लखनऊ में Rapido ड्राइवर का अकाउंट 100 साल के लिए बैन! जातिसूचक टिप्पणियों का विरोध करना पड़ा भारी?
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में Rapido कैब चालक अंकित कुमार (30) का अकाउंट कथित तौर पर करीब 100 साल के लिए सस्पेंड किए जाने का मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। अंकित का आरोप है कि उन्होंने यात्रियों द्वारा की जा रही जातिसूचक और अपमानजनक टिप्पणियों का विरोध किया था, जिसके बाद शिकायत होने पर कंपनी ने बिना उनका पक्ष सुने कार्रवाई कर दी।
जानकारी के अनुसार, घटना सोमवार सुबह की बताई जा रही है। अंकित कुमार ने उतरठिया रेलवे स्टेशन से चार यात्रियों को चारबाग रेलवे स्टेशन ले जाने के लिए बुकिंग स्वीकार की थी। यात्रा के दौरान चारों यात्री अपने एक वरिष्ठ अधिकारी को लेकर चर्चा कर रहे थे। आरोप है कि बातचीत के दौरान वे उस अधिकारी की आलोचना करते हुए पूरे दलित समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक टिप्पणियां करने लगे।
अंकित कुमार का कहना है कि उन्होंने यात्रियों को कई बार समझाने का प्रयास किया और कहा कि यदि किसी व्यक्ति से शिकायत है तो उसका नाम लेकर बात करें, किसी पूरी जाति को निशाना बनाना उचित नहीं है। लेकिन जब यात्री नहीं माने तो उन्होंने तेलीबाग क्षेत्र के पास वाहन रोककर उन्हें बीच रास्ते में उतार दिया।
इस दौरान हुई बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें अंकित यात्रियों से विवाद करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यात्रियों ने Rapido से शिकायत की, जिसके बाद कंपनी ने उनका अकाउंट सस्पेंड कर दिया। अंकित का दावा है कि ऐप पर उनका अकाउंट 99 साल 11 महीने के लिए बैन दिखाया गया, जिससे उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारक अंकित कुमार पीजीआई क्षेत्र के निवासी हैं और परिवार का भरण-पोषण करने के लिए कैब चलाते हैं। उनका कहना है कि यात्रियों से उनकी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी और न ही वे उनकी जाति या धर्म के बारे में जानते थे। उन्होंने केवल जातिसूचक टिप्पणियों का विरोध किया था।
मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक वर्ग अंकित कुमार के समर्थन में उतर आया है और इसे जातिवाद के खिलाफ आवाज उठाने पर हुई कार्रवाई बता रहा है। वहीं, यात्रियों का विस्तृत पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। Rapido की ओर से भी इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रूप से ही सामने आई है।
यह घटना न केवल समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव के मुद्दे को उजागर करती है, बल्कि कैब एग्रीगेटर कंपनियों की शिकायत निवारण प्रक्रिया, ड्राइवरों के अधिकारों और यात्री-ड्राइवर विवादों के समाधान की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
फिलहाल, अंकित कुमार ने वीडियो जारी कर अपना अकाउंट बहाल करने और न्याय दिलाने की मांग की है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।