
मुख्य सचिव का दो दिवसीय भरतपुर दौरा
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने साइबर थाने का किया निरीक्षण
भरतपुर, । राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास रविवार को दो दिवसीय दौरे पर भरतपुर पहुंचे। भरतपुर सर्किट हाउस पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस अवसर पर आईजी डॉ. प्रीति चंद्रा, जिला कलक्टर कमर चैधरी, जिला पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना,जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मृदुल सिंह, बीडीए आयुक्त कनिष्क कटारिया, एएसपी धर्मेंद्र यादव एवं प्रशिक्षु आईएएस भानु शर्मा ने अगवानी की।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं पीड़ितों को त्वरित राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला मुख्यालय स्थित साइबर थाने का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए तकनीकी क्षमता, त्वरित प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है। साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप को देखते हुए पुलिस तंत्र को आधुनिक तकनीक एवं नवाचारों के माध्यम से लगातार सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
उन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक साइबर क्राइम सेल की संरचना, उपलब्ध तकनीकी संसाधनों, हेल्पलाइन 1930 के संचालन तथा शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को साइबर अपराध नियंत्रण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने संभागीय जिलों में लंबित साइबर प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए आईजी डॉ. प्रीति चंद्रा को निर्देश दिए कि साइबर अपराधों के सफल निस्तारण से संबंधित सफलता की कहानियां समाचार पत्रों एवं मीडिया को उपलब्ध कराने के साथ ही पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा की जाएं, ताकि आमजन में साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
मुख्य सचिव ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज प्रकरणों की जानकारी लेते हुए सभी प्रकरणों में ऑनलाइन रिपोर्टिंग के साथ-साथ आवश्यक ऑफलाइन दस्तावेजों का भी सुव्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के प्रभावी निस्तारण के लिए कार्मिकों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने तथा उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। उन्होंने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज होने से लेकर एफआईआर एवं जांच की प्रक्रिया तक प्रत्येक स्तर की जानकारी ली। अधिकारियों द्वारा साइबर अपराध की शिकावत प्राप्त होने से लेकर उसके पंजीकरण, प्रारंभिक जांच, डिजिटल साक्ष्य के संकलन एवं विष्लेषण, बैंकिंग ट्रांजेक्जन की जांच, संदिग्ध बैंक खातों पर आवश्यक कार्रवाई, धनराशि के ट्रेल का अनुसरण तथा पीड़ितों को सहत प्रदान करने हेतु की जाने वाली कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने साइबर अपराध की सूचना प्राप्त होने तथा संबंधित बैंक खातों को ब्लॉक किए जाने में लगने वाले समय का विश्लेषण करने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ितों को यथाशीघ्र राहत उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम एवं प्रकरणों के त्वरित निस्तारण के लिए बैंकों सहित संबंधित एजेंसियों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया।
मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए शिकायत प्राप्त होने से लेकर राशि को सुरक्षित कराने, एफआईआर दर्ज करने और जांच पूरी करने तक प्रत्येक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इससे साइबर अपराध नियंत्रण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
उपाधीक्षक साइबर क्राइम पुरूषोत्तम ने बताया कि नेशनल साइबर क्रइम रिपेार्टिग पोर्टल 1930 पर 1 जनवरी से 4 अक्टूबर 2026 तक कुल 2905 शिकायतें दर्ज की गई जिनमें 770 शिकायतों को जांच के बाद बंद किया गया। इनमें से 43 प्रकरणों में एफआईआर दर्ज की गई तथा 2092 शिकायतों की जांच जारी है।
उन्होंने बताया कि नेशनल साइबर क्रइम रिपेार्टिग पोर्टल 1930 पर दर्ज प्रकरणों में रिपोर्ट की गई राशि रू 7 करोड़ 63 लाख 48 हजार 481 रू. हैं जिसमें से कुल होल्डलीन राशि रू 2 करोड़ 20 लाख 21हजार 446 रू. है तथा कुल रिफंड राशि रू 19 लाख 87 हजार 015 रू. है।
उन्होंने बताया कि जिले में म्यूल खाता धारको के विरूद्ध 21 कार्यवाही की गई है। खाताधारको के विरूद्व प्रकरण पंजीवद्व किये गये जाकर 08 म्यूल खाताधारको को गिरफतार किया जा चुका है। जिले में चैक विड्राल हॉट स्पॉट लोकेशन के विरूद्ध 20 कार्यवाही की गई है। चैक विड्राल हॉट स्पॉट लोकेशन मे से 05 लोकेशन पर 03 खाताधारको के विरूद्व प्रकरण पंजीबद्व किया गया है। जिले में प्रतिबिम्व पोर्टल पर हॉटस्पॉट लोकेशन के विरूद्ध कार्यवाही जिले में कुल प्राप्त 86 हॉटस्पॉट लोकेशन में से 49 लोकेशनो पर कार्यवाही की गई।
उन्होंने बताया कि साईबर जागरूकता अभियान चलाये जाकर स्कूलो में बच्चों को प्रश्नोत्तरी के माध्यम से, बस स्टैण्ड व रेल्वे स्टेशन आदि सार्वजनिक स्थानों पर पम्पलेट बटवाये जाकर लोगों को साईबर अपराधो के प्रति जागरूक किया गया एवं सेंवानिवृत्त कर्मचारियों को को डिज्टिल अरेस्ट के प्रकरणों से बचाव हेतु सेमीनार का आयोजन किया गया।
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