
संस्कृतभाषा धर्म और विज्ञान का आधार है : विजय नड्डा*
विद्या भारती हरियाणा द्वारा संस्कृत महोत्सव का आयोजन, मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान।
कुरुक्षेत्र, 1 सितंबर।
विद्या भारती हरियाणा द्वारा संस्कृत सप्ताह के अवसर पर मंगलवार को कुरुक्षेत्र में भव्य संस्कृत महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्या भारती द्वारा संचालित कुरुक्षेत्र के नौ विद्यालयों के विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां देकर संस्कृत के प्रति अपनी प्रतिभा एवं अनुराग का परिचय दिया।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि पूज्या साध्वी मोक्षिता जी भगवान् दत्तात्रेय मंदिर, कुरुक्षेत्र, मुख्य वक्ता श्री विजय नड्डा जी, संगठन मंत्री, विद्या भारती तथा कार्यक्रम अध्यक्ष श्री उपेंद्र शास्त्री जी अखिल भारतीय संस्कृत विषय संयोजक उपस्थित रहे।
प्रान्त संस्कृत विषय संयोजक श्री भूपेन्द्र शर्मा जी ने अतिथियों का परिचय कराते हुए उनका सम्मान।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती की वंदना से हुआ।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सर्वप्रथम भगवद् गीता विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा मधुर गीता पाठ छ गया। गीता प्राथमिक विद्यालय के नन्हें मुन्ने विद्यालयों ने संस्कृत में ‘मम परिचयः’ प्रस्तुत किया ।
गीता कन्या विद्यालय की बहनों ने ग्रीष्मावकाश पर मित्र संवाद एवं गीता निकेतन आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक ‘शंकराचार्य-शास्त्रार्थ’ प्रस्तुत कर सबको चकित कर दिया।
गीता विद्या मंदिर मोहननगर के विद्यार्थियों ने 'मनसा सततं स्मरणीय' समूह गान प्रस्तुत किया एवं गीता निकेतन विद्या मंदिर सेक्टर -3 के विद्यार्थियों ने 'मम भारतम्' गीत पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया। गीता सह शिक्षा विद्यालय के विद्यार्थियों ने सुभाषितों का गायन किया।
मुख्यातिथि साध्वी मोक्षिता जी ने संस्कृत एवं शास्त्रार्थ की गौरवशाली परम्परा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैदिक परम्परा में शास्त्रार्थ का विशेष महत्व रहा है। आदि शंकराचार्य ने शास्त्रार्थ के माध्यम से सनातन वैदिक धर्म एवं दर्शन की पुनः प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परम्परा और संस्कृति की आधारभूत भाषा है। संस्कृत के पुनर्जागरण के लिए आवश्यक है कि हर घर का वातावरण संस्कृतमय बने।
कार्यक्रम में भ्राता विवेक जी ने संस्कृत भाषा के महत्व पर अपने विचार रखते हुए कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान एवं हमारी प्राचीन परम्पराओं की संवाहक भाषा है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन का दायित्व समाज के प्रत्येक व्यक्ति का है।
मुख्य वक्ता श्री विजय नड्डा जी ने कहा कि संस्कृत को केवल एक दिवस, एक सप्ताह अथवा किसी विशेष अवसर तक सीमित नहीं रखना चाहिए। संस्कृत का प्रयोग और संस्कार हर पल, हर घर और हर जन तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन एवं दैनिक जीवन में उसके प्रयोग के लिए प्रेरित किया।
विद्या भारती द्वारा आयोजित आचार्य प्रश्नमंच में प्रथम, द्वितीय तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले आचार्यों को भी मंच पर सम्मानित किया गया।।
कार्यक्रम के दौरान दशमी कक्षा व द्वादशी में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले सभी मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर अतिथियों एवं उपस्थित अभिभावकों ने उनका उत्साहवर्धन किया।
इस अवसर पर संस्कृत के विद्वान् एवं वरिष्ठजन श्रीहरिदेव शास्त्री , डॉ॰ रामनिवास शर्मा , संकुल प्रमुख श्री यशपाल वधवा ,श्रीमती सुमन बाला, श्रीमती मंजुला, श्रीमती राजकुमारी , सुश्री सुमेधा रानी एवं श्री बिजेन्द्र शास्त्री इत्यादि गणमान्य जन उपस्थित रहे
अंत में शान्तिमन्त्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
जयतु संस्कृतम्! जयतु भारतम्!!