की मांग भी की गई।
ऑनलाइन प्रवचन से बनाता था अनुयायी
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धार्मिक प्रवचन देता था। वह आध्यात्मिक ज्ञान, करियर मार्गदर्शन और मोक्ष प्राप्ति जैसे विषयों के जरिए शिक्षित युवक-युवतियों को अपने संपर्क में लाता था। इसके बाद उन्हें मथुरा स्थित अपने आश्रमनुमा ठिकाने पर बुलाकर प्रभाव में लेने का प्रयास करता था।
पढ़ी-लिखी युवतियां थीं निशाने पर
जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी विशेष रूप से इंजीनियर, प्रोफेशनल और बड़ी कंपनियों में कार्यरत युवतियों को निशाना बनाता था। पुलिस को उसके मोबाइल से कई आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिले हैं। आरोप है कि इन्हीं के आधार पर वह पीड़िताओं को ब्लैकमेल कर उगाही करता था।
आश्रम से मिले युवक-युवतियां
पुलिस कार्रवाई के दौरान आरोपी के ठिकाने से दो युवतियों और एक युवक को भी बरामद किया गया, जिन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाने में लगी है।
इंजीनियरिंग छोड़ बना स्वयंभू गुरु
पुलिस के अनुसार अभिषेक मिश्रा ने रुड़की IIT से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। बाद में उसने खुद को आध्यात्मिक गुरु के रूप में स्थापित किया और मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र में आश्रमनुमा केंद्र संचालित करने लगा।
नोट: मामले की जांच जारी है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप पुलिस जांच और दर्ज एफआईआर पर आधारित हैं। अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।