
कुप्रथाओं पर तत्वज्ञान का प्रहार | SA News Chhattisgarh
09-09-2026: समाज में जहाँ मृत्यु के पश्चात कई प्रकार के कर्मकांडों और अंधविश्वासों का बोलबाला है, वहीं इंसानियत और विज्ञान के हित में एक अभूतपूर्व और प्रेरणादायक मिसाल कायम की गई है। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के पावन सानिध्य सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम तेंदूदरहा निवासी 73 वर्षीय भक्तमति कौशल्या बाई साहू (पत्नी स्व. छोटेलाल साहू) के निधन के पश्चात उनके परिवार ने उनकी पार्थिव देह को चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान हेतु दान कर दिया है।
मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) के शरीर संरचना विभाग की प्रमुख डॉ. शिक्षा जांगड़े के समक्ष यह पार्थिव शरीर विधिवत सौंपा गया। इस भावुक अवसर पर उनके पुत्र कृष्ण कुमार साहू, रामफल साहू सहित पूरा परिवार एवं जिला सेवादार हीरा दास मानिकपुरी, राकेश कुर्रे व प्रमोद देवांगन विशेष रूप से मौजूद रहे।
इस ऐतिहासिक कदम के पीछे संत रामपाल जी महाराज की वह अनूठी और तार्किक शिक्षा है, जो समाज को पाखंड से निकालकर यथार्थ की ओर ले जा रही है। गरुड़ पुराण व अन्य शास्त्रों का सटीक हवाला देते हुए गुरुदेव ने समाज को स्पष्ट किया है कि मृत्यु उपरांत मृत्युभोज, पिंडदान या अन्य कर्मकांड सर्वथा व्यर्थ हैं। मनुष्य को जीते जी शास्त्रोक्त भक्ति करनी चाहिए, तभी आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। इसी ज्ञान से प्रेरित होकर अनुयायी मरणोपरांत रूढ़िवादी क्रियाओं का त्याग कर 'देह दान' जैसे महादान को अपना रहे हैं।
कौशल्या बाई जी का यह देहदान भावी डॉक्टरों और चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए मानव शरीर की संरचना समझने में एक मील का पत्थर साबित होगा। मृत्यु के बाद भी मानवता के काम आना, संत रामपाल जी महाराज की शिक्षाओं का ही वह चमत्कार है, जो समाज को सेवा और परोपकार की एक नई व सार्थक दिशा दिखा रहा है। #BodyDonation #Bilaspur #Chhattisgarh #SantRampalJiMaharaj #HumanityFirst #TrueKnowledge #SANewsChhattisgarh
Chhattisgarh, India | Sep 10, 2026