
रीवा में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर देश की राजनीति में जारी घमासान के बीच, इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने रीवा में संभागायुक्त के माध्यम से देश के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए और उन्हें उनके पद से हटाने की पुरजोर मांग की गई। इसके साथ ही मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए सभी नामों को दोबारा जोड़ने और निर्वाचन आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में आमूल-चूल बदलाव करने की भी मांग उठाई गई।
ज्ञापन में मुख्य रूप से यह आरोप लगाया गया कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत पूरे देश में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, जिससे आम नागरिकों के संवैधानिक मताधिकार पर सीधा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इसके अलावा, नए मतदाताओं के पंजीयन के लिए फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर भी तीखे सवाल उठाए गए। नेताओं का कहना है कि इन नई शर्तों और जटिल जानकारियों के चलते आम नागरिकों को अपना नाम पंजीकृत कराने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
विपक्षी दलों ने आगामी विधानसभा चुनावों और पूर्व के अनुभवों का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए। उनका आरोप था कि निर्वाचन आयोग के भीतर जो आपत्तियां उठाई गईं और विपक्षी नेताओं की ओर से जो सुझाव दिए गए, उन पर किसी भी प्रकार का अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। गठबंधन के नेताओं ने इसे सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश के मतदाताओं के बुनियादी अधिकारों से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर विषय करार दिया है।
राष्ट्रपति के समक्ष इंडिया गठबंधन की ओर से पांच प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाए जाने, वर्ष 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति से जुड़े कानून को रद्द करके नियुक्ति प्रक्रिया में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करने और मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाले कानूनी संरक्षण को समाप्त करने जैसी बातें शामिल हैं। इसके साथ ही, मतदाता सूची से अनधिकृत रूप से हटाए गए नामों को तुरंत पुनः जोड़ने और दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी आपराधिक मुकदमों को वापस लेने की भी मांग की गई है।
इस विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान रीवा में कई प्रमुख राजनीतिक चेहरों की मौजूदगी रही। इनमें कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंजीनियर राजेंद्र शर्मा, शहर अध्यक्ष अशोक पटेल ‘झब्बू’, सीपीआई के एडवोकेट घनश्याम सिंह, समाजवादी जनता मोर्चा के एडवोकेट वीरेंद्र सिंह व महेश्वरी त्रिपाठी, समाजवादी पार्टी के अमरेश पटेल, तथा सीपीआईएम के जिलाध्यक्ष अमित सोहगौरा और गिरिजेश सिंह सेंगर सहित अन्य दलों के नेता शामिल थे।
विपक्षी नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि मताधिकार की सुरक्षा केवल कोई साधारण राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हमारे देश के लोकतंत्र की मूल बुनियाद है। उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची से जुड़े इस पूरे मामले की निष्पक्षता के साथ समीक्षा की जाए ताकि देश के हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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