
रिश्तों में थोड़ी दूरी भी जरूरी है
रिश्ते, व्यवहार और अपनापन—थोड़ी दूरी में ही अक्सर खूबसूरत रहते हैं
रिश्ते जिंदगी की सबसे खूबसूरत दौलत हैं, लेकिन हर रिश्ते की अपनी एक सीमा होती है। कुछ रिश्ते दूर रहकर भी दिल के बेहद करीब रहते हैं, जबकि कुछ रिश्ते जरूरत से ज्यादा नजदीक आकर धीरे-धीरे बोझ बन जाते हैं।
कहते हैं न—हर चीज की अति नुकसानदायक होती है। यही बात रिश्तों पर भी लागू होती है।
रिश्तों में अपनापन होना जरूरी है, लेकिन हर दिन की बेवजह बातचीत, हर छोटी-बड़ी बात पर चर्चा, हर मामले में दखल और जरूरत से ज्यादा मेल-जोल कई बार उसी अपनापन को कमजोर कर देता है। शुरुआत में जो बातें अच्छी लगती हैं, वही लगातार दोहराए जाने पर खटकने लगती हैं। छोटी-छोटी बातों से गलतफहमियां पैदा होती हैं और फिर वही गलतफहमियां धीरे-धीरे मन में कड़वाहट का रूप ले लेती हैं।
दूरी का मतलब रिश्ते खत्म करना नहीं होता।
कभी-कभी दूरी रिश्तों को बचाने का सबसे समझदार तरीका होती है।
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें रोज मिलने की जरूरत नहीं होती। महीनों बाद मिलिए, फिर भी अपनापन वही रहता है। क्योंकि वहां अपेक्षाएं कम होती हैं, शिकायतें कम होती हैं और एक-दूसरे की जिंदगी में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं होता।
वहीं दूसरी तरफ जब हम किसी रिश्ते में जरूरत से ज्यादा घुल-मिल जाते हैं, तो सामने वाले की कमियां ज्यादा दिखाई देने लगती हैं। उसकी बातें, आदतें और व्यवहार हमें प्रभावित करने लगते हैं। फिर छोटी-सी बात बड़ी लगती है, सामान्य मजाक अपमान लगने लगता है और सलाह हस्तक्षेप महसूस होने लगती है।
यही वजह है कि रिश्तों में प्रेम के साथ-साथ मर्यादा और एक-दूसरे की निजी सीमाओं का सम्मान भी जरूरी है।
हर बात जानना जरूरी नहीं।
हर बात बताना जरूरी नहीं।
हर बात पर राय देना जरूरी नहीं।
और हर रिश्ते में रोज उपस्थित रहना भी जरूरी नहीं।
कभी-कभी सामने वाले को उसकी जिंदगी जीने दीजिए और खुद भी अपनी जिंदगी में व्यस्त रहिए। जब मिलने का अवसर मिले तो पूरे मन से मिलिए, जब जरूरत हो तो पूरे दिल से साथ खड़े रहिए और जब दूरी जरूरी हो तो उसे भी सम्मानपूर्वक स्वीकार कीजिए।
रिश्तों की खूबसूरती इस बात में नहीं कि हम एक-दूसरे के कितने करीब हैं, बल्कि इस बात में है कि दूरी होने के बावजूद हमारे दिलों में एक-दूसरे के लिए सम्मान और अपनापन कितना बाकी है।
इसलिए रिश्तों को पकड़कर रखने की बजाय उन्हें सांस लेने की जगह दीजिए।
हर रिश्ता रोज की बातचीत का मोहताज नहीं होता।
कुछ रिश्ते दूर रहकर ही ज्यादा मजबूत रहते हैं, क्योंकि उनमें मुलाकात कम होती है लेकिन सम्मान, अपनापन और विश्वास बना रहता है।
याद रखिए—
रिश्तों में इतनी नजदीकी भी अच्छी नहीं कि अपनापन बोझ बन जाए और इतनी दूरी भी नहीं कि रिश्ता ही खत्म हो जाए। सही रिश्ता वही है जिसमें प्रेम भी हो, सम्मान भी हो और एक-दूसरे के लिए थोड़ी-सी जगह भी हो।