
#BRICS_Summit2026
दिल्ली में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर, रिश्तों में नई गर्माहट के संकेत
नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन सिर्फ वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों का मंच नहीं रहने वाला है। इस बार भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित आमने-सामने की बातचीत ने सम्मेलन की अहमियत और बढ़ा दी है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की दिल्ली यात्रा को दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बाद सावधानी भरे सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात के एजेंडे और संदेश पर सबकी निगाहें हैं।
BRICS Summit 2026: वैश्विक चुनौतियों के बीच दिग्गजों का जमावड़ा
BRICS Summit 2026 के लिए राजधानी में दुनिया के प्रमुख नेताओं का जमावड़ा शुरू हो चुका है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली पहुंचने के बाद अब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मौजूदगी ने सम्मेलन को खास कूटनीतिक महत्व दे दिया है। 11 सदस्यीय BRICS समूह ऐसे दौर में बैठक कर रहा है, जब दुनिया युद्ध, व्यापारिक तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती वैश्विक शक्ति-समीकरण जैसी चुनौतियों से जूझ रही है।
मोदी-शी द्विपक्षीय वार्ता की तैयारियां
शी जिनपिंग की भारत यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संभावित द्विपक्षीय बैठक है। चीन के भारत में राजदूत शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि दोनों देशों के बीच राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री मोदी की बैठक की तैयारियां चल रही हैं। उनके मुताबिक, यह लगातार तीसरा साल होगा जब दोनों नेता आमने-सामने मिलेंगे। इससे पहले उनकी मुलाकात कज़ान और तियानजिन में हुई थी।
संवाद और सहयोग का सकारात्मक संदेश
चीनी राजदूत के बयान को केवल शिष्टाचार संदेश के तौर पर नहीं देखा जा रहा। उन्होंने भारत और चीन के बीच संवाद बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने, मतभेदों को उचित तरीके से संभालने और दोनों देशों के नेताओं के रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने पर जोर दिया। पड़ोसी देशों के बीच बेहतर संबंधों की वकालत भी उनके संदेश का प्रमुख हिस्सा रही।
रिश्तों में सुधार और भरोसे की कसौटी
दरअसल, भारत-चीन संबंध पिछले कुछ वर्षों में सीमा तनाव के कारण बेहद संवेदनशील रहे हैं। ऐसे माहौल में दोनों शीर्ष नेताओं की लगातार बैठकों को संवाद की बहाली के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि संभावित वार्ता केवल राजनीतिक संदेश तक सीमित रहती है या सीमा, व्यापार और आपसी भरोसे जैसे कठिन विषयों पर भी आगे बढ़ती है।
BRICS का व्यापक एजेंडा और रणनीतिक संतुलन
BRICS के व्यापक एजेंडे में आर्थिक सहयोग के साथ ऊर्जा और वैश्विक चुनौतियां भी प्रमुख रहने वाली हैं। रूस की सक्रिय मौजूदगी और ईरान समेत अन्य सदस्य देशों की भागीदारी इस मंच को और रणनीतिक बनाती है। भारत के लिए सम्मेलन एक साथ कई मोर्चों पर कूटनीतिक संतुलन साधने का अवसर है।
सख्त सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति पर असर
दिल्ली में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के आगमन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी की गई है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की संभावित बातचीत इस पूरे सम्मेलन का ऐसा क्षण बन सकती है, जिसका असर सिर्फ भारत-चीन संबंधों पर नहीं, बल्कि BRICS के भीतर शक्ति-संतुलन और वैश्विक कूटनीति पर भी दिखाई दे सकता है।