
एक ही विज्ञापन, एक ही बैच फिर वेतन में भेदभाव क्यों? 2019 बैच के 86 सार्जेंटों के साथ सौतेला व्यवहार, प्रमोशन न मिलने से गहराया वेतन विसंगति का संकट
पटना / विशेष संवाददाता
पुलिस महकमे में वर्ष 2019 बैच के सार्जेंटों के बीच भारी असंतोष और आक्रोश पनप रहा है। एक ही विज्ञापन और समान चयन प्रक्रिया के जरिए बहाल हुए पुलिसकर्मियों के बीच विभाग द्वारा की गई व्यवस्था ने गंभीर वेतन विसंगति को जन्म दे दिया है। 2019 बैच के कुछ सार्जेंटों को सार्जेंट मेजर के पद पर पदोन्नति देकर उच्च वेतनमान का लाभ सौंप दिया गया, वहीं दूसरी ओर इसी बैच के 86 सार्जेंटों को "सीटों की रिक्तियां न होने" का हवाला देकर पदोन्नति और वित्तीय लाभ दोनों से वंचित कर दिया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर पद सीमित होना स्वाभाविक माना जा सकता है, परंतु एक ही विज्ञापन से चयनित सहकर्मियों के बीच वेतन का यह भारी अंतर किसी भी सेवा नियम या न्याय के सिद्धांत पर खरा नहीं उतरता।
प्रभावित पुलिसकर्मियों का सीधा सवाल है कि जब नियुक्ति की शर्तें, योग्यता, बैच और विज्ञापन एक ही थे, तो फिर वित्तीय लाभ में यह दोहरा मापदंड कैसे जायज ठहराया जा सकता है। पद की उपलब्धता न होने की स्थिति में भी सेवा नियमों और न्यायिक नजीरों के तहत समान बैच के कर्मियों को नोशनल प्रमोशन अथवा पे-प्रोटेक्शन देकर वेतन विसंगति को दूर किया जाता है। इसके बावजूद 86 सार्जेंटों को उनके साथियों से कम वेतन पर कार्य करने को मजबूर किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत मिलने वाले समानता के अधिकार का हनन है।
विभाग के इस मनमाने रवैये से कर्मियों का मनोबल बुरी तरह टूट रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि विभाग रिक्तियों की कमी का हवाला देकर पद नहीं दे सकता, तब भी एक ही बैच के सभी कर्मियों को समान वित्तीय उन्नयन और वेतनमान देना अनिवार्य है। महकमे के भीतर गहराती इस विसंगति को यदि समय रहते दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह मामला विधिक पचड़े और न्यायालय की चौखट तक पहुंचना तय माना जा रहा है। Bihar Police Samrat Choudhary Nitish Kumar VIJAY KUMAR SINHA Dr. Prem Kumar PMO India Tejashwi Yadav Mangal Pandey
Bihar, India | Oct 20, 2026